श्राद्धकर्म करने के लिए सबसे उत्तम एवं श्रेष्ठ स्थान गोशाला ही है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज का दिन बहुत महत्त्वपूर्ण है आज ही के दिन युग पुरुष पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य का जन्म 20 सितम्बर 1911 को हुआ़ है, वे भारत के एक युगदृष्टा मनीषी थे , जिन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की। उन्होंने अपना जीवन समाज की भलाई तथा सांस्कृतिक व चारित्रिक उत्थान के लिये समर्पित कर दिया। उन्होंने आधुनिक व प्राचीन विज्ञान व धर्म का समन्वय करके आध्यात्मिक नवचेतना को जगाने का कार्य किया ताकि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना किया जा सके। उनका व्यक्तित्व एक साधु पुरुष, आध्यात्म विज्ञानी, योगी, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, लेखक, सुधारक, मनीषी व दृष्टा का समन्वित रूप था। उन्होंने विपुल साहित्य की रचना की जिसमें ४ वेद, १०८ उपनिषद, ६ दर्शन, २० स्मृतियाँ और १८ पुराणों के भाष्य सम्मिलित हैं। उन्होंने मथुरा में गायत्री तपोभूमि, मथुरा में ही घीयमण्डी में अखण्ड ज्योति संस्थान, हरिद्वार में युगतीर्थ शांतिकुंज, तथा ब्राहमवर्चस्व शोध संस्थान की स्थापना की। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 165 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही।

🚩 स्वामीजी ने श्राद्ध पक्ष के तृतीय दिवस पर श्रोताओं को श्राद्ध कहां करना चाहिए उसके बारे में बताया कि श्राद्ध कर्म के लिए सबसे श्रेष्ठ एवं उत्तम स्थान गोशाला ही है क्योंकि जहां भगवती गोमाता की धुली से वह स्थान पवित्र रहता है साथ ही गोमाता के गोमूत्र एवं गोमय अर्थात गोशाला एक संगम के रूप में पुण्य स्थान है जिसका उल्लेख मत्स्य पुराण एवं वायु पुराण में भी उल्लेख है।
🚩 स्वामीजी ने बताया कि पूर्वकाल में हर घर गोशाला जैसा होता था अर्थात हर घर में 100-100 गोमाताएं हुआ करती थी ,जिससे मनुष्य हर अनुष्ठान एवं अपने पित्रों का तर्पण अपने घर पर ही कर लेता था ,लेकिन जैसे ही स्वेत क्रान्ति एवं हरित क्रांति के मायाजाल में हम फंसे है,तब से धीरे धीरे वेदलक्षणा गोमाता की लोगों ने उपेक्षा शुरू कर दी है और आज दूध के नाम से अजा(बकरी)एवं महिषी (भैंस)एवं गाय जैसा दिखने वाली पशु पूतना(विदेशी पशु) को अपने घर में रखना शुरू कर दिया है इसलिए इस अवस्था में अब श्राद्ध कर्म गोशाला में करना श्रेष्ठकर है ।
🚩 श्राद्ध का दूसरा स्थान संगम के बारे में बताते हुए महाराज जी ने कहां कि पहले संगम के तट पर गोदान हुआ करता था और हमारे शास्त्रों में उल्लेख है कि जब गोदान होता था तो गोदान के समय गोमाता के सींग एवं गले में जल डाला जाता था और वह जल जहां गिरता था वह स्थान पवित्र हो जाता था ,इसलिए संगम गोदान के कारण पवित्र हुआ करते थे इसलिए तर्पण के लिए दूसरा स्थान संगम स्थान को श्रेष्ठ माना है,लेकिन आज के समय में गोदान की प्रवृति खत्म सी हो गई है यानि अब गोदान का कोई उपयुक्त पात्र नहीं मिलता है, गोदान का उपयुक्त पात्र उसे ही माना गया है जो गोदान में आई हुई गोमाता की जीवन भर सेवा करें लेकिन आज के समय में स्थान के अभाव में यह संभव नहीं है इसलिए अब गोदान के बजाय गो के लिए दान सर्वश्रेष्ठ है और गो के लिए दान का मतलब है कि किसी भी गोशाला में एक गोमाता के हम गोद चले जाएं अर्थात उस गोमाता के सम्पूर्ण चारे पानी में आने वाले सम्पूर्ण व्यय को हम वहन करें ।
🚩स्वामीजी ने पंचगव्य प्रासंग के बारे में बताया कि भगवती गोमाता के दुग्ध,दही,घृत, गोमय एवं गोमूत्र से बना पंचगव्य बहुत ही पवित्र है और दशविध स्नान के बाद भी पंचगव्य पान का बहुत महत्व बताया है और सनातन के हर मंगल एवं धार्मिक कार्य में पंचगव्य पान का विधान है । और हमारे धर्म शास्त्रों में यहां तक बताया है कि जो पाप हड्डियों तक भी चला गया है उसे भी पंचगव्य पान से नष्ट किया जा सकता है। हड्डियो तक पाप का मतलब है कि लम्बे समय तक पापकर्म बढ़ जाने का है और इस पाप कर्म को संकल्प के साथ छोड़कर पंचगव्य पान किया जाएं तो हमारे द्वारा पूर्व में जो जो भी पापकर्म किए है उन सब का समन पंचगव्य पान से हो जाता है।

