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शांति के स्थान पर बेचैनी – मुक्तिधाम में मधुमक्खियों का डेरा, डर से नदी किनारे हो रहे अंतिम संस्कार


विदाई की राह में बाधा : मधुमक्खियों के डर से नदी किनारे हो रहे अंतिम संस्कार

अब किसकी ज़िम्मेदारी ? नगरवासी बोले – समाधान जरूरी

जनमत जागरण @ सोयतकलां।
जहां अपनों को अंतिम विदाई दी जाती है, वहां भय और असुरक्षा का डेरा हो, तो यह केवल चिंता नहीं, संवेदना की अनदेखी है। सोयत नगर के मुक्तिधाम में बीते कुछ महीनों से मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता बना हुआ है, जो अंतिम संस्कार के समय बाधा और भय दोनों का कारण बन रहा है।

शनिवार को नगर के वरिष्ठ नागरिक राधेश्याम टेलर और पन्नालाल कुशवाह पटेल का स्वर्गवास हुआ। जब परिजन मुक्तिधाम पहुंचे तो पीपल के पेड़ पर लगे मधुमक्खी के छत्ते के कारण उन्हें अंततः अंतिम संस्कार नदी किनारे करना पड़ा। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक रही, बल्कि नगरवासियों के बीच चिंता का विषय भी बन गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मधुमक्खी का छत्ता पिछले तीन-चार महीनों से बना हुआ है और अब तक 7-8 बार अंतिम संस्कार के समय लोगों पर हमला कर चुका है। कई लोग घायल भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पहले अंतिम संस्कार नदी के किनारे ही हुआ करते थे, लेकिन जब से मुक्तिधाम परिसर का निर्माण हुआ है, लोग वहां अंतिम संस्कार करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानते हैं। मुक्तिधाम में बैठने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जबकि नदी किनारे ऐसी कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में मधुमक्खियों की समस्या के कारण नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

नगरवासियों की मांग और सुझाव:

  • मधुमक्खी के छत्ते को सुरक्षित ढंग से हटाया जाए।
  • मुक्तिधाम की नियमित सफाई व निरीक्षण की व्यवस्था हो।
  • प्रशासन इस विषय को प्राथमिकता देकर स्थायी समाधान निकाले।

यह केवल एक अव्यवस्था नहीं, बल्कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील प्रक्रिया से जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है।


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