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शौर्य का शंखनाद : “दहशत की सीमा पर: ब्रह्मोस की दहाड़” – आज का ‘हंसमुख’ गीत ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’


ब्रह्मोस: भारत की सुपरसोनिक हुंकार

✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’

मैं भारत की ब्रह्मोस!
सपनों सी तेज़, वज्र समान कठोर,
सीमाओं की रक्षक, आतंक की भक्षक!

पाकिस्तानी धरती पर जब छाया हो अंधकार,
मैं बनकर बिजली गिरूं, करूं उसका संहार।
न भूलेगा इतिहास, न मिटेगी पहचान,
मैं सटीक हूं, अडिग हूं, हूं भारत की शान!

मेरी सुपरसोनिक गति से कांपते हैं दुश्मन,
मैं जब आऊं, दिखती नहीं — बस विध्वंस ही सुनें!
गति, शक्ति और साहस का अद्भुत संगम,
मेरा हर वार बने आतंक का अंततम।

फौलादी इच्छाशक्ति मेरी पहचान,
सैन्य पराक्रम में हूं दृढ़ प्रमाण।
जहां भी हो आतंकी साया,
ब्रह्मोस वहां गरज के छाया!

लक्ष्य से कभी नहीं चूकती हूं,
भारत की रक्षा में हर बार जुटती हूं।
गाइडेंस सिस्टम मेरा अत्याधुनिक,
कर दूं सटीक वार, बना दूं सब कुछ ऐतिहासिक।

निज वैज्ञानिकों की साधना का स्वरूप हूं,
विश्वसनीयता और विजय की ध्वनि स्वरूप हूं।
‘मत चूके ब्रह्मोस’ — यही मेरा मंत्र,
हर आतंकी को मिटाना ही मेरा यंत्र।

न कोई मुझे देख पाए, न कोई रोक सके,
मुझे तो बस भारत के गौरव को ऊंचा करना है,
दुश्मनों के मंसूबे चूर-चूर करना है।
मैं ब्रह्मोस हूं — भारत की आवाज, भारत का तेज!

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