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मोदी ! अकेला वारिस नहीं है तमाम नफ़रत का – शख्स सारे जहां में मोहब्बत की दुकान खोलने की आस लगाए बैठे हैं !!

जनमत जागरण @ आपके लेख :: 

मोदी ! अकेला वारिस नहीं है तमाम नफ़रत का - शख्स सारे जहां में मोहब्बत की दुकान खोलने की आस लगाए बैठे हैं !! =============
✍️ डॉ बालाराम परमार 'हॅंसमुख'      2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा एनडीए गठबंधन 400 पार नहीं हो सका। इसका मलाल मोदी जी को जीवन भर रहेगा। लेकिन 21वीं सदी के  तीसरे दशक में नरेंद्र मोदी वह चाणक्य निकले जिन्होंने तीसरी बार भी  कांग्रेस को 99 सीट पर रोक कर दुनिया को चौंका दिया !!   भाजपा एनडीए गठबंधन को 400 पार न होने देने का श्रेय राहुल गांधी को दिया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में समाजवादी- कांग्रेस गठबंधन के मुखिया अखिलेश यादव- राहुल गांधी और महाराष्ट्र में शरद पवार -उद्धव ठाकरे - राहुल गांधी गठबंधन की बल्ले बल्ले हो गई। वैसे भी दक्षिण भारत में कर्नाटक को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का 1980 से ही कोई विशेष वर्चस्व नहीं रहा है। 2024 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी का प्रमुख विषय फैजाबाद की सीट हारना और राहुल गांधी का  रायबरेली और वायनाड से भारी मतों के अंतर से जितना रहा है।    
⏩  खेर! जीत और हार का  सबका अपना-अपना गणित है । अपनी अपनी कमियां है।अपने-अपने विचार है और हारने वाले पछता रहे हैं और जीतने वालों का हौसला सातों आसमान पर चढ़कर बोल रहा है। जिसकी बानगी राहुल गांधी ने  वर्तमान लोकसभा सत्र के प्रथम दिन ही दिखाकर यह सिद्ध कर दिया है कि 'वह नेहरू -इंदिरा- राजीव- सोनिया के वारिस हैं और भविष्य के प्रधानमंत्री हैं ', और उनमें तथा उनकी नयी नवेली कार्यकारिणी में "भारतीय संस्कृति- सभ्यता - सहिष्णुता - सौहार्दपूर्ण वातावरण -राजनीति का ज्ञान नहीं के बराबर है" !!     
⏩ राहुल गांधी के पार्लियामेंट में हिंदू विरोधी बयान  हिंदूवादी संगठनों के गले नहीं उतर रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया में यहां तक चर्चा है कि मोदी ने पिछले 10 साल में जितने भी कार्य किये, वे जनता को पसंद नहीं  आए।  फुसफुसाने वाले तो यहां तक फुसफुसा रहे हैं कि  'फैजाबाद सहित उत्तर प्रदेश के यादवों, राजस्थान के  राजपूतों तथा महाराष्ट्र के मराठाओं को तो भगवान श्री राम का  अयोध्या में मंदिर निर्माण भी रास नहीं आया' !! ऐसा कहने- लिखने के पीछे तर्क भी है, क्योंकि इन्हीं तीनों राज्य में भारतीय जनता पार्टी- एनडीए गठबंधन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।  
⏩ खेर!अगले 2029 के लोकसभा चुनाव तक गंगा में बहुत सारा पानी बहेगा और मोदी तथा विपक्ष के बीच में बहुत कुछ ठनेगा। यहां यह कहना प्रासंगिक होगा कि 'थोडी जलन बचा के रखना, अगले चुनाव में काम आएगी '!! मेरे साथ साथ तमाम राजनीतिक विश्लेषकों को पिछले दो महीने से  यह समझ में नहीं रहा है कि आखिर मोदी ने  तीसरी बार यह चमत्कार किया कैसे? समझने के प्रयास के लिए राजनीतिज्ञों ,पत्रकारों और समाजसेवियों से बीच-बीच चर्चा करता रहा , लेकिन सटिक उत्तर मुझे Quora पर मिला। जिज्ञासावश मेने ओरा पर प्रश्न डाला कि कांग्रेस को 99 सीट कैसे मिली? उत्तर चोकाने वाला मिला। जिससे 99 सीट को लेकर हिन्दू समाज की नसमझ  उजागर होने के साथ कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के नेता अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, स्टालिन, शरद पवार,डी राजा , शिब्बू सोरेन, अरविंद केजरीवाल, लालू यादव, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे सहित अन्य तमाम अनुसूचित जाति जनजाति के नेताओं का दिवालियापन भी सामने आ गया !!    ⏩ मोदी -शाह- एनडीए गठबंधन की चाणक्य नीति समझना नामुमकिन ही नहीं, अच्छे अच्छे तुर्रम खां की समझ से परे है !! नेहरू -इंदिरा- राजीव- सोनिया गांधी परिवार की जीवनपर्यंत भारत पर एकछत्र राज करने वाली सोच में सेंध लगाकर मोदी ने सिद्ध कर दिया कि "मोदी है तो मुमकिन है।" आइए जानते हैं :" मान लीजिए कि 50 छात्रों की एक कक्षा है। कांग्रेस मॉनीटर के लिए कक्षा का चुनाव जीतना चाहती है। इसलिए वह जनसांख्यिकी को देखती है कि कक्षा में 20 मुस्लिम,30 हिंदू छात्र हैं।जाहिर है, कांग्रेस को जीतने के लिए हिंदु छात्र को  मॉनिटर  के चुनाव में खडा करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस ह्यूम- नेहरू- इंदिरा राजीव गांधी के समय से ही समझदार है।  वह समझती है कि 20 मुस्लिम, 30 हिंदू जनसांख्यिकी सिर्फ दिखावा भर है। वास्तव में मतदान की जनसांख्यिकी तो 20 मुस्लिम,3 ब्राह्मण,2 बनीया,5 राजपूत,5 दलित, 5 महादलित और 10 ओबीसी है । अब  आप समझ गए होंगे कि  कांग्रेस द्वारा मुस्लमान छात्र को मॉनिटर पद पर क्यों चुनाव लड़ाया जाता रहा है। 60 साल में तीन शिक्षा मंत्री, तीन राष्ट्रपति और तीन उपराष्ट्रपति  बनाने के पिछे की मंशा समझ में आ जानी चाहिए देश के मतदाताओं को? बेशक, कांग्रेस गलत है, कोई दो राय नहीं। हालांकि, प्रश्न पर प्रश्न चिन्ह है ? अगर हिंदू - ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में नहीं बंटे होते, तो क्या कांग्रेस तब भी मुस्लमान छात्र को मॉनिटर पद के लिए को चुनती? नहीं न।इस तरह कांग्रेस कई सालों तक भारत रुपी कक्षा पर राज करती रही !!   
⏩ अब फंडा बदलता है। एक नई पार्टी जनसंघ बनती है। 1977 में जनता पार्टी और 1980 में भारतीय जनता पार्टी के रूप में जनता के बीच जाती और कहतीं है कि हमें सरकार बनाने का अवसर दो। उसे पता चलता है कि 20 मुस्लिम पहले से ही कांग्रेस के साथ हैं और शेष हिंदू वोट बंटे हुए हैं ? उसने हिंदूवादी और राष्ट्रवादी संघ परिवार से बात की। संघ परिवार ने कहा कि  हमारा उद्देश्य तो सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास,सामाजिक समरसता और हिंदू हिंदू सहोदरा का है। इस पवित्र यात्रा में  जो भी गंगा नहाने और सनातन संस्कृति सभ्यता फिर से लोटा ने में हमारा जो साथ दे, हम उसके साथ हैं।'                         ⏩ भारतीय जनता पार्टी  के नेताओं ने सोचा कि 'अनेकता में एकता, भारतीय संस्कृति की विशेषता'; वाली पवित्र विचारधारा को आगे बढ़ाने में कोई हर्ज नहीं । इसलिए बीजेपी  हिंदुओं को एकजुट करने और जनसांख्यिकी को 20 मुस्लिम और 3 ब्राह्मण,2 बनीया,5 राजपूत,5 दलित, 5 महादलित और 10 ओबीसी को अब केवल 30 हिंदू बनाने के बारे में सोचने लगी । संघ परिवार और विचारधारा का संबल और संबंध मिला।  कहते हैं कि ईश्वर की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती। इंदिरा गांधी हत्याकांड के बाद हुए चुनाव 1984 में भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ 2 सीटों पर जीत मिली । लेकिन गीता ज्ञान के अनुसार बीजेपी कर्म करती चली गई।फल की इच्छा जनता पर छोड़ दी।   
