अलौकिक कामधेनु गो अभ्यारणआगर मालवादेशमध्यप्रदेशस्पाट लाइट

“कामधेनु गो अभयारण्य: 12 वर्षों की साधना से विश्व का अद्वितीय गोतीर्थ बनने की ओर”

"राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर स्वामीजी का संदेश: अधिकारों से पहले विचारों का करें उपयोग"
जनमत जागरण @ सुसनेर : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा “गोवंश रक्षा वर्ष” की घोषणा के तहत सुसनेर के पास स्थित श्री कामधेनु गो अभयारण्य में एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 260वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि यह अभयारण्य भारतीय संस्कृति और गोसंवर्धन का अद्वितीय केंद्र है। अभयारण्य की स्थापना 24 दिसंबर 2012 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करकमलों से हुई थी।
यह विश्व का पहला गो अभयारण्य, श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के संरक्षण में, एक वटवृक्ष की तरह बढ़ते हुए मालवा के गोतीर्थ के रूप में स्थापित हो रहा है। स्वामीजी ने पूज्य गुसाई विट्ठलनाथ जी की गोसेवा भावना और उनके जन्मोत्सव का स्मरण करते हुए गोसंरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर लोगों से गोदुग्ध और गो कृषि उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की और सतीश चंद्र दासगुप्ता एवं नारायण देसाई जैसे महान व्यक्तित्वों के कार्यों से प्रेरणा लेने को कहा।


"राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर स्वामीजी का संदेश: अधिकारों से पहले विचारों का करें उपयोग" :: पूज्य स्वामीजी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर देश वासियों से अपील की कि लोग आपको जागृत करने के लिए जागो ग्राहक जागो,, अपने अधिकार का उपयोग करों लेकिन हम कहते है, जागो ग्राहक जागो,अपने विचारों का उपयोग करों , अधिकारों का नहीं । हर कोई अधिकार चाहता है,विचार एवं कर्तव्य का पालन कोई करता नहीं है और सब अधिकारों की आंधी में डूबे पड़े है और आज राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस पर यही कहूंगा कि हमें जिस जिस का उपयोग करना है उसके बारे में जागना चाहिए क्योंकि बाजार कचरे एवं नकली सामान के ढेर से भरा पड़ा है उससे बचकर हमें गो दुग्धान एवं गो कृषि से उत्पन्न अन्न का ही उपयोग कर हमें भारतीय उपभोक्ता बनना चाहिए क्योंकि हमारे अन्दर अच्छा जाएगा तो अन्दर से कुछ अच्छा निकलेगा ।

"तिलक: सनातनी संस्कृति का सतोगुणी चिन्ह और गौरव का प्रतीक" :: पूज्य स्वामीजी ने आज की गोकृपा कथा में तिलक की महिमा के बारे में बताते हुए कहां कि तिलक हमारी सतोगुणी वर्दी है अर्थात जिस प्रकार एक सैनिक के लिए उसकी वर्दी का महत्त्व है और उसको पहनकर वह अपने आप पर गर्व की अनुभूति करता है,उसी प्रकार हर सनातनी के लिए तिलक की महत्ता है और जब उसके ललाट पर तिलक सुशोभित होता है तो उसमें अपने आप सतोगुण आ जाता है ।


⏩ गो कृपा कथा के 260 वें दिवस पर युवराज राठौर डाबी, राणा प्रवीण सिंह पालड़ा, मृत्युंजय सिंह राठौड़ जयपुर , दूले सिंह तंवर , शिवपाल सिंह तंवर , नारायण नाथ, शुभम नाथ नापा खेड़ी (आगर) एवं श्याम लाल व्यास बरडिया लड़ा(झालावाड़)अतिथि उपस्थित रहें ।

260 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के पिड़ावा से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 260 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिड़ावा की महिला मंडल ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!