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दिव्य अलौकिक गोकथा: किस प्रकार से तीर्थ यात्रा करना चाहिए, यात्रा का फल कब से शुरू हो जाता है जानिए गोकथा के माध्यम से शास्त्रोक्त बातें

🚩 गो और कन्या की सेवा ही वास्तविक शक्ति पूजा है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। पूरे धरा राजस्थान के मारवाड़ के पांच पीरों में से एक मेहाजी मांगलिया जी की धर्म पुत्री करणी माता को देवी हिंगलाज का अवतार माना जाता है करणी माता चारण जाति की योद्धा मातृशक्ति थी, जिनके बचपन का नाम रिघुबाई था । मां करणी माता को “दाढ़ी वाली डोकरी” या दाढाली डोकरी भी कहा जाता है. मां करणी माता ने अपने सौतेले बेटे लक्ष्मण को पुनर्जीवित करने के लिए मृत्यु के देवता यम से बातचीत की थी । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 184 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए मां करणी माता जी की त्रि -दिवसीय प्रकटीकरण कथा के द्वितीय दिवस पर पूज्य स्वामीजी ने कही।

🚩 तीर्थ यात्रा का फल ::  स्वामीजी ने मां हिंगलाज यात्रा का वर्णन सुनाते हुए बताया कि मेहाजी स्वयं गो प्रेमी थे तथा यात्रा पर उनके संगी साथी सभी ग्वाल बाल थे- हिंगलाज माँ की यात्रा में सभी माँ का चरित्र सुन और सुनाते हुये चल रहे थे- किसी को शंका होती तो एक दूसरें चिंता भी मिटा रहे थे-हिंगलाज माता की यात्रा का पथ दुर्गम है आसपास कोई गाँव नही सिर्फ बालू का सागर है- तथा वो तप्त रेत के टीले भी बहुत है और जिसके सेवा और भक्ति साथ रहती है वो ही ऐसे दुर्गम पथ को पार करता है-स्वामीजी ने तीर्थयात्रा के बारे में बताते हुए कहां कि तीर्थयात्रा का समय पुण्यकाल कहलाता है और घर की दहलीज पार करते ही यात्रा काल प्रारम्भ हो जाता है,लेकिन आजकल लोगों ने यात्रा को मनोरंजन का साधन बना लिया है यानि यात्रा रास्ते में मौज मस्ती करना और केवल तीर्थ स्थल पर ही पहुंचकर भगवान के दर्शन करने से यात्रा का लाभ नहीं मिलता है । यात्रा का फल तो घर की देहलीज से तीर्थ स्थल तक संयम से करने से ही यात्रा रूपी पुण्य काल का लाभ मिलता है ।

🚩 स्वामीजी ने सात्व के बारे में बताते हुए कहां कि गो और गौरी की पूजा करने वाले ही असल में सात्व है और गो और गौरी की पूजा ही शक्ति की पूजा है और कन्या ही गौरी का रूप है लेकिन आजकल कन्या को तो दुःख दे रहें है, सता रहें है और दिखावे के रूप में देवी की पूजा करें तो वह शक्ति पूजा नही कहलाएगी । शक्ति पूजा का तो फल तब ही मिलेगा कि जब हम गो और कन्या को नहीं सताएं बल्कि उनकी सेवा करें उनका सम्मान करें यही वास्तव में असली शक्ति पूजा हैं।

⏩ स्वामीजी ने बताया कि गो अभयारण्य में कल 10 अक्टूबर को मां करणी मैया का प्रकट उत्सव रहेगा और कथा के बाद 02 नवंबर से 10 नवंबर तक आयोजित होने वाले गो नवरात्रि महा महोत्सव की तैयारी बैठक रहेगी ।

184 वे दिवस पर चुनरी यात्रा बिहार से ::   एक वर्षीय गोकृपा कथा के 184 वें दिवस पर बिहार राज्य के दरबंगा से सुभाष चौपाल  ने अपने परिवर  की और से सम्पूर्ण  देश, राज्य एवं ग्राम, नगर  के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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