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बाल दिवस की परिभाषा पर पुनर्मंथन: आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का संगम – “चाचा नेहरू या वीर बाल दिवस: बच्चों के लिए प्रेरणा का सही विकल्प कौन?”

"बाल दिवस का पुनर्विचार: 14 नवंबर बनाम 26 दिसंबर - 

14 नवंबर नेहरू के जन्मदिन पर मनाए जाने वाले बाल दिवस को मनाना बंद करने की आवश्यकता पर विचार करें !!
जनमत जागरण @ आपके लेख:: एक देश में दो बाल दिवस 14 नवंबर एवं 26 दिसंबर को मनाना कितना उचित उचित है? अथवा यूं कहें कि क्या देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस 14 नवंबर को मनाए जाने वाले बाल दिवस मनाना बंद कर देना चाहिए ? प्रश्न और मामला दोनों जटिल है ? जटिल मसले का समाधान ढूंढना जरूरी है, क्योंकि हमारे नन्हे मुन्नों के मन मस्तिष्क में एक अलग तरह का संदेश जाएगा ! बाल मन में किसी भी तरह का संदेह पैदा न हो इस गरज से 14 नवंबर 2025 आने के पहले इस मसले को राजनीतिक, सामाजिक और व्यावहारिक तरीके खोज लेना राष्ट्र व समाज हित में होगा। मेरी तरह देश के अन्य सभी शिक्षक और आमजन भी इस बात से सहमत होंगे कि "यदि बच्चों के बीच में पहले कोई "गलत" बात घर जाए और उसके बाद दूसरी "सही" बात कही जाए तो वह मानने के लिए तैयार नहीं हो होते हैं। विशेषकर उनके शिक्षकों द्वारा कही गई बात।"
असल में हमारे देश में राजनीति इतनी स्वार्थी, निकृष्ट, दृष्टिहीन, समाज को भ्रमित तरीके से हो रही है कि आम जनता के लिए समझना कठिन हो रहा है।
और फिर बाल दिवस तो बच्चों के त्योहार से संबंधित है। बच्चे 14 नवंबर या 26 दिसंबर में से किसको "असली " बाल दिवस के रूप में समझे और मनाएं। इधर, दुर्भाग्य से राजनीतिक पार्टियां, विशेषकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस आदि; 14 नवंबर को चाचा नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस नहीं मनाने को लेकर एक अलग तरीके का देश -विदेश में राजनीतिक परिदृश्य उपस्थित करेंगे !! और आदतन बच्चों में गौरव के भाव जागृत करने वाले "26 दिसंबर 1705 को बाबा जोरावर सिंह, अजीत सिंह , जुझार सिंहऔर बाबा फतेह सिंह की शहादत से धर्म रक्षा और राष्ट्र रक्षा के लिए हंसते-हंसते शीश न्योछावर कर देना" बालदिवस दिन पर मिलने वाली शिक्षा से वंचित रह जाएंगे !!
देश, समाज और राजनीतिज्ञों के सामने असलियत उजागर करने की गरज से यहां चाचा नेहरू के 14 नवंबर जन्मदिवस पर मनाए जाने वाले बाल दिवस और 26 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह के बच्चों की शहादत के दिवस में मनाए जाने वाले बालवीर दिवस की तुलनात्मक समीक्षा की जा रही है ताकि देश की जनता समझ सके की उचित क्या है!!
👉जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के पश्चात 1964 में तात्कालिक शिक्षा मंत्री सी एम छागला ने पार्लियामेंट में एक प्रस्ताव पारित कर उनके जन्मदिन 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। बाल दिवस मनाने के पक्ष में तर्क यह दिया गया कि "जवाहरलाल नेहरू बच्चों से बहुत प्यार करते थे और जहां भी जाते थे बच्चों से मिलते जुलते थे। एक बार किसी सभा में एक गुब्बारे वाला किसी ऊंचाई पर चढ़कर के नेहरू जी को देख रहा था और उसके गुब्बारे उड़ रहे थे ।जवाहरलाल नेहरु ने गुब्बारे वाले को बुलाया और सारे गुब्बारे बच्चों को बांट दिया और इस तरह उनको लोग चाचा नेहरु कहने लगे। एक उल्लेख यह भी मिलता है कि चाचा नेहरू ने एक सभा में बच्चों को देश का भविष्य और समाज की नींव बताते हुए कहा था कि "आज के बच्चे कल का भविष्य बनेंगे।" इससे ज्यादा पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चों के प्रिय होने के तथ्य नहीं मिलते हैं !!
