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आगर मालवाउज्जैनमध्यप्रदेश

महिलाओं ने दशामाता व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत

जनमत जागरण न्यूज़ @ नलखेड़ा

भारत परंपराओं और तीज-त्योहारों को देश है. यहां की हवा में हर पल सकारात्मक रहने की सुगंध है और आध्यात्म हमें इसी तरह हर चिंताओं से मुक्त रहने की प्रेरणा देता है. यह वजह है कि हिंदी पंचांग में हर एक तिथि व्रत और त्योहार के रूप में मनाई जाती है. इसी कड़ी में रविवार को माताएं दशा माता का पूजन किया। दशा माता व्रत दशा यानी स्थिति सुधारने के लिए किया जाता है। दशा माता कोई और नहीं बल्कि मां पार्वती का ही स्वरूप है। ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं ये व्रत करती हैं उनकी परेशानियां दूर हो जाती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि, शांति, सौभाग्य और धन संपत्ति बनी रहती है। महिलाएं इस दिन दशा माता और पीपल की पूजा कर सौभाग्य, ऐश्वर्य, सुख-शांति और अच्छी सेहत की कामना करती हैं।
नगर में प्रातः काल से ही सुहागिन महिलाएँ का जमावड़ा पीपल के वृक्षो के पास दिखाई दिया। दशामाता व्रत के दिन मुख्यत भगवान विष्णु के स्वरूप पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाओं ने कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाई हैं और पीपल वृक्ष की प्रदक्षिणा करते उसकी पूजा की। सुहागिन महिलाओं ने आज इस डोरे की पूजा के बाद पूजन स्थल पर नल-दमयंती की कथा सुनी। इसके बाद महिलाएं अपने घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाए।

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