शहर में यातायात व्यवस्था की बिगड़ी चाल, हर तरफ ट्रैफिक जाम
आखिर कब निजात मिलेगी जाम की समस्या से
जनमत जागरण न्यूज़ @ नलखेड़ा
शहर के ट्रैफिक जाम की व्यवस्था ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हर दिन लगने वाला जाम न सिर्फ लोगों के लिए मुसीबत बन गया बल्कि व्यापार की दृष्टि से भी यह जाम अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। बाजार में अतिक्रमण की बढ़ती जद का आलम यह है कि प्रमुख चौराहों से लेकर चौड़ी सड़कों और गलियों तक में जाम की भीषण स्थिति है। इन दिनों यह जाम और भी अधिक लोगों को परेशान कर रहा है। फुटपाथ पर सजी दुकानें और ट्रैफिक सिस्टम की बिगड़ी चाल ने लोगों को बाजार जाने से रोक दिया है।
दुर्घटनाओं का बना रहता है खतरा
गौरतलब है कि नगर की सड़को पर पैदल यात्रियो सहित स्कूली छात्र-छात्राओं को भारी वाहनों के कारण हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। भारी वाहनो से लग रहे जाम के कारण आए दिन छोटी-मोटी दुर्घटनाएं भी घटित हो रही है। हालांकि प्रशासन द्वारा कई बार व्यवस्थाएं बनाने प्रयास भी किए गए है लेकिन कुछ ही दिनो में यह कार्रवाई दिखावा बन कर रह जाती है।
भारी वाहनों से सबसे ज्यादा परेशानी
बाजार से सामान खरीदने वाले किसान भी अपने टैक्टर-टॉलियों को बीच बाजार में खडा कर देते है। जिससे भी नगर में जाम की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा हाथ ठेला व्यापारी एवं दो पहिया वाहन भी नगर में जाम की स्थिति निर्मित कर रहे है। यदि प्रशासन टैक्टर-ट्रालियो एवं दों पहिया वाहनों के लिए पार्किग की उचित व्यवस्था कर देता है, तो कुछ हद तक यातायात व्यवस्था को सुचारू किया जा सकता है।
नगर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था एक बार फिर सुर्खियो में है। क्योकि बिगड़ी यातायात व्यवस्था के कारण आए दिए जाम लगना एवं दुर्घटनाएं होना शहर में आम बात हो गई है। वही आए दिन सड़को पर लग रहे जाम से नागरिको का पैदल चलना भी दुभर हो गया है, लेकिन यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन और नगर परिषद् ने कोई कदम नही उठाया है, जिससे लोगों में आक्रोश है। फसलों का सीजन आते ही प्रति वर्ष हमेशा नगर में ऐसे ही हालात बनते है, पिछली बार तो इन हालातों से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा योजना बनाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू किया गया था, लेकिन इस बार प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नही है। वही नगर की यातायात व्यवस्था का मुद्दा वर्षो पुराना मुद्दा है, क्योकि नगर में यातायात व्यवस्था वर्षो से बिगड़ी हुई है। और हर बार शान्ति समिति की बैठक या प्रशासनिक स्तर की बैठकों में यातायात का मुद्दा उठाया जाता है एवं वह मुद्दा प्रोसेडिंग में लिखा जाता है, लेकिन उस समय जो यातायात व्यवस्था को सुधारने की बात प्रशासनिक अधिकारियों और नगर के जनप्रतिनिधियों द्वारा कही जाती है, वह लिखावे मात्र रह जाती है, एवं हालात ज्यौ के त्यौ बने रहते है।
मुख्य मार्ग पर पर्याप्त है सड़को की चौड़ाई
नगर में मुख्य मार्ग पर सड़कों की चौड़ाई पर्याप्त है। परन्तु नगर की रात में चौड़ी नजर आने वाली सड़कें दिन में संकरी हो जाती हैं। मुख्य मार्गो पर निर्मित दुकाने नगर परिषद् से प्राप्त परमिशन से कही अधिक कब्जा कर दुकानदार दुकाने संचालित कर रहे है। आखिर सवाल यह उठता है, कि जिम्मेदारों को पता होने के बावजूद कार्यवाही क्यों नहीं की जाती है ? बेतरतीब तरीकों से बन रहे वाहनों और इन दुकानों पर पहुंचे ग्राहकों के वाहनों से जाम की स्थितियां बन रही है।
पार्किंग का अभाव
नगर में मां बगलामुखी का विश्व प्रसिद्ध मंदिर होने से नगर में यातायात का दबाव बना रहता है। सम्पूर्ण नगर में पार्किंग व्यवस्था का अभाव है। अव्यवस्थित जाम का आलम यह है कि मंदिर में पधारें दर्शनार्थियों को लखुन्दर नदी से मंदिर तक पहुँचने में काफी ज्यादा समय लग जाता है। मंदिर पहुँच मार्ग पर भी मंदिर तक पहुँचने हेतु कोई सुव्यवस्थित होर्डिग्ंस नहीं बने हुए है। ऐसे में जाम में फंसकर दर्शनार्थी परेशान होता रहता है। नगर का ऐसा कोई भी मार्ग नहीं है। जहाँ रोजाना जाम की स्थिति निर्मित नहीं रहती है। यहां प्रमुख समस्या पार्किंग का अभाव है। पार्किंग नहीं होने के कारण फुटपाथों एवं सड़कों किनारे वाहनों का जमघट लगा रहता है। स्थिति यह रहती है कि लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाजार में सड़क तक दुकानें सजी हुई हैं। चारो तरफ अतिक्रमण होने से सड़कें संकरी हो गई है। बाजार में निकलने वाले बाइक सवार हों या पैदल राहगीर, हर दो कदम पर सड़क जाम में फंस जाते हैं। वहीं माँ बगलामुखी मंदिर के मुख्य मार्ग के दोनों ओर बने फूटपाथ जिस प्रयोजन हेतु बनाए गए उनका केवल मात्र दुरूपयोग किया जा रहा है।
सड़कों तक फैला आतिक्रमण
गणपति दरवाजे से चौक बाजार तक की स्थिति तो काफी बदतर अव्यवस्था में पहुंच गई है। इस मार्ग की हालत यह हो गई कि यदि नगर में एक वाहन बाजार में खड़ा हो जाता है, तो जाम की स्थिति बन जाती है। जिसका सबसे बड़ा कारण यहां पर फैला हुआ सड़क तक अतिक्रमण है। व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानें खोलने के साथ ही अपने सामान को सड़क तक फैला लिया जाता है। बदहाल यातायात के मुख्य चौराहों पर लग रहे पल-पल जाम के कारण हर कोई त्रस्त है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सबकुछ जानकर भी इस समस्या को लेकर अनभिज्ञ बने हुए हैं। जिम्मेदारों द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर मात्र खानापूर्ति की जाती है। जिसका शिकार गरीब हाथठेले वाले बन जाते है। जिन्है डरा धमकाकर दो-चार दिन हेतु अपनी वाहवाही लूट कर हालातों को पुनः वही शक्ल दे दी जाती है। और वास्तविक अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।

इनका कहना है –
मामला आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है जो उचित है शीघ्र ही नगर परिषद्, राजस्व विभाग एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा कार्यवाही की जाएगी।
सोहन कनास, सुसनेर अनुविभागीय अधिकारी



