कवि/लेखक
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“14 अप्रैल: जयंती से आगे—क्या हम अंबेडकर के विचारों को जीवन में उतार पा रहे हैं?”✍️ डॉ बालाराम परमार
✍️ 14 अप्रैल केवल एक जयंती नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।डॉ. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि उनके विचारों को…
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कोटा में काव्य संग्रह ‘रिश्ते’ का भव्य लोकार्पण: पारिवारिक मूल्यों पर आधारित 108 कविताओं का संकलन बना आकर्षण
विश्व जल दिवस पर कोटा में आयोजित समारोह में हुआ लोकार्पण, साहित्यकारों ने बताया—परिवार से राष्ट्र निर्माण तक की भावनाओं…
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भोजशाला विवाद का निर्णायक मोड़: 1400 बलिदानों के 510 वर्ष बाद न्याय की घोषणा
अंचल का शिक्षा और कला का ऐतिहासिक गौरव : सरस्वती प्रकट स्थल “भोजशाला”🚩 1514 ईस्वी के 1400 हिन्दू बलिदान—510 वर्ष…
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“मीना बाजार” की असलियत: अकबर की अय्याशी से शुरू हुई झूठी परंपरा का सच — क्यों जरूरी है मीना बाजार का पुनर्मूल्यांकन?
मीना बाजार: पुरानी परंपरा का पुनर्मूल्यांकन ✍️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’ भूमिका – परंपरा या परछाई? भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ…
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“मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों पर ताले – क्या बच्चों का भविष्य भी हुआ सील?” जानिए मध्यप्रदेश में शिक्षा के गिरते दरवाज़े का रहस्य”
📰 मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूल बंद – बच्चों के भविष्य पर ताले! ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’(रिटायर्ड शिक्षक एवं माध्यमिक…
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राष्ट्रहित में हो पत्रकारिता , श्री प्रकाश त्रिवेदी 📣 श्री त्रिवेदी बोले – “समस्या नहीं, समाधान बने पत्रकारिता – श्री त्रिवेदी का दृष्टिकोण”
📌 नारद जयंती पर पत्रकारिता के पुनर्जागरण की आवश्यकता पर हुआ आत्ममंथन जनमत जागरण @ आगर-मालवा।नारद जयंती के अवसर पर…
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शौर्य का शंखनाद : “दहशत की सीमा पर: ब्रह्मोस की दहाड़” – आज का ‘हंसमुख’ गीत ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’
ब्रह्मोस: भारत की सुपरसोनिक हुंकार ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’ मैं भारत की ब्रह्मोस!सपनों सी तेज़, वज्र समान कठोर,सीमाओं की…
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“भारत अब युद्ध अधूरा नहीं छोड़ता…”– राजेश कुमरावत ‘सार्थक’ की कलम से, ‘सार्थक दृष्टिकोण’ में एक राष्ट्रचेतना से भरा संपादकीय विश्लेषण।
“हर बार जीते… फिर क्यों छोड़ा?” | अब अधूरा नहीं छोड़ता भारत – ऑपरेशन सिंदूर इसका प्रमाण है “दुश्मन को,…
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“पाकिस्तान, अब भी वक्त है सुधर जाने का – ‘हॅंसमुख’ की चेतावनी कविता” – विशेष रचना: डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख'(जनमत जागरण पोर्टल के लिए)
“पाकिस्तान सुधर जा – भारत की चेतावनी, शांति का संदेश” डॉ. बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’ की कविता में राष्ट्र की गर्जना…
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राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में ‘आधार पत्र’ की निर्णायक भूमिका: कैसे तय होती है आपकी पाठ्यपुस्तक की दिशा?
राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या में आधार पत्र का पुस्तक निर्माण में योगदान ✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’सदस्य – मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निर्माण…
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