राम ही राष्ट्र के प्राण हैं आध्यात्मिक झांकियों में आज के विवेकानंदो ने दिया संदेश
राष्ट्रीय युवा दिवस विवेकानंद जयंती पर विवेकानंद स्कूल में निकली नगर में भव्य और दिव्य शोभायात्रा के साथ दर्जनों झांकियां
जनमत जागरण @ सोयतकलां :: दर्जनों आध्यात्मिक झांकियों में आज के विवेकानंदो ने यह संदेश दिया कि राम ही राष्ट्र के प्राण हैं, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह अलौकिक, अभूतपूर्व और अविस्मरणीय होगा ।
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यह ओजस्वी उद्घोष शुक्रवार को विवेकानंद स्कूल के द्वारा विवेकानंद जयंती के अवसर पर निकल गई शोभायात्रा और झांकियां के माध्यम से यह संदेश नगर वासियों को दिया । नगर में विवेकानंद विद्यालय द्वारा आज के विवेकांनदों का स्वरूप धरे युवा छात्र-छात्रा निकले शोभायात्रा में भगवान राम की भव्य और दिव्य झांकी तो वहीं दूसरी और हाथ में तलवार लेकर प्रदर्शन करते हुए आजके विवेकानंद युवा दिखाई दिए।

इन सभी झांकियां का एक ही संदेश था राम राष्ट्र की संस्कृति है राम राष्ट्र के प्राण हैं राम के मंदिर का मतलब राष्ट्र मंदिर है आपको बता दें कि राममंदिर को राष्ट्र मंदिर बनाने की अयोध्या में भव्य तैयारियां चल रही है गांव-गांव में भी ऐसा दिव्य वातावरण बन रहा है
विवेकानंद स्कूल द्वारा निकाली गई है भव्य दिव्य शोभायात्रा में यह संदेश दिया कि राम राष्ट्र की संस्कृति है । 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराममंदिर पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां चल रही हैं तो वहीं दूसरी ओर रैली में विवेकानंद बने नन्हे छात्र छात्रों ने कहा यह संदेश दिया कि राम राष्ट्र के प्राण हैं रैली में आज के विवेकांनदों द्वारा दिए गए उद्घोष से युवाओं में पॉजिटिव एनर्जी भर दी ।
– विवेकानंद के संदेशों का उद्घोष देते रहे छात्र

- उठो मेरे शेरों, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, न ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है, तुम तत्व के सेवक नहीं हों। उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक कि लक्ष्य न प्राप्त हो जाए।
- – ब्रह्मांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर हैं। यह हम ही हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने हाथ रखा है और रोते हुए कहा कि अंधेरा है।
- – अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है, और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।
- – किसी की निंदा ना करें, अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।
- – सच को कहने के हजारों तरीके हो सकते हैं और फिर भी सच तो वही रहता है।
- – लक्ष्यविहीन हो रहे आज के भारतीय युवा के लिए जो भौतिक सुख के पीछे भागते हुए मानसिक तनाव और थकान झेल रहा है स्वामी विवेकानंद द्वारा सुझाया गया आध्यात्मिक मार्ग बहुत ही कारगर साबित हो सकता है ।




