दिव्य अलौकिक गो-कथा : गो-सेवा सबसे बड़ा धर्म है सबसे श्रेष्ठ दान समय दान है, मालवा क्षेत्र के युवा समय दान करें और बीमार गोमाता की सेवा के लिए आगे आएं – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज के दिवस में मां ललिता, कृषक देव भगवान बलराम जी महाराज, गोपालक भगवान देवनारायण जी महाराज एवं कारगिल युद्ध में भारत की विजयश्री दिलाने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा जी का जन्म दिवस है उक्त चारों दिव्य शक्तियों की पुण्यभूमि भारत एवं भगवती गोमाता की सेवा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण रहा है और भगवान कृष्ण के बड़े भैया बलदाऊ भैया के साथ रहने वाले प्रतीक चिन्ह हल एवं मूसल तो हमें कृषि से जीविकापार्जन कर अन्न उपजाने एवं उस अन्न को मूसल से कूटकर खाने योग्य तैयार करना साथ ही मूसल उन दुष्ट शक्तियों का संहार करने का संकेत भी देता है जो हमारी सनातन परंपराओं के साथ अत्याचार करता है उसका मूसल रूपी हथियार से उपचार करने का संकेत भी हमें कृषक देव भगवान बलराम देते है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 154 वे दिवस पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।
🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि वेदलक्षणा गोमाता वह है जिसके पीठ पर शिवलिंग जैसा खुकुद हो, गले में गलकंबल हो और जो बोले तो मां की आवाज आती है। ऐसे लक्षणों वाली गोमाता वेदलक्षणा गोमाता कहलाती है। आजकल जर्सी, होलिस्टन, फ्रीजियन को भी लोग गोमाता कहते है। इसकी पीठ सपाट होती है, गले में गलकंबल नही होती है और यह बोलती है तो फटे बांस की तरह आवाज आती है यह पशु है। हमे गोमाता और गाय की तरह दिखने वाले पशु के अंतर को समझना चाहिए।

- 🚩 स्वामीजी ने तीन प्रकार के दान समय, सम्पत्ति एवं संतति के बारे में बताते हुए बताया कि मनुष्य के लिए ये तीनों दान महत्त्वपूर्ण है और इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है समयादान और मालवा क्षेत्र के युवाओं से समयादान का आह्वान करते हुए । स्वामीजी ने बताया कि बीमार गोमाता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है क्योंकि आए दिन सड़को पर तेज चलती गाड़ियों से गोवंश चोटिल हो रहे है इसलिए वाहन चालक सावधानी से गाड़ी चलाए साथ ही आज के युवाओं को 24 घण्टे में से कम से कम दो घण्टे मजबूती के साथ बीमार गोवंश की सेवा में लगना चाहिए। स्वामीजी ने कृषकदेव भगवान बलराम जी के अवतरण दिवस पर भारत के अन्नदाता किसानों से आग्रह किया कि अपने खेतों में खरपतवार हटाने के लिए जो बड़ी मात्रा में जहरीली दवाओं का उपयोग कर रहें है, इससे देश के कई राज्यों में जहां इनका उपयोग हुआ है, वहां की घास को खाकर कई गोवंश ने अपने प्राण त्यागे है। यह अत्यंत चिंता का विषय है । इस महापाप से किसानों को बचना चाहिए ।
⏩ अतिथि :: 154 वें दिवस की कथा में गुजरात द्वारिका के पूज्य सन्त दिनेशानंद पुरी जी महाराज एवं मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के पिपल्यापाल आश्रम से पूज्य नित्यानन्द पुरी जी महाराज का आशीर्वाद मिला एवं उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील के पलवा से राजेश मेहता,नितेश मेहता,निरंजन मेहता एवं आचार्य नरेन्द्र मेहता व मन्दसौर जिले गुमान सिंह, कुशाल सिंह ढाकनी,शंकर सिंह(सरपंच),गोपीसिंह सरकनिया,श्योदान सिंह वावडीखेड़ा, एवं दूधाखेड़ी माताजी राम सिंह आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 154 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर किले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 154 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के आगर जिले की सुसनेर तहसील के ग्राम खेरिया ग्राम की महिला मण्डल व सुसनेर तहसील के ही अमानपुरा(नया गांव) से हजारी लाल पटेल, रामरतन दांगी,जगदीश, राजेश,भागीरथ, कैलाश नेताजी,रामप्रसाद, गोरधन सिंह,, भवानी शंकर,,बालाराम एवं अशोक आदि के साथ अपने ग्राम,नगर के सैंकड़ों गो प्रेमी सज्जनों , मातृशक्ति व युवाओं ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



