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अलौकिक दीपावली पर्व: आध्यात्मिक महत्ता और सांस्कृतिक समृद्धि , आवो हम अपने भीतर के दीप को प्रज्वलित करें और समाज, परिवार और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें

आवो हम अपने भीतर के दीप को प्रज्वलित करें और समाज, परिवार और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें
जनमत जागरण @ संपादकीय :: दीपावली, जो भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, न केवल बाहरी आडंबरों से सजता है बल्कि आध्यात्मिकता और आत्म-प्रकाश का संदेश भी समेटे हुए है। यह त्योहार सिर्फ दीपों की ज्योति से ही नहीं, बल्कि भीतर की ऊर्जा को जागृत करने का प्रतीक भी है। दीपावली की वास्तविकता में निहित है अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का, बुराई पर अच्छाई की जीत का और अज्ञानता को ज्ञान से हराने का संदेश।
📘धर्म और अध्यात्म का मेल :: दीपावली का प्रमुख आधार भारतीय धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक कथाओं में पाया जाता है। रामायण के अनुसार, जब भगवान राम रावण का वध कर 14 वर्ष का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने नगर को दीपों से सजाया था। इसी तरह महाभारत में पांडवों के वनवास से लौटने पर इसी प्रकार का उल्लास देखने को मिलता है। इस तरह दीपावली की ऐतिहासिक महत्ता ने इसे एक ऐसा पर्व बना दिया है जो न केवल हर्षोल्लास का प्रतीक है, बल्कि धर्म और अध्यात्म के गहरे अर्थों को भी समेटे हुए है।
📘आत्म-साक्षात्कार का अवसर :: दीपावली को ‘प्रकाश पर्व’ कहा जाता है, जो आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्म-प्रकाश और आत्म-साक्षात्कार का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने और अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करने का अवसर प्रदान करता है। हमारे भीतर जो दिव्य ऊर्जा है, उसे पहचान कर जीवन को एक नई दिशा देने का यह सबसे उपयुक्त समय है।
📘समृद्धि और वैभव का प्रतीक :: धनतेरस से लेकर दीपावली और भाई दूज तक का यह पांच दिवसीय उत्सव हमें भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि के महत्व को समझाता है। लक्ष्मी पूजन से हमें आर्थिक समृद्धि और स्थिरता का संदेश मिलता है, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि असली लक्ष्मी बाहरी संपदा नहीं, बल्कि हमारे अंदर की संतुष्टि और संयम है। ऐसे में, यह पर्व हमें मितव्ययिता, आभार और संतोष के मूल्यों को समझने का सशक्त माध्यम भी है।
📘पारिवारिक और सामाजिक एकता :: दीपावली पर्व का एक और आध्यात्मिक पहलू परिवार और समाज में एकता का संदेश है। इस पर्व पर परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं, दीप जलाते हैं और खुशी मनाते हैं। इससे परिवार के बीच प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है। यही एकता का संदेश समाज को भी मिलता है, जो समरसता और सामूहिकता को बढ़ावा देता है।
📘प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता :: आधुनिक युग में दीपावली को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। पटाखों के स्थान पर पारंपरिक दीयों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके हम प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को भी निभा सकते हैं। इसी से यह भी समझ आता है कि अध्यात्म केवल भीतर का ही नहीं, बल्कि हमारे आसपास की दुनिया और पर्यावरण की शुद्धि और संरक्षण से भी जुड़ा है।
📘 दीपावली पर्व का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व हमें जीवन में संतुलन, आत्म-साक्षात्कार, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश देता है। यह पर्व हमें आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार की स्वच्छता का महत्व बताता है। आइए, इस दीपावली हम अपने भीतर के दीप को प्रज्वलित करें और समाज, परिवार और प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करें। इसी में इस पर्व की असली महत्ता निहित है।
🙏 दीपों का यह महोत्सव, सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए, यही मंगल कामना।
राजेश कुमरावत - संपादक




