जब तक हम व्यक्तिगत रूप से स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक न तो मन को शान्ति मिलने वाली है और न ही वास्तविक वैभव की- पढ़ें यह ई-रिपोर्ट

🚩 भगवत प्राप्ति का मूल साधन केवल गोसेवा ही है – महंत अनुजदास जी महाराज मुंगाणा
जनमत जागरण @ सुसनेर। परमेश्वरी करणी मैया ने सभी समस्याओं का समाधान गौसेवा से ही बताया है और यह सत्य भी है कि जब तक गायमाता को हम व्यक्तिगत रूप से। स्वीकार नहीं करेंगे,अपने जीवन में नही रखेंगे। तब तक न तो मन को शान्ति मिलने वाली है और न ही वास्तविक वैभव की। प्राप्ति होने वाली हैं और हमारे जीवन में कुछ न कुछ समस्या बनी रहेगी आप कितने भी बड़े भक्त हो पूजा पाठ या अन्य साधना करने वाले हो लेकिन आपके निजी जीवन में गायमाता नहीं है तो आप सम्पूर्ण सुखों की अपेक्षा मत करना क्योंकि हमारे पुराणों में स्पष्ट खुला कहां है कि गायमाता की कृपा से ही हमारे कष्ट टल जाते है और गावों सर्व सुख प्रदा ऐसा महाभारत में भी स्पष्ट लिखा है,इसलिए गायमाता चर्चा का विषय नहीं, गायमाता केवल पूजा का विषय नहीं,गायमाता आत्मसात का विषय है ,गायमाता स्वीकार्यता का विषय है। अपने आंगन में चाहिए घर भले ही छोटा ही क्यों न हो । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 188 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने मान करणी जी की चरित्र कथा में बताते हुए कही।
🚩 पूज्य स्वामीजी ने वर्तमान देश की जलनीति के बारें में बताते हुए कहां कि भारत की वर्तमान जलनिति में पहला अधिकार मनुष्य का,दूसरा अधिकार प्राणियों का और तीसरा अधिकार सिंचाई के लिए बताया है जबकि राष्ट्रीय जलनिती में पहला अधिकार गोमाता का,दूसरा अधिकार प्राणियों का तीसरा मनुष्यो का और और फिर सिंचाई का अधिकार होना चाहिए क्योंकि मनुष्य तो अपनी व्यवस्था कही न कही से स्वयं कर लेगा परन्तु गोमाता व प्राणी मात्र का जल में पहला अधिकार होना चाहिए और देश की ऐसी जलनीति बने तो भारत कुछ ही समय में विश्वगुरु बन सकता है और भारत विश्व की प्रथम अर्थव्यवस्था का नायक बन सकता है ।

🚩 गो कृपा कथा के 188 वें दिवस पर राजस्थान की मेवाड़ धरा पर स्थापित सांवरिया धाम मुंगाना के पूज्य महन्त स्वामी अनुजदास जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया इस धरती पर भगवान के जितने भी अवतार हुए है और भगवान अपने भक्तों के रूप में भी प्रकट हुए है तो वे केवल गो रक्षा एवं गौसेवा के लिए ही अवतरित हुए है। इस विश्व के अखंड नायक भगवान कृष्ण ने तो जगत जननी गोमाता की सेवा के लिए ही भारत की इस पुण्य धरा अवतार लिया है और उन्होंने भगवती गोमाता की चारण लीला स्वयं भगवान ने की है,भगवान का अवतार केवल गोमाता की रक्षा, गोमाता की सेवा के लिए ही हुआ है और इस सृष्टि में भगवत प्राप्ति का मूल साधन केवल गोसेवा ही है । 188 वें दिवस पर पूज्य रमणानंद सरस्वती जी महाराज,पूज्य रतन बाबा सहित गोपाल परिवार के सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ कार्यकर्ता आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 188 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मालवा एवं मेवाड़ भक्त मंडल की ओर से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 188 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के शाजापुर जिले के मोहना से इंद्रमल माहेश्वरी,लक्ष्मीनारायण शर्मा, पिरू लाल शर्मा, चतुर्भुज गुप्ता एवं कैलाश सेन व राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के मेवाड़ भक्त मण्डल से गोपाल तेली , राधेश्याम तेली (गोमाना), बंशी लाल तेली (कानोड़), लखन तेली(चोपड़ा) , गोपाल तेली(आकोला) आदि ने अपने परिवार सहित देश, राज्य ग्राम, नगर के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।



