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गो-माता के धरती पर प्रगट होने का क्या है कारण..? गो-हत्या के पाप से कैसे बच सकता है देश का अन्नदाता : जानिए स्वामीजी ने दिव्य गोकथा में क्या बताया उपाय

जहरयुक्त खेती के बजाय गो-आधारित खेती कर मानव एवं गो-हत्या के पाप से बचे देश का अन्नदाता - स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज ही के दिन 12 सितम्बर 1730 में अमृता देवी बिश्नोई सहित चोरासी गांव के 363 बिश्नोई [69 महिलाएं और 294 पुरुष] खेजड़ी हरे वृक्षों को बचाने के लिए खेजड़ली में शहीद हुए थे। खेजड़ली और इसके आसपास के गांवों में बिश्नोई लोगों की प्रधानता के कारण यहां वृक्ष कटाई और शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। स्वामीजी ने विश्नोई समाज की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि विश्नोई 20+9=29 अर्थात 29 नियमों का पालन करने वाला एवं पर्यावरण एवं वन्य जीवों की रक्षा करने वाला समाज है जिसने एक विधर्मी सिनेमा स्टार जिसने शिकार के रूप में एक काले हिरण की हत्या कर दी थी उसे भी न्यायालय में घसीटा है इस पुण्यात्मा समाज ने । प्रकृति प्रेमी समाज के कारण ही आज मारवाड़ में खेजड़ी एवं वन्यजीव सुरक्षित है। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 157 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही ।

 🚩 स्वामीजी ने बताया कि आज देश के किसान रसायनिक खेती कर जाने अनजाने में मानव एवं गोवंश की हत्या के दोषी बन रहें है ,इसलिए देश के किसान को इस पाप से बचने के लिए गो आधारित खेती को अपनाना चाहिए और जिन्हे गो आधारित खेती करना है वे किसान गोअभयारण्य से खाद ले सकते है और आप जो जो भी गो आधारित अन्न पैदा करेंगे उसे गो अभयारण्य बाजार दर से अधिक मूल्य देकर खरीदेगा । साथ ही महाराज जी ने बताया कि अपने खेत में जो जो भी खरपतवार होती है उन्हें खरपतवार नाशक छिड़ककर पाप के भागी नहीं बने बल्कि इस खरपतवार के माध्यम से बहुत ही श्रेष्ठ कीटनाशक तैयार होता है उसके माध्यम से अपनी फसलों में लगने वाले कीट से अपनी फसल को बचा सकते है साथ ही अपने खाद्यान्य को कीड़े से बचाया जा सकता है ।  स्वामीजी ने व्यसन करने वालों को सलाह दी कि जिस जिस को भी नशा करने की लत हो तो वह  प्रभु गोविन्द की आंखों में एकटक निहारते रहें प्रभु का नशा अपने आप उस पर चढ़ जाएगा अर्थात नशे की इच्छा हो तो नारायण की आंखों से नशा पीजिए उससे आपके जन्मजन्मांतर के पाप नष्ट हो जाएंगे और आवण जावण के बन्धन से मुक्त हो जाओगे। 

🚩 स्वामीजी ने गायमाता के धरती पर प्रगट होने का कारण बताते हुए कहां कि जगत पिता ब्रह्माजी महाराज ने ऋषियों के आग्रह पर ही मनुष्य लोक में गोलोक से गोमाता को भेजा है ताकि मनुष्य उनकी सेवा कर अपने आवण जावण के बन्धन से मुक्त हो सकें ।गो कृपा कथा में उत्तरप्रदेश वाले गुरुजी व पुजारी मोहन जी श्री नील चंद्रेसर महादेव मंदिर मेरूखेड़ी सुसनेर का श्रद्धालुओं को आशीर्वाद मिला ।

अतिथि:: 157 वे दिवस पर श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के न्यासी राणा प्रवीण सिंह झाला ठिकाना पालड़ा, नारायण सिंह,कृपाल सिंह,रासबिहारी गोशाला ढाकनी, श्याम सिंह, आगर तहसील अध्यक्ष भारतीय किसान संघ, रामचरण शर्मा सेवा निवृत प्रधानाध्यापक सोयत, भंवर सिंह चंद्रावत छापीहेड़ा, कालूराम पाटीदार मगिसपुर, पुरसिंह गुर्जर सिरपोई गुजरान,कल्याण प्रसाद मेहता, गिरिश तेजरा पिपल्या कुलमी,मुकेश पाटीदार कुण्डी खेड़ा,जगदीश राठौर कुंडालिया,सुजान सिंह लोधा सुरजपुरा आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

157वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के एवं राजस्थान से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 157 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़  जिले की डग तहसील के ग्राम बिरमा खेड़ी व मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील के तंबोलिया ग्राम की महिला मंडल एवं आगर जिले के सोयतकलां से  राधेश्याम गुप्ता परिवार से उनकी श्रीमती ममता गुप्ता व पुत्र महेश गुप्ता ने अपनी अर्धांगनी के साथ सैंकडों मातृशक्ति ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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