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आधा ज्ञान अहंकार को बढ़ा देता है, अहंकार व्यक्ति की सबसे बड़ी बाधा है-स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। रानी चेन्नम्मा का इतिहास में विशेष स्थान रहा है, क्योंकि वे भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली पहली शासक थीं । रानी चेन्नम्मा ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के ख़िलाफ़ सशस्त्र विद्रोह किया था । उनका विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता की पहली लड़ाई माना जाता है.और उन्होंने अपने राज्य पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए अंग्रेज़ों से लड़ाई लड़ी थी. उनका साहस और नेतृत्व भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है,उनकी बहादुरी देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा है. उनका दृढ़ नेतृत्व और धैर्य एक प्रेरणा है कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी वीरता की जीत हो सकती है. उनके साहस के कारण ही उन्हे ‘कर्नाटक की लक्ष्मीबाई’ भी कहा जाता है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 198 वे दिवस पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।

🚩 स्वामीजी ने आगे बताया कि अगर मर्म नहीं है और हमने धर्म को जान लिया ,मर्म का मतलब पूजा,पाठ इन सब को तो हमने जान लिया परंतु इनके पीछे के मर्म का हमें पता नहीं है तो यह अर्ध ज्ञान है उदाहरणार्थ किसी ने हलवा नही देखा और उसने हलवे में डलने वाले गुड को चख कर उसे ही हलवा मान बैठने जैसा ही यह आधा ज्ञान कह और इसी स्तिथि बिना मर्म के धर्म के बारे में सोचता है तो उसकी वैसी ही स्तिथि बन जाती है और आधा ज्ञान जो होता है वह अहंकार को बढ़ा देता है और कही बार तो ब्रह्म सूत्र के केवल दो वाक्य पढ़कर ही कह देते है “अहम ब्रह्मा अस्मी” मैं ही ब्रह्म हूं। और सारा जीवन भ्रम में ही निकाल देते है और ऐसे व्यक्ति की मुक्ति सम्भव नही है अर्थात अहंकार व्यक्ति की सबसे बड़ी बाधा है । स्वामीजी ने आगे बताया कि जो व्यक्ति विधि पूर्वक कृषि करता है,वह कृषि के दोषों से मुक्त हो जाता है और भगवती लक्ष्मी की कृपा से वह धनवान होता है और किसी ने कम उम्र के बेलो को अर्थात तीन वर्ष की आयु से कम उम्र के बेलो को जोत दिया अथवा एक बलवान एवं दूसरे कमजोर बैल को जोत दिया तो उसे ब्रह्म हत्या के बराबर का पाप मिलता है साथ ही किसी ने संक्रांति,पूनम एवं अमावस्या को बैल को जोत दिया तो उसे दस हजार गो की हत्या का पाप मिलता है ।

कार्यक्रम :: आगामी 02 नवम्बर 2024 से 10 नवम्बर 2024 तक गो अभयारण्य में होने वाले गो नवरात्रि महोत्सव में विभिन्न प्रकार के होने गो संस्कृति सम्मेलन में से 08 नवम्बर 2024,को प्रात:10 बजे से होने वाली बैठक के लिए आज मालवा क्षेत्र के विप्रो की विशेष बैठक स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती के सानिध्य में सम्पन्न हुई जिसमें आचार्य पण्डित श्याम लाल धतुरिया,पंडित राजाराम व्यास पिपलिया , पण्डित मांगीलाल ब्यास सरखेड़ी , पण्डित राधेश्याम, पण्डित दयाशंकर व्यास, पण्डित वेदप्रकाश, पण्डित विनोद महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वैदिक वेद विद्यापीठ क्यासरा एवं पण्डित गंगाराम जी शर्मा की उपस्तिथि में सम्पन्न हुई जिसमें इस बैठक में मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के सभी विप्रो को गो विप्र सम्मेलन की सूचना हेतु रचना तय की ।

अतिथि:: गो कृपा कथा के 198वें दिवस पर.मोहनलालशर्मा न्यासी गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा एवं साधक धर्मशरण न्यासी गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा एवं हरगोविंदभाई न्यासी गोधाम महातीर्थपथमेड़ा आदि अतिथि उपस्थित रहें ।

198 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से ::   एक वर्षीय गोकृपा कथा के 198  वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश की सुसनेर नगर से सिसोदिया परिवार  एवं  राजस्थान के झालावाड़ जिले की डग तहसील स्थापित महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वैदिक वेद विद्यापीठ के आचार्यों ने अपने ग्राम ,नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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