भारत के संतो को मान सम्मान नहीं बल्कि भारत से गौहत्या का कलंक हटे इसकी आवश्यकता है – पूज्य स्वामी लक्ष्यानंद जी महाराज
जनमत जागरण @ सुसनेर। निष्काम भाव से गो सेवा करने से भगवान आते है । बड़ी बड़ी मालाएं पहनने से, बड़ी बड़ी तस्वीरें लगाने से, षोडश उपचार से, पूजा करने से, आरती करने से भगवान नही आने वाले । भगवान तीन स्थिति में ही आ सकते है । गो की सेवा करने से, संतो की सेवा करने से और गरीबों की सेवा करने से भगवान खुद चलकर आते हैं। स्वामीजी ने आगे बताया कि ब्रह्मा जी श्रृष्टि का पालन करते है वह गो की कृपा से ही करते है। गोमाता ही लक्ष्मी दाता है। जिस किसी के पास धन वैभव है उसने गोमाता की सेवा या तो पूर्व जन्म में कर रखी है इसलिए धन है या इस जन्म में चल रही है इस कारण धन है। अगर दूध के चक्कर से गोमाता रख रखी है तो 2 लीटर दूध पाओ और करो आराम। यदि निष्काम भाव से गो सेवा कर रहे तो गोमाता जो दे सकती है उसका हिसाब लगाना मुश्किल हो जायेगा। गोमाता इतना देती है। एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 140 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 140वें दिवस पर पर पूज्य स्वामी लक्ष्यानन्द जी महाराज ने श्रोताओं को अपने आशीर्वचन में बताया कि कथा तीन प्रकार से की जाती है जिसमें एक भेंट के लिए,दूसरी पेट के लिए एवं तीसरी न भेंट और न ही पेट के लिए बल्कि एशिया के इस प्रथम गो अभयारण्य में यह कथा मान सम्मान के लिए नहीं बल्कि गोमाता के मान के लिए भारत से गौहत्या का कलंक हटे इस हेतु से यह कथा हो रही है ।महाराज जी ने बताया कि पहले यह अभयारण्य बर्बाद स्थिति में था लेकिन जैसे ही इस अभयारण्य की सेवा विश्व के लोक प्रसिद्ध गो सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के पावन सानिध्य में हो रही है तब से यह गो अभयारण्य आबाद हो गया है और भविष्य में यह अभयारण्य विश्व का प्रथम गो अभयारण्य बनकर रहेगा ।

🚩 श्री कृष्ण जन्माष्टमी महामहोत्सव के द्वितीय दिवस 26अगस्त 2024 को मुख्य अतिथि एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के प्रधान यजमान बाबा वीर बजरंग दास जी महाराज, डेमरे के डेरे वाले - ऑफ इण्डिया सुप्रीम कोर्ट श्री रणजीत हनुमान जी, लाकरोडा, बीजापुर गुजरात के कृपापात्र श्री चिमन लाल अग्रवाल एवं उनके परिवारजन व मित्र गण एवं भारतीय किसान संघ के मध्यप्रदेश के जैविक प्रमुख श्री प्रकाश रघुवंशी,एवं भोपाल संभाग के जैविक प्रमुख बद्री लाल जी गुजर एवं मालवा प्रान्त के सह गौसेवा संयोजक समर्थ सिंह जी चंदेल उपस्थित रहें । गो अभयारण्य मालवा में श्रीधाम वृन्दावन की सुप्रसिद्ध " श्री हित आदर्श कृष्ण कला रासलीला मंडल" के माध्यम से रात्रि को हो चारण लीला एवं जन्माष्टमी के दिन मां मीरा जी की जीवन लीला की रासलीला प्रस्तुति स्वामी देवेंद्र वशिष्ठ जी की टीम ने प्रस्तुति दी । भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी के शुभ अवसर पर पर गो पूजन शिवसहस्त्राहुति यज्ञ, पार्थिव शिव लिंग पूजन एवं रुद्राभिषेक श्री चिमन लाल अग्रवाल, श्रीमती शशि बेन,दिनेश कुमार जी गुप्ता,श्रीमती मंजू जी गुप्ता,,चिरजीव वरुण जी गुप्ता, श्री पित्रोदा पुरुषोत्तम भाई,श्री दशरथ भाई पटेल, श्री संजय भाई अग्रवाल श्रीमती मनीषा जी,श्री धन्नजय जी अग्रवाल,श्री नन्दलाल जी अग्रवाल एवं श्रीमती शशिकला जी अग्रवाल ने सम्पन्न करवाया ।

⏩ 140 वे दिवस पर चुनरी यात्रा महाराष्ट्र,राजस्थान ,गुजरात एवं मध्यप्रदेश राज्य से - एक वर्षीय गोकृपा कथा के 140वें दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात के द्वारकाधीश से हार्दिक पांडेय के परिवार , महाराष्ट्र के जलगांव जिले के चोपड़ा गांव से पाटिल परिवार ,राजस्थान के टोंक जिले के सवाई माधोपुरु से श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के आजीवन न्यासी रामसिंह मीणा, श्रीमती कमला मीणा एवं घनश्याम मीणा ,झुंझनू जिले के सूरतगढ़ से जगदीश शर्मा, पूज्य रतन बाबा के साथ आए अजमेर के गोभक्त, कोटा महानगर के मनीष राठौर,, घनश्याम राठौर परिवार , उदयपुर जिले की फतहनगर के गोभक्तो की और से,झालावाड़ जिले की पिडावा तहसील के बोल्याबारी ग्राम की ओर से एवं मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की आलोट तहसील के भोज्या खेड़ी की श्री देवनारायण गोशाला के अध्यक्ष बहादुर सिंह एवं सम्पूर्ण गोशाला समिति, मदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के जावरा क्षेत्र से गऊशरणानन्द जी महाराज के सानिध्य में कामधेनू नन्दी गोधाम सेदरा माता रियावन ग्राम से, सुसनेर तहसील के बायरा ग्राम से , एवं सोयत कलां के पालीवाल समाज की और से व गो अभयारण्य के ग्वालों के साथ सेंकड़ों मातृ शक्ति , युवा एवं वरिष्ठजनों ने अपने परिवार देश, राज्य एवं ग्राम के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।




