एक्सक्लूसिव रिपोर्टआगर मालवामध्यप्रदेश

✍️ म.प्र. सरकार का “जल गंगा संवर्धन” अभियान नगर में तब सफल होगा जब जीवन दायिनी कंठाल नदी को मिले पुनर्जीवन

🟠 नगर की जीवन दायिनी कंठाल नदी हुई प्रदूषित ओर उथली तो बंद हो गये नगर की समृद्धि के द्वार

जनमत जागरण @ सोयतकलां से राजेश कुमरावत की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :: नदी के किनारे बसे गांव,नगर व शहर हमेशा समृद्ध रहे हैं । ऐसी मान्यता है कि जिस नगर , गांव में नदी निकली है वह नगर, गांव समृद्ध रहा है । वह नगर अपने आप में समृद्धता की निशानी प्रकट करता है । नदी बहुत सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है। नगर के लिए गौरव और खुशी की बात है नगर के समीप नदी बहती है। किन्तु नगर के समीप बहने वाली जीवन दायिनी कंठाल नदी पर खनन माफिया की नजर लग गई । लगभग तीन से चार दशक से नगर के समीप बहने वाली कंठाल नदी से उत्खनन जारी है जब से ही नगर की समृद्धि चली गई । यहां तक की अवैध उत्खनन के कारण पशु धन ही नहीं इंसान भी काल के मुंह में जा रहे हैं अवैध उत्खनन के कारण खनन माफिया ने नदी खोद डाली और उसकी जीवन रेखा बदल दी, तब से नगर की दिशा और दशा भी बदल गई और नगर की समृद्धता की निशानी खत्म हो गई । नगर के पेड़ियाघाट , उंडाघाट, नरसिंह घाट सभी घाट वीरान हो गए । आज आवश्यकता है स्थानीय प्रशासन मध्यप्रदेश शासन के इस अभियान को गंभीरता से ले ओर इस अभियान का तहत नगर की जीवनदायनी को पुनर्जीवित करने का संकल्प लें, तब नगर में इस अभियान की सार्थकता सिद्ध होगी और नगर की जीवन दायिनी कंठाल नदी अगर पुनर्जीवित होती है तो नगर की समृद्धि वापस आ सकती है ।

🟠 क्या है " जल गंगा संवर्धन " अभियान::  आपको बता दें कि जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए मध्यप्रदेश सरकार की पहल " जल गंगा संवर्धन " अभियान जो की 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से 16 जून गंगा दशहरा तक चलाया जा रहा है । इस अभियान के जो नगर और शहर नदियों के किनारे बसे हुए हैं वहां की नदियों की साफ सफाई तथा गंदे नाले की निकासी का भी  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सख्त निर्देश देकर उनका संरक्षण कर पुनर्जीवित करने पर जोर दिया है । तथा इस अभियान के तहत कुएं ,बावड़ी ,नदी,  घाट और मंदिरों की साफ सफाई एवं जीर्णोद्धार पर जोर दिया है ।
प्रतिबंध क्षेत्र के लिए स्टेट के जमाने का लगा हुआ है शीलालेख

🟠 स्टेट के जमाने का लगा हुआ है शीलालेख ::उण्डा घाट पर आज भी स्टेट के जमाने का एक शिलालेख लगा हुआ है उस शिलालेख में नदी का जो प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर रखा है उसमें रेत उत्खनन करना और मछली का शिकार करना प्रतिबंधित था लेकिन आज स्थानीय निकाय की उदासीनता के चलते नगर की जीवनदायनी कंठाल नदी की दिशा और दिशा बदल गई और जिसके कारण नगर की समृद्धि के द्वारा बंद हो गए ।

पेडिया घाट के समीप गंदगी से लबरेज कंठाल नदी
 
🟠 एक पहल @ कंठाल नदी के पुनर्जीवन के लिए इन पांच बिंदुओं पर हो अमल , तब हो सफल अभियान ::
◾ नगर परिषद शमशान घाट से लेकर नृसिंह घाट के नीचे धोरा भाटा तक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करें ।इस क्षेत्र में रेत उत्खनन और मछली का शिकार करना प्रतिबंधित घोषित करें ।
प्रतिबंधित क्षेत्र में सूचना हेतु सूचना पत्र बोर्ड लगावे । इस क्षेत्र में अगर कोई रेत उत्खनन करता है तो उसे पर कड़ी कार्रवाई की जावे ।
◾ नगर में चोसठ माता मंदिर के समीप जो कचरा-कुटा डाला जाता है उसे से बंद किया जाए । वह सारा कचरा नदी में मिल रहा है और नदी प्रदूषित हो रही है ।
नगर के सभी गंदे नालों का पानी नदी के बाहर धोरा बात के यहां पर ले जाकर छोड़ जाए ऐसी योजना बनाई जाए । जिससे कि नदी स्वच्छ रहेगी तो नगर के सभी घाट जीवित रहेंगे ।जब घाट जीवित रहेंगे तो नगर के समीप प्राचीन दर्जनों मंदिरों में रौनक वापस लौट आएगी ।
◾ नगर के आम नागरिक भी तन मन से कंठाल नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए अपने प्रयास करें और स्थानी परिषद को उचित सुझाव और सलाह दें । स्थानीय निकाय नगर के सभी घाटों को पुनर्जीवित करने के लिए घाटों का जीर्णोद्धार करें ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!