आपके लेख
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राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में ‘आधार पत्र’ की निर्णायक भूमिका: कैसे तय होती है आपकी पाठ्यपुस्तक की दिशा?
राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में आधार पत्र का पुस्तक निर्माण में योगदान ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’सदस्य – मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निर्माण…
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अंबेडकर को समझने का सही समय: क्या हम सिर्फ जयंती मनाकर कर्तव्य निभा रहे हैं?– डॉ बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’ का विशेष लेख
अंबेडकर को समझने का सही समय डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’सेवानिवृत्त प्राचार्य, केंद्रीय विद्यालय संगठनसदस्य, म.प्र. पाठ्यपुस्तक निर्माण एवं देखरेख समिति…
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“गुड़ी पड़वा: सृष्टि आरंभ दिवस का ऐतिहासिक रहस्य! – जानिए म.प्र. शासन संस्कृति विभाग द्वारा विचाराधीन ‘अनंत से अनंत तक’ ग्रंथ में डॉ. बालाराम परमार का विश्लेषण”
अनंत से अनंत तक, गुड़ी पड़वा – सृष्टि आरंभ दिवस !!✍️ लेखक – डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’ 📖 भाग –…
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“भ्रष्टाचार की रात: जब सत्ता का उल्लू जागता है!” ✍️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’ | विशेष रिपोर्ट |
भ्रष्टाचार : उल्लू की रात, प्रजातंत्र का ग्रहण ✍️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’ | विशेष रिपोर्ट | जनमत जागरण 🔎…
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जानिए: कैसे ‘नानाजी देशमुख’ का शैक्षिक चिंतन बना विद्या भारती की आधारशिला? – बालाराम परमार ‘हंसमुख’ की दृष्टि से
नानाजी देशमुख का शिक्षा दर्शन: विद्या भारती की नींव कैसे बनी? – बालाराम परमार 'हंसमुख' की विशेष रिपोर्ट "भारत रत्न…
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आलेख एवं अनुभव वृत्तांत :: “राष्ट्रीय चेतना और साहित्यिक संवाद का संगम” 👉 भारती के सपूत: एक समागम, एक संवाद – लेखक : गिरधर दान रतनू दासोड़ी
लेखक परिचय- 🔹 बीकानेर में जन्में चारण साहित्य के सिद्धहस्त हस्ताक्षर की ख्याति एक निबंधकार, समालोचक एवं कहानीकार के रूप…
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“संस्कृति का संग्राम: डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’ की दृष्टि में पाश्चात्य प्रभाव का रहस्य!”
"संस्कृति का संग्राम: डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’ की दृष्टि में पाश्चात्य प्रभाव का रहस्य!" भारतीय संस्कृति पर पाश्चात्य संस्कृति का…
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“स्वामी विवेकानंद: युवाओं की सोच को दिशा देने वाला प्रकाशस्तंभ”
स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए शाश्वत प्रेरणा स्त्रोत✍️ डॉ बालाराम परमार 'हॅंसमुख'जनमत जागरण @ आपके लेख: स्वामी विवेकानंद युवाओं के…
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2025 का हॅंसमुख चिंतन- “नया साल, पुराने सवाल: एकता का सपना या भ्रम का जाल?”
2025 का हॅंसमुख चिंतन: बंटना और कटना बंद हो ! अच्छाइयां हो शुरू !! जनमत जागरण @ आपके लेख:: आज…
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बाल दिवस की परिभाषा पर पुनर्मंथन: आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का संगम – “चाचा नेहरू या वीर बाल दिवस: बच्चों के लिए प्रेरणा का सही विकल्प कौन?”
"बाल दिवस का पुनर्विचार: 14 नवंबर बनाम 26 दिसंबर - 14 नवंबर नेहरू के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले बाल…
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