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“गोरक्षा का महासंकल्प: 8 गोमाताओं से शुरू हुई यात्रा ने कैसे छुआ 1लाख 57 हजार का आंकड़ा.? जानिए कैसे बना – “विश्व का प्रथम गोसेवा केन्द्र पथमेड़ा का गोधाम”

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 247 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है आज ही मां नर्मदा की गोद में रहकर हनुमान जी महाराज को अपने हृदय में धारण कर भगवान राम का निरंतर चिंतन करने वाले दिव्य संत सियाराम बाबा ने मोक्षदा एकादशी के ब्रह्ममुहुर्त में ब्रह्म में विलीन हो गए ऐसे दिव्य संत को नमन करते हुए बताया कि परम पवित्र सर्वहितैषणी वेदलक्षणा गाय एवं उनका वंश आज आसुरी प्रवृत्ति से ग्रस्त विषयलोलुप हृदयविहीन मानवाकार दानवों की अवैध कामनाओं का शिकार हो रहा है । प्रतिवर्ष भारत की धर्मधरा पर डेढ़ करोड़ से गोवंश की कत्लखानों में निर्ममता एवं क्रूरतापूर्वक हत्या हो रही है, इतना ही गोवंश निराश्रित एवं उपेक्षापूर्वक छोड़ दिया जाता है। इस तरह प्रतिवर्ष 3 करोड़ गोवंश की क्षति होती है। यह इस राष्ट्र पर गोहत्या के महापाप का विनाशकारी कलंक है। इसे मिटाने की दृष्टि से ही आज से 11 वर्ष पूर्व हिमालय में तपस्या कर रहें गो ऋषि पूज्य स्वामी दत्तशरणाननंद जी महाराज ने पूज्य सन्तों के सानिध्य में 17 सितम्बर 1993 को पुनः भारत की पवित्र गोचारण भूमि द्वारका क्षेत्र आनन्दवन पथमेड़ा से राष्ट्रव्यापी रचनात्मक एवं सृजनात्मक गोसेवा महाभियान का सूत्रपात किया क्योंकि आज ही के दिन सांचोर के गोरक्षक वीरों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 15 पर ट्रक में गुजरात के कत्लखानें ले जाये जा रहे 22 वेदलक्षणा गोवंश को तथा पाकिस्तान की सीमा पर ले जायी जा रही 8 सवत्सा गायों को गो तस्करों सेछुड़वाया था उन गोमाता से सेवा प्रारंभ की जो 31 वर्ष बाद 157000 गोमाता की मातृभाव से सेवा हो रहीं है।

गीता जयंती और गोमाता का आध्यात्मिक संबंध :: स्वामीजी ने बताया कि आज गीता जयंती है।हरि के मुख से ही गीता प्रकट हुई है और हरि के मुख से ही गोमाता प्रकट हुई है , इसलिए दोनों आपस में बहिनें है और महापुरुषों ने भगवती गीता को गोमाता की पुत्री भी माना है अर्थात उपनिषदों की गोमाता बनाकर कन्हैया स्वयं ग्वाला बनकर गीता रूपी दुग्धपान हमें कराया है । यह ऐसा अमृत है,जिसे पीने वाला अमर हो जाता है क्योंकि गीता जी का अमृत पीने के बाद न जन्म होता है न मरण बल्कि वह तो हरि में ही विलीन ही जाता है और सीधा सीधा कहें तो सम्पूर्ण महाभारत का सार गीता जी के 18 अध्यायों में है ।

गोसेवा के नए पथ: श्रीमती सुलोचना देवी पाटीदार धर्मपत्नी श्री मांगी लाल जी पाटीदार एडवोकेट इंदौर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के स्थापना दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के आजीवन न्यासी बने ।

आने वाले उत्सव:: गोधाम में नवकार्यक्रम ::- 13 दिसंबर को दवा देवी फाउंडेशन का शुभारंभ और 15 दिसंबर को कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान का प्रकट उत्सव आयोजित होगा।

247 वे दिवस पर चुनरीयात्रा मध्यप्रदेश की ओर से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 247 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के इन्दौर से  श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के आज बने आजीवन न्यासी श्रीमती सुलोचना देवी पाटीदार पत्नी मांगीलाल जी पाटीदार एडवोकेट इन्दौर आगर मालवा जिले की सुसनेर तहसील के डोंगरगांव से श्री रामदयाल  शर्मा के परिवार की और एवं सुसनेर के राधेश्याम  शर्मा, हरिनारायण  शर्मा के परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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