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अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेश

वायुमंडल की शुद्धता और घर की दरिद्रता दूर करने का एक मात्र उपाय क्या हैं, जानिए: गोकथा के माध्यम से स्वामीजी के मुख से

🚩 जीवन का मूल आधार गायमाता ही है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। गायमाता के बिना पूरी की पूरी सृष्टि नहीं चल सकती । गायमाता नहीं है तो जल की व्यवस्था बिगड़ जाएगी,सरोवर में भरा जल अपवित्र होने लगेगा और गो के बिना वर्षा सम्भव नहीं है,,जिसका हमारे धर्म ग्रंथों एवं विज्ञान में भी उल्लेख है कि गो से घृत प्राप्त होता है,घृत से अग्नि में आहुति लगती है और आहुति से वायु मंडल पवित्र होता है और देवता प्रसन्न होते है,देवता प्रसन्न होकर वायुमंडल की पवित्रता के साथ वर्षा करते है , वर्षा से कृषि होती है,कृषि से जीवन चलता है अर्थात् जीवन का मूल आधार गायमाता ही है उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 196 वे दिवस पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।

🚩 इस थल की पवित्रता,पृथ्वी की पवित्रता और प्रकृति का पौषण भी गायमाता से ही होता है अर्थात गायमाता का गोबर अगर धरती माता को नहीं मिले तो धरती कमजोर हो जाती है और उसकी उर्वरा शक्ति को खो देती है ,इसी प्रकार नभ की बात करें तो आकाश की शुद्धता गोमाता से ही है,गायमाता के कारण उसके आस पास का क्षेत्र पवित्र हो जाता है और जब गायमाता रंभाती है और वह मां…..बोलती है, तो उसके रंभाने से दो काम हो जाते है एक तो वायुमंडल की शुद्धता और साथ ही साथ जिस घर में गायमाता की हुंकार करने मात्र से उस घर की दरिद्रता दूर हो जाती है और हमारे धर्म ग्रंथों में भी वर्णन आता है कि भगवती गोमाता जिसकी भूमिका पृथ्वी के संचालन में बहुत महत्त्वपूर्ण है और कही तरीको से वह धरती के भार को धारण करती है,ऐसी गोमाता का प्रगट होना आनन्द देने वाला है।

अतिथि:: गो कृपा कथा के 196 वें दिवस पर श्री सोहन विश्वकर्मा क्षेत्र गो रक्षा प्रमुख विश्व हिन्दू परिषद् मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य व बाल कृष्ण गोशाला बंबोरी तहसील छीपा बडौद ज़िला बारां से रामदयाल एवं बाबूलाल अतिथि उपस्थित रहें ।

196 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  मध्यप्रदेश से ::   एक वर्षीय गोकृपा कथा के 196 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की जीरापुर तहसील के भगोरा ग्राम की और से समस्त ग्राम  की और से अपने ग्राम ,नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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