शिक्षा और समाजसेवा के प्रकाशपुंज 95 वर्षीय लक्ष्मीनारायण बैरागी नहीं रहे – शिक्षा-संस्कार और धर्म की त्रिवेणी हुए विदा”

“शिक्षा के दीप जलाकर, ज्ञान का प्रकाश दिया,
संस्कारों की वाणी से, हर हृदय को स्पर्श किया।
समाज सेवा में रत रहे, धर्म का सम्मान किया,
लक्ष्मीनारायण जी जैसे नर, युगों तक अमर रहेंगे।”
📍 जनमत जागरण @सोयतकलां। समीपस्थ ग्राम साल्याखेड़ी के वरिष्ठ शिक्षाविद्, समाजसेवी और धर्मपरायण व्यक्तित्व लक्ष्मीनारायण बैरागी का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से शिक्षा, समाज और आध्यात्मिक चेतना का एक सशक्त स्तंभ टूट गया, जिसकी रिक्तता सदियों तक अनुभव की जाएगी।
📚 शिक्षा क्षेत्र में उनका अनुपम योगदान
🎓 वर्ष 1996 में साल्याखेड़ी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त होने तक उन्होंने शिक्षा की लौ को निरंतर प्रज्वलित रखा। उनके मार्गदर्शन में असंख्य विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को संवारने का अवसर पाया। उनके स्नेहपूर्ण, अनुशासनप्रिय और प्रेरणादायक शिक्षण ने विद्यार्थियों को न केवल विद्वान, बल्कि संस्कारी नागरिक भी बनाया।
🌿 समाज सेवा में अग्रणी भूमिका
⚜️ बैरागी जी शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा में भी सदैव अग्रणी रहे।
⚜️ वैष्णव बैरागी समाज में निःशुल्क विवाह सम्मेलनों के आयोजन से उन्होंने समाज को नई दिशा दी।
⚜️ 35 वर्षों तक श्री द्वारकाधीश मंदिर में पुजारी के रूप में अपनी निःस्वार्थ सेवाएं प्रदान कीं।
⚜️ शिव टेगरी मंदिर के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा।
⚜️ इसके अतिरिक्त, सोयतकलां में निर्मित हो रहे चौसठ माता मंदिर में भी उन्होंने पूर्ण समर्पण के साथ सहयोग किया।
🕊️ अंतिम विदाई – श्रद्धा और अश्रुपूरित स्मरण
📅 3 अप्रैल, गुरुवार को साल्याखेड़ी में उनकी अंत्येष्टि संपन्न हुई। समाजजन, रिश्तेदार और ग्रामवासियों ने भारी संख्या में उपस्थित होकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बन गया।
👨👩👦 परिवार एवं विरासत
👴 बैरागी जी के ज्येष्ठ पुत्र घनश्याम बैरागी (सेवानिवृत्त पोस्टमैन) एवं कनिष्ठ पुत्र मुकेश बैरागी (शिक्षक) अपने पूज्य पिता के निधन से शोकाकुल हैं।
👨⚖️ उनके पौत्र राजेश बैरागी, जो वर्तमान में सोयत कलां नगर परिषद में उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं, अपने दादा की समाजसेवी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
💐 जनमत जागरण : भावपूर्ण श्रद्धांजलि!
लक्ष्मीनारायण बैरागी जी का जीवन समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा। उनका योगदान, सेवा और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। आने वाली पीढ़ियां भी उनके कार्यों को सम्मान और प्रेरणा की दृष्टि से देखेंगी।
“युग बदलेगा, समय बदलेगा, पर उनका नाम रहेगा,
शिक्षा और सेवा का दीप, अनंत युगों तक प्रज्ज्वलित रहेगा!”



