राष्ट्र निर्माण करना है तो यह संकल्प लेना होगा..! संघ के स्थापना दिवस पर सभी स्वयंसेवकों से आग्रह स्वामीजी ने गोकथा में कहा ⏩ पढ़ें यह ई-रिपोर्ट

🚩 दश विकृतियों के रूप में जो रावण हमारे भीतर बैठा है है,उसे जलाना होगा – स्वामी गोपालानंद सरस्वती
जनमत जागरण @ सुसनेर। आज के दिन प्रभु श्रीराम ने रावण का वध किया और हम सब मिलकर गांव,शहर,नगर कस्बे में। रावण को आज जलाते है,असल में भगवान राम कहना क्या चाहते है,लेकिन हम समझ नही पाएं और कागज के रावण को जलाकर हम प्रदूषण और फेला रहें है अर्थात जलाना किसको था और जला किसको रहें है यानि जो रावण दश विकृतियों के रूप में हमारे भीतर बैठा है जो दंभ, दर्प, अभिमान, काम, क्रोध,, लोभ,लोभ,मोह,मद,अज्ञान एवं विषय विकार रूपी इन दशों विकारों को हमे हमारे ज्ञान की ज्योति से जलाना है । ठीक है हमे प्रतितात्मक रूप से त्योहार मनाना चाहिए,रावण का पुतला भी बनाकर जला दीजिए लेकिन रावण को जलाने का मतलब हमें हमारे भीतर के रावण को जलाना हैं जो बार बार किसी न किसी रुप में शिर उठा के खड़ा हो जाता है और वह अमर हुए बैठा है वह सबसे बड़ा रावण है कामना का रावण,इच्छाओं का रावण । सबसे बड़ा रावण सबसे बड़ा असुर तो वहीं है। जिसने हम लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। अर्थात जो काम रावण ने किया वही काम तो हम सब कर रहें हैं, अभी तो हम ही असुर बने बैठे हैं,इसलिए आज के दिन अपने भीतर के रावण को जलाना ही हमारा प्रदान कार्य होना चाहिए । हम अपने पर विजय पाले, हम अपनी कामनाओं को नियंत्रित कर ले,हम अपने क्रोध,वासनाओं को वश में नहीं कर पाएं तो फिर विजयादशमी मनाने का क्या मतलब इसलिए आज के दिन हमें हमारे भीतर बैठे असुर को जलाएं तब ही सच्चा दशहरा माना जाएगा। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 187 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने कही।
- 🚩संघ के स्थापना दिवस पर सभी स्वयंसेवकों से आग्रह :: स्वामीजी ने बताया कि आज ही के दिन विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर सन् १९२५ को विजयादशमी के दिन संघ के आद्य सरसंघ चालक परम पूजनीय डॉ॰ केशव बलिराम जी हेडगेवार द्वारा हुई है । संघ के स्थापना दिवस पर सभी स्वयंसेवकों से आग्रह है कि देश का हर स्वयंसेवक अपने घर पर एक एक गोमाता की सेवा कर ले तो भारत की सड़कों पर एक भी गोमाता सड़कों पर निराश्रित नहीं घूमेगी और भारत में गोमाता स्वत: ही राष्ट्र माता के रूप में स्थापित हो जाएगी क्योंकि जब सड़कों पर गोमाता भटकती है तो विधर्मी हमें कहते है कि जिसे तुम माता कहते हो तो फिर वह सड़क पर क्यों भटक रही है जो हमारे लिए भी एक लज्जाजनक हैं इसलिए विजयादशमी के पुण्य पर पर देश का हर स्वयंसेवक एक एक गोमाता की सेवा का संकल्प ले क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य कर रहा है वह बिना गोमाता की सेवा एवं रक्षा के बिना नहीं हो सकता क्योंकि प्रभु श्रीराम ने भी अपने छोटे भाई भरत को कहां था कि गोमाता की रक्षा के बिना राष्ट्र रक्षा संभव नहीं है। विजयादशमी के पुण्य पर्व पर जब कथा स्थल पर भगवती गोमाता व मां करणी जी का मंत्रोचार से पूजन हो रहा था तब कथा पांडाल में एक गोमाता जी ने वत्स को जन्म दिया जिसका सभी संतों की सहमति से विजय बाबा नामकरण किया ।


⏩ अतिथि :: 187 वें दिवस पर श्री हरि भगवान राजसमन्द,न्यासी श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा, अनुराग गोयल गाजियाबाद , गजेन्द्र सिंह राजपुरोहित बिंदारा(पाली), उत्तम सिंह राजपुरोहित बाड़मेर एवं आगर जिले के मोडी ग्राम से देवनारायण जन सेवा ट्रस्ट से शिवदास(निलेश विश्वकर्मा) अपनी टीम सहित आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 187 वे दिवस पर चुनरीयात्रा आगर मालवा जिले से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 187 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले की सुसनेर तहसील के लक्ष्मीपुरा ग्राम की महिला मण्डल ने अपने परिवार सहित देश, राज्य ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