⏩ इतिहास में बीजेपी के लो परफॉर्मेंस की जब भी बात आती है, तो इन 2 सीटों का उदाहरण जरूर दिया जाता है।अप्रेल 1999 में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पार्टी की मुखिया जे जयललीता के समर्थन वापस लेने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार अल्पमत में गई और लोकसभा में  1 विश्वास मत हार गई थी।  वाजपेयी सरकार को गिराने के उस एक वोट के पीछे तत्कालीन कांग्रेस सांसद और  उड़िसा के मुख्यमंत्री गिरधर गमांग और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सैफुद्दीन सोज जिम्मेदार माने जाते हैं।मोदी इन  घटनाक्रम से  परिचित थे। इसलिए  2024 के लोकसभा चुनाव में हर कदम  सोच समझ कर उठाया गया।  
⏩ मोदी दो कार्यकाल 2014- 2019 और 2019-2024 के लिए सफल हो जाते हैं। अब बारी आई 2024-2029 के लिए अपने बल पर सरकार बनाने की। बीजेपी ने इस बार के आम चुनाव में 240 सीटें स्ट्राइक रेट 54.42%  के साथ जीतीं। सहयोगी दल टीडीपी– चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली तेलुगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश में 16 लोकसभा सीटें जीती । वहीं, जनसेना ने  दो सीटों पर  जीत हासिल की । जद (यू)– नीतीश कुमार की पार्टी ने  12 पर जीत हासिल की। एलजेपी (रामविलास) का स्ट्राइक रेट 100% रहा, पार्टी ने सभी 5 सीटों पर जीत हासिल की !!     
⏩ कांग्रेस, वामपंथी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, समाजवादी, तृणमूल , राकंपा शरद पवार गुट, शिव सेना उद्धव ठाकरे गुट की दिलचस्प स्थिति है, क्योंकि यही दल प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने दिवास्वप्न देख रहे थे। कांग्रेस  के साथ ही साथ उपरोक्त दल हिंदू समर्थक नहीं हो सकते , क्योंकि उनके पास मुसलमानों का समर्थन है। ये दल मुसलमानों का समर्थन बनाए रखने के लिए मुस्लिम और  छद्म सेक्यूलरवाद समर्थक राजनीति जारी रखते हैं। मुस्लिम समर्थक राजनीति के कारण हिंदुओं के पास एकमात्र विकल्प भाजपा और एनडीए बचती है।      
⏩ भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन के नेताओं की अक्ल पर पत्थर पड़ गया और उन्हें यह समझ में नहीं आया कि  भारत में कई क्षेत्रीय मुस्लिम राजनीतिक दल और अम्बेडकर वादी दलों  का उदय हो गया है। हर राज्य में क्षेत्रिय दल कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं। ये क्षेत्रीय दल अब चुनाव में  मुस्लिम, ईसाई, अनुसूचित जाति-जनजाति के वोट शेयर करते हैं और कांग्रेस  अब भयानक संकट में है।  सोशल इंजीनियरिंग और अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ावर्ग , अतिपिछड़ा वर्ग और मुसलमान की आंखों में धूल झोंक कर  चार बार मुख्यमंत्री रहीं  और 1999 में भाजपा के खिलाफ लाल बटन दबाने वाली मायावती का 2024 में सुपड़ा साफ हो गया !! तेजस्विनी यादव चाचा जी से पूछते रह गए कि चाचा अब तो नहीं पलटोगे !! 

✍️ इतना सब कुछ देख कर कहने में आता है कि जा को राखे साइयां मार सके ना कोय। 

⏩ अटल बिहारी वाजपेयी जी  ने  कविता  की ये पंक्तियां मोदी जी के लिए ही लिखी प्रतित होती है: .".....

◾टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी 
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा 
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं।"
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 लेखक विक्रम विश्वविद्यालय के पत्रकारिता संस्थान में नियमित उम्रदराज विद्यार्थी है।

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