जो व्यक्ति ऐसा काम करता है उस व्यक्ति के पितृ श्राद्ध तर्पण स्वीकार नहीं करते है, क्योंकि वह ब्रह्महत्या के समान पाप का भागी होता है- जानिए कौन सा कार्य ब्रह्महत्या पाप के बराबर है

🚩 गोचर पर कब्जा करने वाले के पितृ श्राद्ध तर्पण स्वीकार नहीं करते है,क्योंकि वह ब्रह्महत्या के समान पाप का भागी होता है - स्वामी गोपालानंद सरस्वती
जनमत जागरण @ सुसनेर । आज ईश्वरचंद विद्यासागर जी का जन्म दिवस है वे उन्नीसवीं शताब्दी के बंगाल के प्रसिद्ध दार्शनिक, शिक्षाविद, समाज सुधारक, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी और परोपकारी व्यक्ति थे। वे बंगाल के पुनर्जागरण के स्तम्भों में से एक थे। उनके बचपन का नाम ईश्वर चन्द्र बन्द्योपाध्याय था। ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह की अवधारणा शुरू की और बाल-विवाह और बहुविवाह प्रथा के उन्मूलन पर विशेष जोर दिया है ।पूज्य स्वामीजी ने श्राद्ध पक्ष के नवें दिवस पर श्रोताओं को महाभारत के अनुसार मारकण्डेय जी व नारद संवाद का हवाला देकर कहाँ कि जो पित्रों हेतु विहित कर्म कराता है, उन पर हमेशा पितृ कृपा बनी रहती है और वह इस धरती पर भी सुख पाता है-तथा आयु पूरी होने पर आवण – जावण में मुक्त हो भवसागर पार कर जाता है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 171 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कही ।
🚩 स्वामीजी ने श्राद्ध कर्म के पात्र के बारे में बताते हुए कहां कि जो गोसेवक न हो- तथा गोमाता के नाम से नफरत करता हो। जो गोवंश को कष्ट देता हों- वह श्राद्ध दर्शन के योग्य भी नहीं हैऔर जो व्यक्ति गोचर भूमि अर्थात गोमाता की चारागाह भूमि पर जबरन कब्जा कर उस भूमि से उत्पादित अन्न से अपने परिवार का भरण पोषण करता है इस प्रकार का व्यक्ति अगर अपने पित्रों के श्राद्ध की सामग्री को भी देख लेता है तो वह सामग्री भी अपवित्र हो जाती है क्योंकि गोचर पर कब्जा करने वाला ब्रह्महत्या के समान महापाप का भागी होता है, वह हमेशा पितृदोष से पीड़ित रहता है और उसके इस कृत्य से उसके पितृ भी हमेशा दुःखी रहते है।
🚩 स्वामीजी ने बताया कि जो व्यक्ति सभी शास्त्रों का ज्ञाता हो और सभी प्रकार के दान धर्म करता हो और उसके बाद भी वह धर्म स्वरूपी नंदीबाला को घर से बाहर निकालता है तो इस प्रकार का व्यक्ति श्राद्ध कर्म को भी देख लेता है तो फिर उस व्यक्ति का श्राद्ध उसके पितृ नहीं लेते है तो फिर सामान्य व्यक्ति जो अपने घर से बैल बाबा को घर से बाहर छोड़ देता है उसके साथ क्या दुर्गति होती होगी । साथ ही जो व्यक्ति गोमाता के नाम से लिए गए दान चंदे या गोशाला के अन्य कार्यों से कमीशन के रूप में धन अर्जित करता है, उस व्यक्ति को श्राद्धकर्म का फल नहीं मिलता है और वह हमेशा पितृदोष से दुःखी रहता है ।

⏩ गो अभयारण्य में होने वाले आगामी कार्यक्रम :: महाराज जी ने गो अभयारण्य में होने वाले आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 03 अक्टूबर को अभयारण्य में राधारानी जी का सगाई समारोह होगा और 10 अक्टूबर को मां करणी जी का प्रगट उत्सव एवं आश्विन नवरात्रि में श्री हनुमंत यज्ञ रहेगा और दिपावली के दूसरे दिन 02 नवम्बर से 10 नवम्बर तक होने वाले गो नवरात्रि महामहोत्सव जिसमें 1100 गोप्रेमी 09 दिवस तक दुधकल्प में रहकर श्री सुरभि मंत्र का जाप करेंगे और गो नवरात्रि में तुलसी विवाह,नन्दी विवाह एवं एक गरीब कन्या का विवाह का भी भव्य आयोजन देशभर के प्रमुख मूर्धन्य संतो के सानिध्य में होगा ।
⏩ 171 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के उज्जैन से अजय बाबा व उनकी अर्धाग्नि श्रीमती प्रभा चौहान एवं राजस्थान के झालावाड़ जिले की डाग तहसील के लुहारिया से करण सिंह भगत जी अतिथि के रूप में उपस्थित रहें ।

⏩ 171 वे दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के देवास से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 171वें दिवस पर मध्यप्रदेश के देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के जामगोद ग्राम से श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की न्यासी श्रीमति आभा तिवारी के परिवार की और से अपने देश, राज्य एवं ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