👉कहीं पर भी यह उल्लेख नहीं मिलता है कि नेहरू जी को किसी अन्य महापुरुष द्वारा 'चाचा' की उपाधि दी गई हो । कहते हैं कि नेहरू जी सबके "देवर" बने रहना चाहते थे। इस वजह से उन्होंने खुद ही अपने आप को देश का 'चाचा" सिद्ध करने का ताउम्र कृत्य किया। इस तरह जवाहरलाल "चाचा" नेहरू बने और बच्चों के प्रिय हो गए? जवाहरलाल नेहरू के द्वारा 'बच्चों के हित' में किए गए कार्यों का उनके प्रधानमंत्रीत्व काल में कहीं भी विशेष उल्लेख नहीं मिलता है।
हां, अलबत्ता कुछ ऐतिहासिक तथ्य ऐसे सामने आ रहे हैं जिनके सार्वजनिक होने पर बच्चे नेहरू को चाचा के नाम से नहीं पुकारेंगे !!तात्कालीन उत्तर प्रदेश से प्रकाशित पत्रिका में चंद्रशेखर आजाद के भतीजे सुजीत आजाद का आरोप लगाया था। जिसमें एक दुखदाई उल्लेख यह मिलता है कि 26 फरवरी 1931 को इलाहाबाद में नेहरू जी ने चंद्रशेखर आजाद और उनके साथी जब आर्थिक सहयोग मांगने उनके पास गए थे, तब उन्होंने कहा था - 'अभी आप अल्फ्रेड पार्क जाओ। वह मेरा बंदा 3:00 बजे तुम्हारे पास आवश्यक धनराशि लेकर पहुंच जाएगा"। और हम सब जानते हैं कि मोल श्री के पेड़ के पास आजादी के परवाने ''आजाद" अंग्रेजों की गोलियों से शहीद हो गए !! एक तथ्य यह भी सामने आता है कि किसी अवसर पर नेहरू जी ने चंद्रशेखर आजाद को *आतंकवादी संगठन का मुखिया" कहा था। नेहरू जी सिंगापुर के रफेल होटल के लाउंज में लार्ड माउंटेन के साथ रुकते थे और उनकी दाढ़ी बनाते थे। लेडी माउंटबेटन के साथ उनके संबंध जग जाहिर है । यह भी किसी से छुपा नहीं है कि चाचा नेहरू विलासिता से भरपूर जीवन जीते थे। उन्होंने अपने आप को देश का सर्वश्रेष्ठ सेवक साबित करने के लिए अपनी राख और अस्तियों को हेलीकॉप्टर से समुचित देश के खेतों एवं हिमालय पर छिड़कने की इच्छा जाहिर की थी और ऐसा हुआ भी!!
👉 अब कुछ तथ्य उनके नाम से देश में संस्थानों के नाम रखे गए हैं। इसकी जानकारी भी जनसाधारण के संज्ञान में ला दी जाए तो कोई हर्ज नहीं होगा। उनके प्रधानमंत्री काल और उसके बाद लगभग 600 सरकारी योजनाएं जवाहरलाल नेहरू के नाम पर चल रही है। 22 शैक्षणिक संस्थान और विश्वविद्यालय उनके नाम पर है। 51 अवार्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम से विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाते हैं। 74 सड़कों का नाम जवाहरलाल नेहरू के नाम पर हैं। 39 चिकित्सा शिक्षा संस्थान और अस्पताल का नामांकरण भी जवाहरलाल नेहरू के नाम से हैं। पता नहीं पंडित नेहरू की खेल में कितनी रूचि थी, लेकिन देश में उनके नाम पर 16 स्टेडियम हैं और एक मुंबई के पास पोर्ट तथा देश में 2 एयरपोर्ट के नाम भी जवाहरलाल नेहरू के नाम पर हैं। आरटीई से उजागर हुआ है कि नवोदय का नाम भी बाद में जवाहर नवोदय रख दिया गया है।
🙏 अब देश के सामने दूसरा पक्ष भी रखना यथोचित है कि 26 दिसंबर को क्यों बाल दिवस के रूप में मनाया जाए? दसवें सिख गुरु गोविंद सिंह जी और चारों बेटों- जोरावर सिंह, फतेह सिंह, अजीत सिंह और जुझार सिंह अपने धर्म की रक्षा हेतु मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था, की शहादत और श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 वर्ष पहले प्रकाश पर्व के अवसर पर की थी और 26 दिसंबर 2022 को पहला वीर बाल दिवस पूरे भारत में मनाया गया। मुख्य समारोह दिल्ली में संपन्न हुआ और प्रधानमंत्री उसमें शिरकत की ।
