सुसनेर न्यायालय में लूट प्रकरण का कठोर न्यायिक फैसला: अपराधियों को कारावास और जुर्माना , तीनों आरोपी 5 साल की सजा और जुर्माने से दंडित

जनमत जागरण @ सुसनेर। लूट के गंभीर मामले में माननीय अपर सत्र न्यायालय (श्रीमान पंकज कुमार वर्मा) सुसनेर ने अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए 5-5-5 साल के कारावास और कुल 7,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
मामले का विवरण : घटना 6 सितंबर 2019 को शुरू हुई, जब परिवादी अपने रिश्तेदार के टाटा ट्रक में सीकर रोड, जयपुर से कांच की खाली बोतलें (बारदान) लेकर धार, मध्यप्रदेश जा रहे थे। 7 सितंबर की रात लगभग 8:30 बजे सोयतकलां के पास गुराड़ी बंगला मेवाती ढाबे के पास एक सफेद रंग की स्वीफ्ट डिजायर कार ने ट्रक को ओवरटेक कर रोक लिया। कार में सवार दो बदमाशों ने देशी कट्टे की नोक पर ट्रक चालक और परिवादी को ट्रक के पीछे चलने के लिए मजबूर किया। कुछ दूर चलने के बाद ट्रक का डीजल खत्म हो गया। इसके बाद बदमाशों ने दोनों को ट्रक से नीचे उतारा और अन्य दो बदमाशों के साथ मिलकर उनके पास मौजूद नकदी ₹12,500, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी लूट लिए।
पुलिस कार्रवाई: थाना सोयतकलां में अपराध क्रमांक 167/19 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 392 और आम्र्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक राजीव उइके के नेतृत्व में पुलिस ने जांच पूरी की।
न्यायालय का निर्णय: एजीपी श्री मुकेश जैन चौधरी ने न्यायालय में मजबूत तर्क प्रस्तुत किए। जिसके आधार पर न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया:
1. लखन पिता कालूराम बलाई (23 वर्ष, निवासी ग्राम देवली): धारा 392: 5 वर्ष का कारावास और ₹2,000 जुर्माना। धारा 25 आम्र्स एक्ट: 1 वर्ष का कारावास और ₹1,000 जुर्माना। सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
2. पुष्पराज पिता मोडसिंह भील (24 वर्ष, निवासी ग्राम कल्याणपुरा): धारा 392: 5 वर्ष का कारावास और ₹2,000 जुर्माना।
3. विक्रम पिता देवीलाल मालवीय बलाई (निवासी ग्राम देवली): धारा 392: 5 वर्ष का कारावास और ₹2,000 जुर्माना।
महत्वपूर्ण योगदान: इस मामले में कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक आशीष सोनी, थाना मुंशी आरक्षक बनवारी वर्मा और सहायक ग्रेड 03 कृष्णकांत अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संदेश: यह निर्णय अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि कानून के सामने कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। न्यायालय का यह फैसला समाज में अपराध के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।



