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आत्म-उत्थान और मोक्ष मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले पर्युषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी को हुई ‘ उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म ‘ की पूजा

दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व का अंतिम दिन, हुई ' उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म ' की पूजा वासु पूज्य भगवान को चढ़ाया निर्वाण लाडू , समाज जनों ने रखे उपवास, एकासना

जनमत जागरण @ आगर मालवा से संदीप जैन की लाईव रिपोर्ट :: दिगंबर जैन समाज के पर्युषण पर्व के अंतिम दिन मंगलवार अनंत चतुर्दशी को ‘उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म’ की पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान जैन समाज के लोग तप, त्याग, और आत्मशुद्धि पर जोर देते हैं। अंतिम दिन पर ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह इंद्रियों के संयम, आत्मनियंत्रण और मानसिक शुद्धता का प्रतीक है। इस पूजा के माध्यम से भक्त अपने जीवन में शुद्धता और अनुशासन लाने का प्रयास करते हैं। पर्युषण पर्व जैन धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है, जो आत्म-उत्थान और मोक्ष मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

1008 श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर छावनी , सिटी मंदिर और कालोनी स्थित मंदिर में श्री जी का अभिषेक शांति धारा के साथ ही पूजन हुआ और वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक होने से निर्वाण लाडू चढाया गया। पर्युषण पर्व के अंतिम दिन छावनी मंदिर में शांति धारा के लाभार्थी दिनेश कुमार जितेंद्र कुमार गोधा आरटीओ वाले एवं संतोष जैन कमलेश जैन, राजेश जैन, आदीश जैन सांवला परिवार आगर व कानड़ वाले रहे एवं निर्माण लाडू चढ़ने के लाभार्थी श्री दिगंबर जैन महिला मंडल कानड़ रहा।

🚩अनंत चतुर्दशी पर निकला चल समारोह :: अनंत चतुर्दशी पर्युषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी कलश दोपहर में 4:00 बजे पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर छावनी में हुए चतुर्दशी के कलश के लाभार्थी महेन्द्र जैन कोर्ट वाले और महावीर जैन सम्पादक परिवार आगर ने भगवान के अभिषेक किये। इसके पश्चात पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर छावनी से कलश यात्रा निकाली गई जो बैंड बाजों के साथ शहर के सिटी मंदिर में पहुंची वहां पर अनंत चतुर्दशी के कलश श्रीजी पर हुए एवं रात्रि में सिटी मंदिर में संगीत में भक्तामर का पाठ हुआ। जानकारी दिनेश जैन ने दी। समाजजन द्वारा पर्व के अंतिम दिन उपवास , एकासना रखा। इस दोरान आगर और कानड़ के समाजजन उपस्थित रहे।

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