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देश की माताओ को एक हाथ से चारा एवं दूसरे हाथ में भाला लेकर गो सेवा के लिए आगे आना होगा – स्वामी गोपालानंद सरस्वती

जनमत जागरण @ सुसनेर। भैरव बाबा शिव भोले बाबा के ही विशेष अवतार हैं कई लोग भैरव जी की पूजा के नाम पर कई प्रकार की तामसिक वस्तुओ का प्रयोग करते है जबकि भैरव के सभी रूप सौम्य है। जिस प्रकार भगवान नृसिंह हिरण्य कश्यप के लिए भयंकर रूप में प्रकट हुए थे लेकिन भक्त प्रहलाद के लिए तो वे एक मां के रूप में सौम्य थे उन्होंने एक मां की भांति उनको स्नेह देकर दुष्ट हिरण्य कश्यप का नृसिंह रूप धारण करके वध किया था उसी प्रकार भैरव बाबा भी दुष्टों का समन करने के लिए काल भैरव से लेकर अनेक रूपों में प्रकट होते है और भगवान कृष्ण ने गीता जी में स्पष्ट कहां है कि जो मुझे ध्याता है,वह मुझे पाता है उसी प्रकार भैरव बाबा भी अपने भक्तों पर कृपा करते है । भगवान भैरव बाबा जगदम्बा के द्वार पर कभी पुत्र बनकर कभी भाई बनकर मां भवानी के साथ हमेशा विराजमान रहते है और उनका वात्सल्यमय प्रेम ही सब पर कृपा करते है । उक्त बातें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 228 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने काल भैरव अष्टमी की महिमा बताते हुए कही ।

⏩ पूज्य महाराज जी ने स्वतंत्रता सेनानी एवं लक्ष्मीबाई की परम सहयोगी झलकारी बाई के जन्म दिवस पर उनको वंदन करते हुए समस्त नारी समाज को झलकारी बाई से प्रेरणा ले कर गो सेवा एवं राष्ट्र रक्षा के कार्य मे लगने की प्रार्थना की महाराज जी ने बताया कि भगवती गोमाता के लिए करपात्री जी महाराज से लेकर वर्तमान शंकरा भगवान सहित गोपालमणि जी महाराज जैसे गोप्रेमी संतो ने भारत के पुरुष समुदाय को जागृत करने का निरंतर कार्य करते आ रहें है, लेकिन भारत का पुरुष नपुंसकता की स्थिति में आ गया है । इसलिए झलकारी देवी के जन्मदिवस के सुअवसर पर देश की मातृशक्ति को आगे आना होगा क्योंकि पुरूषों में अब न तो छत्रपति शिवाजी और न ही महाराणा प्रताप जैसे प्रतापी गोभक्त होना वाले है लेकिन भारतीय नारियों ने तो राष्ट्र एवं गोमाता हितार्थ अपने प्राणों की बाजी लगाई है जिसमें झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, राजमाता मां अहिल्या देवी एवं झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं का इतिहास रहा है किन्तु आज गो माता की स्थिति देख कर भी हमारा समाज सुषुप्त अवस्था में है । अगर देश की माताएं इस कार्य मे लग जाए तो निश्चित परिवर्तन आएगा और अब भारत की मातृशक्ति को एक हाथ से गोसेवा एवं दूसरे हाथ में सहस्त्र उठाने की आवश्यकता है ।

⏩ भगवती गोमाता की भूमिका के बारे में बताते हुए स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने कहां कि बालक जब छोटा होता है तब कई तरह के बाल दोष बालक को ग्रसित कर लेते हैं और गौ माता जी के गोबर के कंडे की धूप देने से कई तरह के बाल दोष अथवा बल ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं क्योंकि भगवती गोमाता सारे जगत की मां है एवं समस्त प्रकार के दुखों का निवारण भगवती गोमाता की कृपा से हो सकता है। । 228 वे दिवस पर उज्जैन के वल्लभनगर निवासी सुभाष चन्द्र ब्यास उनकी श्रीमति सरोज व्यास पुत्र सुदर्शन व्यास एवं मामीजी श्रीमती कुसुम जोशी अतिथि उपस्थित रहें ।

⏩ 228 वे दिवस पर चुनरीयात्रा राजस्थान  एवं मध्यप्रदेश की ओर से ::   एक वर्षीय गोकृपा कथा के 228 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले के रघुनाथ पुरा  एवं राजगढ़ जिले के रामपुर ग्राम की महिला मंडल  एवं खरगोन जिले के सेगांव से विजेन्द्र यादव एवं जय प्रकाश यादव ने अपने परिवार की और से  सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया। 

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