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“बलिदान से बल का उदय: सनातन धर्म के अस्तित्व की रक्षा के लिए स्वामीजी ने दिया मंत्र कहा – गो रक्षा से धर्म रक्षा तक: चार संतानों का संकल्प”

◾गो रक्षा से धर्म रक्षा तक: चार संतानों का ◾संकल्प"अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए चार चार संतान पैदा करें हर सनातनी - स्वामीजी ◾ "सनातन धर्म का आव्हान: अस्तित्व, संतुलन और राष्ट्र रक्षा का संकल्प" 

जनमत जागरण @ सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 262 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज ही के दिन सिखों के 10 वें गुरु गोविन्द सिंह जी के 4 बेटों को मुगल तानाशाह औरंगजेब के सेनापति वजीर खान ने शहीद कर दिया था। चारों बेटों, जिन्हें साहिबजादे भी कहा जाता है, ने धर्म परिवर्तन करने के बजाय बलिदान देना चुना। 26 दिसंबर को साहिबजादों जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को याद किया जाता है, जिनकी उम्र छह और नौ साल थी और उनकी याद में आज पूरा देश वीर बालक दिवस मनाता है । ब्रिटिश काल में एक दीक्षांत समारोह में बंगाल के अंग्रेज कमिश्नर को गोली मारने वाली बहादुर क्रांतिकारी बीना दास जी का निर्वाण , क्रांतिकारी भूपेन्द्रनाथ दत्त एवं संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री रहें गोपी चन्द भार्गव का निर्वाण दिवस एवं पंजाब के संगरूर में सरदार उधम सिंह जी ने आज ही के दिन जन्म लेकर आजादी की लड़ाई के जलियांवाला बाग नरसंहार के उत्तरदायी जनरल डायर को ब्रिटेन के लंदन में जाकर गोली मारी थी।

⏩ स्वामीजी ने कहां कि चारों पुत्रों के बलिदान हो जाने के बाद भी गुरु गोविन्द सिंह झुके नहीं और हम तो सभी भारतीयों से आह्वान करते है कि हम भी गुरु गोविन्द सिंह जी की तरह चार चार संतान पैदा कर एक संतान सनातन धर्म की रक्षा के लिए समर्पित करें हालांकि हमारे नीति निर्धारकों ने हमारे साथ छलावा कर हम दो हमारे दो अथवा एक का नारा देकर हमारे साथ धोका किया है हम उनकी बात तभी माने जब देश के सभी पंथ मजहब के लोग उसका पालन करें और आश्चर्य तो तब होता है कि हमारे नीति निर्धारकों की चाल से एक पंथ विशेष के लोग जो आजादी के समय 2 से 3 प्रतिशत थे आज वे 17 प्रतिशत से ऊपर हो गए है हमें किसी पंथ विशेष से कोई आपत्ति नहीं है आपत्ति है उनके गलत कार्यों से। अगर हिन्दू इसी तरह से घटते रहें तो फिर हमारा सफ़ाया हो जाएगा और ये करके हम हमारे ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहें है,इसलिए जोरावर सिंह, फ़तह सिंह के शहीदी दिवस पर हम आग्रह करते है कि राष्ट्र रक्षा,गो रक्षा के लिए अपनी एक संतान दीजिए जो गृहस्थ रहकर भी इस पवित्र कार्य को कर सकता है ।स्वामीजी ने आगे बताया कि पीड़ा इस बात की है कि देश में पांच लाख साधु, सन्त एवं संन्यासी है उसके बाद भी देश में प्रतिदिन 80 हजार गोवंश प्रतिदिन कट रहा है अर्थात सनातन धर्म का संतत्व,साधुत्व का प्रथम चरण ही गोमाता एवं गोसेवा है उस देश में गौहत्या पर प्रतिबंध न लगे ये इस देश के साधुओं पर कलंक है और इस कलंक को मिटाने के लिए प्रयागराज के महाकुंभ में देश के सभी संतो को भारत सरकार से गो हत्या पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाकर गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए एकजुट होकर दबाव बनाने की आवश्यकता है ।

⏩ आंग्ल वर्ष 2024 की विदाई एवं 2025 की पूर्व संध्या 31 दिसम्बर 2024 मंगलवार को विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में भगवान श्री कृष्ण की नृत्य नाट्य लीलाओ एवं भजन संध्या का आयोजन होगा ।

262 वे दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के देवास जिले  से :: एक वर्षीय गोकृपा कथा के 262 वें दिवस पर चुनरी यात्रा मध्यप्रदेश के देवास जिले में स्थित  श्री देव महाराज गोशाला सात गांवों देहरिया साहु, झीकडा खेड़ा, बरखेड़ा, सोमा ,सादीपूरा ,गोपी गुराडीया, बावल्या, कुलावड के देहरिया साहू से नीरज पाटीदार, बरखेड़ा सोमा से प्रवीण जाट,गोपाल दास, झीकड़ा खेड़ा से अमरलाल यादव,सादीपुरा से लखन पटेल,गोपी गुराडिया से परमानंद जाट, मुकेश पाटीदार, राजेन्द्र सेंधव, कुलावड़ से  रवि रावत, एवं राजस्थान के झुंझनू से ममता शर्मा व माया शर्मा एवं झालावाड़ जिले के लुहारीया ग्राम की महिला मंडल ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए  गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए  चुनरी  लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया  और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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