👏एक प्रबुद्ध नागरिक होने के नाते हम सब का कर्तव्य है कि आजादी के पहले और आजादी के बाद कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने निहायत गोपनीय तरीके से भारत और भारतीय जनता की राष्ट्रभक्ति को उजागर होने से रोका गया। उसको आज की युवा पीढ़ी के सामने लाएं। भारत माता के वैभव को अमरता प्रदान करने के लिए बच्चों के बीच में सही तथ्य रखें। और अधिक अनर्थ होने से राष्ट्र और हमारे बच्चों को बचाएं। राजनीति से परे वर्तमान लोकसभा और राज्यसभा के सम्माननीय सदस्यों (विपक्ष और पक्ष) को यह सलाह दी जाती है कि सिख गुरु गोविंद सिंह जी और उनके चारों बेटों- जोरावर सिंह, फतेह सिंह, अजीत सिंह और जुझार सिंह अपने धर्म की रक्षा हेतु मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया । ऐसे धीर, गंभीर ,वीर पुत्र दृढ़ता के प्रतीक और धर्म ध्वजा की रक्षा की इच्छा रखने वाले अल्पायु में ही मुगल के आतंक के सामने न झुकते हुए इस्लाम धर्म स्वीकार करने से मना कर दिया और अपने आप को दीवारों में चुनना पसंद किया। जुझार सिंह और अजीत सिंह अपने पिता के साथ धर्म के खातिर लड़ते हुए जान की कुर्बानी दे दी। उनकी वीरता और शहादत की याद में वीर बाल दिवस 26 दिसंबर को मनाना यथोचित होगा। क्योंकि इन चारों बाल वीरों की वीर गाथा, अदम्य साहस और धर्म की रक्षा की प्रतिज्ञा से देश के नवयुवकों में एक अलग तरीके का राष्ट्रवादी की विचारधारा का प्रस्फुटन होता रहेगा। बच्चे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म ध्वजा फहराने का हौसला दिखाएंगे। वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस पर बच्चे उनके द्वारा विलासिता का जो जीवन जीया गया और एक राजनेता के रूप में सुभाष चंद्र बोस, डॉ भीमराव अम्बेडकर और चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों को उचित सम्मान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू ने लोह पुरुष सरदार पटेल को कई जगह अपमानित करना तथा गुजरात के सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं करने देना तथा 1962 में हमारे वीर सैनिकों द्वारा चीन की भूमि को वापस कर देना। माउंटबेटन और अंग्रेजी मित्रों के साथ घनिष्ठ संबंध रखना तथा देश के बंटवारे को सहर्ष स्वीकार कर लेना जैसी जैसी मानसिकता रखने वाले नेहरू से क्या सीखेंगे !! इस पर आजादी के अमृत काल में संसद के दोनों सदनों में विचार करें। अब नेहरू और उनके परिवार के लोग बेनकाब हो चुके हैं। नेहरू परिवार की जानकारी उजागर होने पर बच्चों में किसी प्रकार की प्रेरणा नहीं मिलेगी !! देशवासियों ! स्मरण रहे, इतिहास में की गई गलती से सबक सीखना चाहिए! रूस की क्रांति के सूत्रधार लेलिन की अमान्य विचारों और नीतियों का जब सैकड़ों वर्ष बाद नई पीढ़ी को पता चला तो उन्होंने समाधि को उखाड़ कर फेंक दिया !!
👉 शायद इसी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए हमारे भाग्य निर्माताओं ने बहुत ही सोच समझ कर "सत्यमेव जयते" को भारत का अभ्युदय माना है !!
डॉ बालाराम परमार' हॅ़समुख'

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