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जब तक कश्मीर का बाकि हिस्सा भारत मे नही मिल जाता,तब तक आजादी अधूरी है – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। आज का दिन देश के लिए 1947 के बंटवारे के बाद बहुत महत्वपूर्ण, क्रांतिकारी ओर चुनौती पूर्ण माना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे में क्या क्या नहीं हुआ हम सब को पता है। सिंध क्षेत्र से जो ट्रेनें भर कर आती थीं उसमें जिंदा इंसान कम सिर कटी लाशें ज्यादा आई थी। बंटवारे के उन चित्रों को देख कर आज भी सिहरन उठती है। चंद लोगों ने सत्ता हथियाने के चक्कर में, शासन हथियाने के चक्कर में, छद्म धर्मनिरपेक्षता के चक्कर में मुसलमानों को प्रसन्न करने के चक्कर में भारत मां के टुकड़े किए। और उस भारत मां के टुकड़े के साथ असंख्य हिंदुओं के भी टुकड़े हुए। पाकिस्तान से आने वाली ट्रेनों का दृश्य बड़ा वीभत्स करने वाला था। उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 201 वे दिवस पर श्रोताओं को संबोधित करते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती महाराज ने कही।

🚩 आजादी के बाद यह क्रम निरंतर चल रहा था इसी बीच पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया है। उस समय कश्मीर के राजा हरि सिंह ने तय किया कि कश्मीर को भारत में मिला देना चाहिए। जब भारत की सेना पाकिस्तान की सेना के खिलाफ पहुंची तब कश्मीर का बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से खाली करा दिया लेकिन आज भी कुछ हिस्सा पाकिस्तान के पास है। और जब जब भी यह 26 अक्टूबर आता है तब तब दिल में एक टीस उठती है कि आजादी अभी अधूरी है। जब तक कश्मीर का बाकि हिस्सा भारत मे नही मिल जाता, मां हिंगलाज की यात्रा बिना पासपोर्ट ओर वीजा के नहीं हो जाती तब भारत को मिली आजादी अभी अधूरी है। इसके लिए हम लोगों को ओर अधिक प्रयत्न करना होगा।

🚩 सात्विक शक्तियों को संगठित करना होगा। ओर वो सात्विक शक्तियां गो की कृपा से संभव है। जब हम गोमाता की शरणागति लेंगे हमारी संतानें निष्काम भाव से राष्ट्र के लिए न्योछावर होने के लिए तैयार हो जाएंगी।यह जो कामनाओं से भरा हमारा जीवन है। ऐसे सकामता से भरे जीवन से बाहर आने का सब से बड़ा साधन सत्वगुण है और सत्वगुण की दाता भगवती गोमाता ही है। खंडित भारत को अखंडित बनाना है तो तरीका यही है। हमें भगवान श्री राम की बात माननी पड़ेगी।

🚩 वाल्मीकि रामायण में भगवान राम ने अपने भाई भरत को कहा कि गोमाता के बिना राष्ट्र का उत्थान और राष्ट्र की रक्षा संभव नहीं है। यह तभी संभव जब प्रत्येक भारतवासी के हृदय में गोमाता के प्रति प्रेम को स्थापित कर देवे।स्वामीजी ने बताया कि दीपावली पर घर की सफाई कर रहे हो लेकिन हमारे अंदर जो मेल भरा है उसका क्या होगा उसकी सफाई कैसे होगी। असली दिवाली तो अंदर उजाला आएगा तब मनेगी। केवल घर की सफाई करने से बाहर की दिवाली मनाने से क्या होगा । अंदर जो अंधकार है वह भगवती गोमाता की कृपा से ही मिट सकेगा।

⏩ 200 वें दिवस पर मध्यप्रदेश के राजगढ जिले के देवपुरा आश्रम लखोनी के महन्त पूज्य गणेश पुरी जी महाराज, नारायण सिंह सोलंकी, फौजी जगदीश दांगी, फौजी कैलाश दांगी,, फौजी भगवान सिंह दांगी,, इन्द्र सिंह परमार, लक्ष्मी नारायण एवं देवी सिंह व सुसनेर तहसील के मैना ग्राम से पटेल झुझार सिंह एवं गणपत आदि अतिथि उपस्थित रहें । इन्द्रसिंह राजपुरोहित के पुत्र एवं मिट्ठू सिंह राजपुरोहित के भतीजे आकाश सिंह राजपुरोहित के सुपुत्र चिरंजीव शिवम सिंह का प्रथम जन्मदिवस विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में अपने परिवार के साथ मनाया ।

201 वे दिवस पर चुनरी यात्रा  मध्यप्रदेश एवं राजस्थान से ::  एक वर्षीय गोकृपा कथा के 201  वें दिवस पर चुनरी मध्यप्रदेश के इन्दौर महानगर से  ओम प्रकाश,, इन्द्र सिंह, मिट्ठू में सिंह। किशोर सिंह, विक्रम सिंह, आकाश सिंह, एवं अजय सिंह राजपुरोहित , भैरवपुर भोपाल की श्री बालकृष्ण गोशाला से रमेश रिछारिया, मुकेश किर, श्री कृष्ण धोटे एवं राजस्थान के पाली जिले के ठाकुरला ग्राम से अंशुमान सिंह, विक्रम सिंह,,किशोर सिंह आदि ने अपने परिवार के साथ अपने नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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