राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में ‘आधार पत्र’ की निर्णायक भूमिका: कैसे तय होती है आपकी पाठ्यपुस्तक की दिशा?

राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में आधार पत्र का पुस्तक निर्माण में योगदान
✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’
सदस्य – मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निर्माण एवं देखरेख स्थाई समिति
संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पश्चात, शिक्षा क्षेत्र की सर्वोच्च निकाय एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCF) का निर्माण किया। इस आलोक में सभी राज्य सरकारों ने अपनी-अपनी राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या रूपरेखा पर गंभीरता से कार्य आरंभ कर दिया है।
मध्यप्रदेश में पाठ्यपुस्तक निर्माण एवं देखरेख स्थाई समिति के निर्देशन में ‘आधार पत्र’ पर चर्चाएं प्रारंभ हो चुकी हैं। यह ‘आधार पत्र’ आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों के लिए तैयार होने वाली पाठ्यपुस्तकों की नींव बनेगा। इसमें प्रदेश भर से प्राप्त विचारों व सुझावों को समाहित किया जा रहा है।
देशभर में पाठ्यपुस्तक निर्माण को लेकर फैली भ्रांतियाँ
आज देश के कई हिस्सों में यह भ्रांति है कि राज्य सरकारें पाठ्यक्रम निर्माण में केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से निर्णय ले रही हैं। सत्ता में आने वाले दल अपने-अपने विचारों के अनुसार पाठ्यक्रम में फेरबदल कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि आधार पत्र का निर्माण एक व्यापक शैक्षिक विमर्श का परिणाम होता है, जिसमें शिक्षाशास्त्री, शिक्षक, मनोवैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ सम्मिलित रहते हैं।
‘आधार पत्र’ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
- यह स्कूली शिक्षा के उद्देश्यों, लक्ष्यों और संरचना को परिभाषित करता है।
- यह पुस्तक निर्माण में स्पष्ट दिशा और गुणवत्ता की गारंटी प्रदान करता है।
- यह शिक्षार्थी की आवश्यकताओं और मनोवैज्ञानिक संदर्भों को केंद्र में रखकर विषयवस्तु का चयन सुनिश्चित करता है।
शिक्षा एक साझा जिम्मेदारी
‘शिक्षा’ संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इस कारण केंद्र और राज्य दोनों को इसमें अधिकार हैं। केंद्र सरकार के अधीन एनसीईआरटी और राज्यों के अधीन एससीईआरटी/राज्य शिक्षा केंद्र पाठ्यचर्या के निर्माण और कार्यान्वयन में संलग्न हैं। राज्य सरकारें एनसीईआरटी की रूपरेखा का पालन करते हुए अपने सांस्कृतिक, भौगोलिक और सामाजिक संदर्भों के अनुसार उसमें बदलाव कर सकती हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुसार, राज्यों को अपने पाठ्यक्रम में 30% तक जोड़ने या घटाने की छूट है।
एनसीएफ (NCF) के प्रमुख आयाम
- विषयवार पाठ्यक्रम संरचना, लर्निंग आउटकम्स, और मूल्यांकन पद्धतियाँ
- शिक्षक प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन प्रणाली
- शिक्षार्थी केंद्रित शिक्षा को प्रोत्साहन
मध्यप्रदेश का प्रयास और दृष्टिकोण
मध्यप्रदेश में ‘आधार पत्र’ का निर्माण शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों, शिक्षा शास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के सहयोग से हो रहा है। यह दस्तावेज न केवल सामग्री की गुणवत्ता और प्रासंगिकता तय करता है, बल्कि राज्य की शैक्षणिक पहचान को भी मजबूत करता है।
‘आधार पत्र’ पुस्तक निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा, उद्देश्य और गुणवत्ता प्रदान करता है। इसमें शिक्षण सामग्री की प्रस्तुति, भाषा की सरलता और विषय की गहराई का संतुलन सुनिश्चित किया जाता है।
निष्कर्ष – एक सार्थक दस्तावेज, एक ठोस दिशा
‘आधार पत्र’ केवल एक औपचारिक रिपोर्ट नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा के भविष्य की रीढ़ है। इसके माध्यम से हम ऐसी पुस्तकों का निर्माण कर सकते हैं जो बच्चों को जीवन के लिए तैयार करें, सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं।
सार्थक चिंतन:
“शिक्षा वह दीपक है जो अंधकार को नहीं, सोच को मिटाता है — और उसकी लौ है ‘आधार पत्र’ की चेतना।”



