आस्थाआगर मालवाएक्सक्लूसिव रिपोर्टदेशमध्यप्रदेश

दशहरे मैदान पर आतिशबाजी से रावण का पुतला समय से पहले जलने का विचित्र घटनाक्रम, जानिए: क्या रही दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

बुराई के प्रतीक रावण का पुतला राम के प्रभाव से जला स्वत: , असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दशहरा हर्षोल्लास के साथ मनाया , दशहरा मैदान पर आतिशबाजी से आसमान सतरंगी हो गया

जनमत जागरण @ सोयतकलां :: शनिवार को दशहरे शुभ के अवसर पर सोयतकलां के दशहरा मैदान पर एक विचित्र और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने हजारों लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। जिस समय नगर परिषद द्वारा स्वागत सम्मान समारोह के उपरांत आतिशबाजी की जा रही थी। भगवान राम की प्रतीकात्मक विजय की प्रतीक्षा हो रही थी, उस समय अचानक आतिशबाजी की एक चिंगारी से रावण का पुतला समय से पहले जल उठा। हालांकि यह घटना एक दुर्घटना के रूप में हुई, लेकिन लोगों के बीच इसकी चर्चा के कई अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। कुछ ने इसे भगवान राम की शक्ति का प्रतीक माना, तो कुछ ने इसे लापरवाही और असावधानी का परिणाम बताया। जो भी हो, इस घटना ने दशहरे के आयोजन को एक अनोखी यादगार बना दिया। पुतले के समय से पहले जलने से पूरा मैदान उत्सुकता और अचरज के माहौल से भर गया। कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि पुष्कर राज सिंह जादौन, भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष चिन्तामण राठौर , नगर परिषद उपाध्यक्ष राजेश बैरागी सहित समस्त पार्षद गण और गणमान्य नागरिक मंचासीन थे । कार्यक्रम में नगर परिषद सीएमओ देवेंद्र वत्स, थाना प्रभारी यशवंत गायकवाड आदि उपस्थित थे । नगर परिषद के द्वारा दशहरा मैदान पर विभिन्न प्रकार की अनेकों आतिशबाजी कर दशहरे को यादगार बनाया, दशहरा मैदान पर आतिशबाजी से आसमान सतरंगी हो गया। आतिशबाजी जहां बड़ों के साथ बच्चों को खूब रात आई। श्री कृष्ण मित्र मंडल के तत्वधान में आकर्षक एवं मनमोहक श्री राम सीता लक्ष्मण हनुमान की आकर्षक झांकी बनाई गई एवं प्रभु श्री राम की झांकी के साथ नगर वासी दशहरा मैदान पहुंचे वही श्री राम जी की सेना चली श्री राम जी की सेना चली मधुर भजनों के साथ नगर भक्ति में हो गया।

दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ :: इस अप्रत्याशित घटना से उपस्थित दर्शक भी हैरान रह गए। कुछ लोगों ने इसे मात्र एक दुर्घटना के रूप में देखा, जबकि कुछ ने इसे एक सांकेतिक घटना मानते हुए इसे राम की दिव्य शक्ति का परिणाम बताया। 
👉 एक दर्शक ने कहा, "यह रावण के अहंकार का प्रतीक है, जिसे राम की उपस्थिति से स्वत: ही जल जाना था। यह भगवान की शक्ति का प्रमाण है।"

👉 एक अन्य दर्शक ने इसे अपशकुन के रूप में देखा और कहा, "समय से पहले रावण का जलना शुभ संकेत नहीं है। यह समाज में किसी अनहोनी की ओर इशारा कर सकता है।"

पापा रावण कैसे जल गया राम ने तो मार ही नहीं ::
दशहरा मैदान पर एक 8 वर्ष की बालिका अपने पिता के साथ खड़ी थी, आतिशबाजी देख रही थी कि अचानक जब रावण जलने लगा तब उस बच्ची ने अपने पिता से पूछा की क्या पापा राम ने तो रावण को तीर मारा ही नहीं कैसे जल गया पिता उसकी बात सुनकर हंस हंस के लोटपोट हो गया ।

क्या था आयोजन में :: दशहरे के अवसर पर इस बार का रावण का पुतला लगभग 30 से 35 फीट लगभग ऊंचा था, जिसमें आकर्षक आतिशबाजी और विस्फोटक सामग्री का प्रयोग किया गया था। प्रतिवर्षानुसार रावण के पुतलों को जलाने के लिए आतिशबाजी समाप्त होने के बाद हनुमान जी द्वारा रावण के पुतले में आग लगाई जाती है लेकिन नियोजित समय से पहले ही रावण का पुतला जल उठा, जिससे लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई।

आयोजकों की प्रतिक्रिया :: नगर परिषद सीएमओ ने कहा, “यह पूरी तरह से अनियंत्रित घटना थी। हमने सभी सुरक्षा प्रबंध किए थे, लेकिन यह हादसा आतिशबाजी की असावधानी से हुआ। इससे पुतला समय से पहले जल गया। हम इसे केवल एक तकनीकी दुर्घटना मान रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अधिक सावधानी बरतेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!