कोटा के श्री नाथपुरम में रावण ने मारी आंख , फिर किया अट्टहास किया , ओर कहा—‘मैं हूं रावण!’ भव्य रावण दहन में उमड़ा जनसैलाब

जनमत जागरण @ कोटा से हमारे संवाददाता गोविंद मोदी की ऑन द स्पॉट लाइव रिपोर्ट — कोटा के श्री नाथपुरम में इस साल का रावण दहन अद्वितीय और रोमांच से भरपूर रहा। जैसे ही 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले ने अट्टहास करते हुए अपनी आंख मारी और गरज कर कहा, “मैं हूं रावण!”, पूरा मैदान जोश और उत्साह से गूंज उठा। यह दृश्य ऐसा था जैसे खुद रावण अपनी हार से पहले आखिरी बार अपनी बुराई का प्रदर्शन कर रहा हो। इस अद्भुत क्षण ने हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिन्होंने तालियों और जय श्री राम के नारों से पूरा माहौल गुंजायमान कर दिया।
⏩ रावण दहन की परंपरानुसार, उपस्थित लोग बुराई के प्रतीक इस विशाल पुतले पर पत्थर फेंकने की रस्म निभा रहे थे। यह प्रतीकात्मक परंपरा दर्शाती है कि कैसे समाज बुराई का खात्मा करता है। मैदान में माता-पिता अपने बच्चों को कंधों पर बैठाए हुए यह ऐतिहासिक दृश्य दिखा रहे थे, मानो यह जीवनभर की याद बन जाए। बच्चों की आंखों में आतिशबाजी की चमक और रोमांच साफ दिखाई दे रहा था।जैसे ही रावण के पुतले में अग्नि दी गई, पूरा आकाश रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा।

⏩ खास बात यह थी कि इस बार रावण के पुतले में इको-फ्रेंडली पटाखों का इस्तेमाल किया गया, जिससे न केवल उत्सव का आनंद बढ़ा, बल्कि पर्यावरण की भी सुरक्षा की गई। हर दिशा से आतिशबाजी के रंगीन फूल जैसे फूट रहे थे, और आसमान सतरंगी रोशनी से भरा हुआ था।रावण दहन से पहले, भव्य रामलीला का मंचन हुआ जिसमें राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के पात्रों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
⏩ राम और रावण के युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों में रोमांच का संचार किया। जैसे ही राम का तीर रावण के पुतले पर लगा, पूरा माहौल जय श्री राम के नारों से गूंज उठा।मेले का दृश्य भी उतना ही भव्य था। चारों ओर झूले, खिलौने, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल, और हंसी-खुशी का माहौल था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस मौके का भरपूर आनंद लिया।

⏩ सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच यह आयोजन पूरी शांति और व्यवस्था के साथ संपन्न हुआ। स्वयंसेवी दलों और पुलिस बल ने मैदान में निगरानी रखी, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।इस साल का रावण दहन न सिर्फ कोटा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया। श्री नाथपुरम का यह आयोजन भव्यता, उत्साह और परंपरा की गहराइयों में डूबा हुआ था। यह नजारा यहां उपस्थित हर व्यक्ति के दिल में जीवनभर के लिए बस गया होगा।



