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धनतेरस पर सोना वापसी: ’खुद के सोने की कीमत पर’ देश की समृद्धि का नया मापदंड..!

जनमत जागरण @ नई दिल्ली: धनतेरस के शुभ अवसर पर भारत ने अपनी छाती चौड़ी करते हुए, ‘अपना ही’ 102 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड की तिजोरी से वापस ले लिया। इस स्वर्णिम उपलब्धि की घोषणा हुई तो मानो पूरा देश सोने-सी चमक में नहा गया! सोचिए, जिस सोने को हमने 1990 के दशक में गिरवी रखकर अपनी आर्थिक ‘आजादी’ का सबूत दिया था, उसे आज हमें गर्व से वापस पाने का मौका मिला।

इतिहास के गर्त से उभरी यह गौरवशाली संपत्ति : जरा उस दौर की कल्पना कीजिए: 1991 में, जब हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो गया था, तब हमें अपनी ही जमीन में उगले हुए सोने को जहाजों में लादकर लंदन भेजना पड़ा था। वो अलग बात है कि हम तब “सोने की चिड़िया” से “सोना गिरवी रखने वाली चिड़िया” बन गए थे। लेकिन तब क्या करते? अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वर्ल्ड बैंक का प्यार जीतने के लिए यह तो करना ही था!आज, इतने वर्षों बाद, यह सोना वापस लाने के इस कदम को हमें भारतीय वित्तीय आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक बताया जा रहा है। आखिर, किसी और का गिरवी रखा हुआ सोना वापस लाने की बात हो तब तो शर्म आती, पर यह तो अपना ही है, भाई!

धनतेरस का ‘स्वर्णिम’ संयोग :: धनतेरस पर सोना वापसी का यह संयोग भी कम दिलचस्प नहीं। यह वही दिन है जब हम मुठ्ठी भर सोने के लिए बाजार में लड़ते-झगड़ते हैं, और सरकार इस धनतेरस पर हमें गारंटी दे रही है कि देखो, हमारा (मगर कहने में क्या जाता है, तुम्हारा) सोना वापस आ गया! आम आदमी और उनके गहनों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सोने को इतना तराशा गया है कि इसकी वापसी के नाम पर पूरा सोशल मीडिया सुनहरी धूल से भर चुका है।

वित्त मंत्रालय का “स्वर्ण युग” का दावा :: वित्त मंत्रालय ने हमें समझाया कि यह सोना सिर्फ धातु नहीं, बल्कि हमारे देश की “आर्थिक समृद्धि” का प्रतीक है। ऐसा प्रतीक जिसे हमने खुद छोड़कर दुनिया को दिखाया कि भले ही जेब में फूटी कौड़ी न हो, हमारे पास गिरवी रखने लायक सोना तो है। और तो और, तब इसे गिरवी रखकर हमने साबित कर दिया था कि हमारी अर्थव्यवस्था कोई “फ्लॉप शो” नहीं, बल्कि यह ऐसी स्क्रिप्ट है जिसमें जरूरत पड़ने पर कुछ भी गिरवी रखकर आगे बढ़ा जा सकता है।

आर्थिक जगत में “सोने की तरह चुप्पी” :: आर्थिक जगत के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि “वास्तव में यह भारत के लिए गौरवशाली क्षण है!” आखिर 102 टन सोने की वापसी ने यह साबित कर दिया है कि हमारी अर्थव्यवस्था के सामने कोई भी बैंक या संस्था सिर झुकाने के लिए तैयार है, बशर्ते गिरवी रखने का साहस हो।

जनता का विचार: “आज नहीं, तो कल अपनाना है”बाजार की ओर से जनता में एक नई भावना पनपी है – “आज नहीं, तो कल अपनाना है।” जनता को यह महसूस हो रहा है कि यह सिर्फ सोने की वापसी नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक संकेत है। अब हम केवल सोना गिरवी रखने वाले नहीं, बल्कि उसे वापस पाने में भी महारत हासिल कर चुके हैं। ‘असली सोना वापस आया’ इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए एक बात तो तय है कि भारत सोने को जितनी बार भी गिरवी रखे, वो लौटाने का उत्सव हर बार यूं ही मनाएगा। आखिर अपने ही सोने को वापस लाने की जितनी खुशी हमें होती है, वो शायद किसी और देश को न होती हो।

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