- अतिथि :: श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के प्रबन्ध न्यासी एवं कामधेनू गो अभ्यारण्य मालवा के प्रभारी अम्बालाल सुधार,राजस्थान के उदयपुर के वेदला में स्थित श्री रामज्ञान तीर्थ गोपाल गोशाला के संचालन कर्ता व श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के न्यासी बंशी लाल कुम्हार उनकी धर्मपत्नी श्रीमति मोती देवी,भंवर लाल प्रजापत उनकी अर्धांगनी श्रीमती मीना देवी , मौसीजी रूपा बाई के साथ मोहन जोशी व तुलसीरामशर्मा आदि अतिथि उपस्थित रहें
⏩ विद्याभारती के झालावाड़ जिले के जिला सचिव मुकुट बिहारी यादव के साथ आदर्श विद्यामंदिर पिडावा के प्रधानाचार्य भगवान सिंह,आदर्श विद्यामंदिर सरोनिया के प्रधानाचार्य गोवर्धन पाटीदार एवं राजू योगी ने गो अभयारण्य में गोमाता के दर्शन कर पूज्य स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज का आशीर्वाद लियाश्राद्ध पक्ष के तृतीय दिवस (तृतीया)पर उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के संजय मार्ग पटेल नगर से स्वर्गीय श्रीमती नीलम अग्रवाल पत्नी श्री दिनेश अग्रवाल पुत्र अंकुर वधू दीपिका पौत्र क्यांन गौत्र मंगल ने अपने परिजनों के साथ एशिया के प्रथम गो अभयारण्य मालवा में पंच सहस्र से अधिक गोमताओं के सानिध्य में स्वर्गीय श्रीमती नीलम जी अग्रवाल गौत्र मंगल की तृप्ति के लिए गो पुच्छ तर्पण किया ।

⏩ 165 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के उदयपुर एवं झालावाड़ जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 165वें दिवस पर राजस्थान के उदयपुर के वेदला में स्थित श्री रामज्ञान तीर्थ गोपाल गोशाला के संचालन कर्ता व श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के न्यासी बंशी लाल कुम्हार उनकी धर्मपत्नी श्रीमति मोती देवी,भंवर लाल प्रजापत उनकी अर्धांगनी श्रीमती मीना देवी , मौसीजी रूपा बाई के साथ मोहन जोशी व तुलसीराम शर्मा व झालावाड़ जिले बकानी तहसील के ग्राम बड़ाय से रामबाबू गुर्जर, दरियाव सिंह,मानसिंह, संजय दांगी,, रोशन दांगी, बालचन्द दांगी, सुनिता दांगी,राम प्रसाद दांगी एवं छीतर के साथ सैंकड़ों मातृशक्ति व युवाओं ने अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



