बीमार होने से बचना है तो गो माता के लिए यह काम करें ..बीमार गोमाता की सेवा साक्षात ऋषियों की सेवा है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज हड़तालिका तीज का मुख्य पर्व है और आज ही के दिन मां पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए आज ही के दिन कठोर तपस्या की थी और इसी कारण से मां पार्वती एवं शिवजी का मिलन हुआ था इसलिए यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का प्रतीक है और इसे सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और कुशलता के लिए करती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 151वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 गायमाता तो देवताओं की भी देवता है :: स्वामीजी ने आगे बताया कि गायमाता मानव का कल्याण करने के लिए ही इस भूलोक में देह रूप में आई है यानि गायमाता की देह सहज है,लेकिन गायमाता पशु नहीं है और भगवान कृष्ण ने विष्णु पुराण में कहां है कि गायमाता तो देवताओं की भी देवता है । स्वामीजी ने बताया कि दो प्रकार की गोमाता एक स्वस्थ गोमाता और दूसरी बीमार गोमाता । स्वस्थ गोमाता सीधे गोलोक से आती है और बीमार गोमाता एक ऋषि के रूप में है जो अपने कर्म के बन्धन को काटकर शीघ्र मुक्ति पाने के लिए बीमार गोमाता के रूप में पुनः धरती पर अवतरित होते है अर्थात बीमार गोमाता की सेवा साक्षात ऋषि की सेवा है ।
🚩विश्व के इस गो अभयारण्य में एक ऋषि आश्रम रूपी बन रहा है अत्याधुनिक गो चिकित्सालय :: इसलिए अगर कोई बीमार गोमाता के लिए चिकित्सालय बनाता है तो वह एक तरह से ऋषि के आश्रम बनाने के समान है और सप्त ऋषि चिकित्सालय बनाने वाले को आशीर्वाद देते हैं । विश्व के इस गो अभयारण्य में एक ऋषि आश्रम रूपी अत्याधुनिक चिकित्सालय जैसलमेर निवासी स्वर्गीय ज्ञानचंद- श्रीमती रतनी देवी की स्मृति में उनके पुत्र अचलदास(चेन्नई), ओमप्रकाश (इंदौर), सत्यनारायण (सूरत) एवं जयप्रकाश (इन्दौर) भूतड़ा परिवार के माध्यम से निर्मित हो रहा है,जो शीघ्र निर्मित होकर बीमार गोमाता के स्वास्थ्य सुधार के लिए काम करेगा ।

🚩 बीमार गाय माता के लिए जो ओषधि दान करता है, उसे गोमाता बीमार होने से बचाती है :: स्वामीजी ने बताया कि बीमार गायमाता की सेवा से मनुष्य में भक्तिभाव भाव पैदा होता है और विष्णु धर्मोत्तर पुराण में भगवान खुद कह रहे है कि अगर कोई रूग्ण व्यक्ति बीमार गोमाता के गोष्ठ(आवास )में जाने मात्र से उस रूग्ण व्यक्ति का रोग कट जाता है। और बीमार गाय माता के लिए जो ओषधि दान करता है, उसे गोमाता बीमार होने से बचाती है। और हमारे शास्त्रों में तो यहां तक कहां है कि एक अश्वमेध यज्ञ में जितना घृत लगता है उस घृत के दान का फल गायमाता की ओषधि में दान देने से लगता है और पूज्य महाराज जी ने सभी श्रोताओं से आह्वान किया कि आप सभी जितना हो सके उतना बीमार गोमाता की सेवा करें क्योंकि बीमार गोमाता मरने के बाद उत्तम लोक में जाती है और उसकी सेवा करने वाले को भी अन्त में उत्तम लोक की प्राप्ति होती है ।पूज्य स्वामीजी ने सूचित किया कि 07 अगस्त को गणेश चतुर्थी के पुण्य अवसर पर गो अभयारण्य में भगवान गणपति जी विराजेंगे और उनके 1008 लड्डुओं का भोग लगेगा साथ ही गणेश चतुर्थी के पुण्य अवसर पर पूर्व विधायक राणा विक्रम सिंह जी ने अपने विधायक कार्यकाल में अपने विधायक मद से रूग्ण गोमाता की सेवार्थ जो गो एम्बुलेंस दी है उस गो एम्बुलेंस का श्रीगणेश भी गणेश चतुर्थी के पुण्य अवसर पर होगा ।
⏩ अतिथि :: कथा के 151 वे दिवस पर मध्यप्रदेश के ब्यावरा से रामनिवास शर्मा, दिनेश यादव, करण सिंह यादव, जगदीश सेन ,सोनू यादव, रोड सिंह यादव एवं सोनू यादव अतिथि उपस्थित रहें।

⏩151 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 151वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले की सुसनेर तहसील के सारसी ग्राम की महिला मण्डल ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



