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भीतराघात के चलते हार, विवाद गहराया, भोपाल पहुंचा मामला

सांसद गुट की भूमिका पर उठ रहे सवाल, लोकसभा चुनाव में भाजपा को हो सकता है नुकसान

 जनमत जागरण @ सुसनेर से संजय जैन :     विधानसभा चुनाव में भीतराघात के चलते भाजपा को मिली हार का विवाद अब धीरे-धीरे गहरा होता जा रहा है। साथ ही यह मामला अब भोपाल भी पहुंच चुका है। पूरे मामले में सारी जानकारी मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन के मुखियां तक पहुंच चुकी है। इस हार में सांसद गुट की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे है। साथ ही एक संगठन के द्वारा चुनाव प्रचार के नाम पर आगर और सुसनेर के भाजपा प्रत्याशीयों से बडी रकम की वसूली भी चर्चाओ में है। अब इस संगठन के लोग ही इस मामले की छानबीन भी कर रहे है। 
        विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राणा विक्रमसिंह को 12 हजार 645 मतो से हार मिलने के बाद 6 दिसम्बर को नगर की एक होटल में भाजपा की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कार्यकर्ताओ ने भीतरघात करने वाले गद्दारो को पार्टी से बाहर करने की मांग जोर-शोर से उठाई थी। साथ ही भाजपा संगठन के कुछ पदाधिकारीयो की भूमिका पर भी कार्यकर्ताओ ने सवाल उठाए थे। समीक्षा बैठक में यह बात भी उठी थी की सरकार तो भाजपा की बन रही है। इसलिए कार्यकर्ताओ को चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद एक सांसद ने प्रशासन के वरीष्ठ अधिकारी को फोन करके संगठन से जूडे लोगो की बात मानने तथा संगठन के द्वारा बताए गए कार्यो को किये जाने के निर्देश दिए थे। इस बात की जानकारी दूसरे गूट तक भी पहुंची, भाजपा प्रत्याशी राणा विक्रमसिंह और क्षेत्रिय सांसद रोडमल नागर के गूट के बीच पहले भी कई बार टकराहट हो चुकी है।    भाजपा की ही सरकार में शासकीय आयोजनो में यह तलखी अक्सर कई बार देखने को मिली है। भाजपा संगठन से जूडे एक पदाधिकारी के द्वारा एक संगठन के नाम पर सुसनेर और आगर के भाजपा प्रत्याशीयों से चुनाव प्रचार के लिए बडी रकम भी ली गई। 
       जबकि उक्त संगठन के पदाधिकारीयो को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। संगठन से जूटे लोग चुनाव प्रचार में खामोशी से अपनी भूमिका निभाते रहे। अब जानकारी लगने के बाद संगठन के जिम्मैदार ही अपने स्तर से मामले की छानबीन कर रहे है। अगर इस संगठन की पडताल में भीतराघात और राशि वसूलने की बात सही पाई जाती है तो फिर यह संभव है कि वे ऐसे लोगो की घर वापसी हो सकती है। तथा उन्है संगठन की जिम्मैदारी से भी हटाया जा सकता है। 
      कुल मिलाकर के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद भीतराघात का खुलासा होने की वजह से भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह से कार्यकर्ताओ का मनोबल टुटा है, उसे जिम्मैदारो को समय रहते संभालना होगा। अन्यथा आने वाले लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से भाजपा को एक बार फिर हार का सामना करना पड सकता है।

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