“गुड़ में गड़बड़: जिम्मेदार कौन? सील, सैंपल और सस्पेंस की कहानी”

जनमत जागरण @ सुसनेर से दीपक जैन “विश्लेषणात्मक ग्राउंड रिपोर्ट :: जिले में मिठास की मिठाई की जगह अब सवालों की कड़वाहट घोलने वाला गुड़ चर्चा का विषय बन चुका है । जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी केएल कुंभकार ने तिरुपति ट्रेडर्स के गोदाम पर 28 दिसंबर को छापा मारा और 30 क्विंटल रिसायकल किया जा रहा गुड़ नष्ट किया, तो हर कोई राहत की सांस ले रहा था। लेकिन दो महीने बाद भी जांच रिपोर्ट का इंतजार क्यों हो रहा है, यह रहस्य बरकरार है। आपको बता दें कि 26 दिसंबर को एक ही परिवार के सात सदस्य, गुड़ से बनी खाद्य सामग्री का सेवन करने के बाद पेट दर्द और उल्टी की शिकायत से ग्रसित हो गए थे ।
🔲 जिम्मेदार कौन? :: जब खुद खाद्य अधिकारी जानते थे कि गुड़ खराब है और उसे रिसायकल करके सप्लाई किया जा रहा है, तो पहले ही कदम क्यों नहीं उठाए गए? क्या दुकानदारों में पहले से सप्लाई हुए गुड़ को रोकना इनकी जिम्मेदारी नहीं थी? क्या जिले के उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने का अधिकार इनको मिला हुआ है?
🔲 लापरवाही का गुड़ का स्वाद : तिरुपति ट्रेडर्स के गोदाम से अक्टूबर में भी नमूने लिए गए थे। नियमानुसार, इनकी रिपोर्ट 15 दिनों में आनी चाहिए थी। अब दिसंबर आ गया है, लेकिन रिपोर्ट अभी भी कोसों दूर है। सवाल उठता है कि क्या रिपोर्ट कहीं दफ्तरों के फाइलों में दबी हुई है, या जानबूझकर देरी की जा रही है?
🔲 सालों से चल रहा कारोबार : सब जानते हैं, कोई मानता नहीं -- गुड़ रिसायकल करने का यह कारोबार किसी एक दिन का मामला नहीं है। आरोप है कि जिले में वर्षों से यह खेल खाद्य विभाग की “मौन स्वीकृति” के साथ चल रहा है। अगर तिरुपति ट्रेडर्स के बिलों की जांच की जाए तो साफ हो जाएगा कि यह गुड़ किन-किन दुकानदारों तक पहुंचा है। लेकिन क्या सच में विभाग की नीयत इस ओर ध्यान देने की है, या बस छापेमारी की रस्म अदायगी करनी है?

👉 "गुड़" का खेल, "गड़बड़" का मेल :: अब सवाल यह है कि क्या ये लापरवाही महज एक संयोग है, या एक सुनियोजित षड्यंत्र? आखिरकार, गुड़ का यह खेल मिठास कम, बल्कि कड़वाहट ज्यादा घोल रहा है। अगर इसी तरह जांच रिपोर्ट आती रही और कार्रवाई कछुए की रफ्तार से होती रही, तो अगली बार शायद गुड़ नहीं, कोई और खाद्य सामग्री खबरों में होगी। आखिर कब जागेगा खाद्य विभाग?
▪️ वर्जन – ” तिरुपति ट्रेडर्स के गोदाम में खराब गुड़ को बाजार में सप्लाई करने की योजना से रिसायकल किया जा रहा था। जिसको सप्लाई होने से पहले ही नष्ट कर सील करने की कारवाई की गई है। इसके पहले भी इस गोदाम से 30 अक्टूबर को नमूने लेकर गुड़ को नष्ट कराया था। जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है। खुला परिसर होने के कारण सील नही किया गया था। हमारे द्वारा नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं रिपोर्ट आने पर वसुली की कार्रवाई होती है। इस बार भी जांच आने पर कारवाई जरुर होंगी। “ – के एल कुम्भकार , खाद्य एवं औषधि विभाग आगर मालवा



