“क्या आप सही तरीके से साँस ले रहे हैं? जानिए राजीव दीक्षित के विचार – गलत श्वास से कैसे आते हैं रोग”

स्वास्थ्य संकल्प – 365 दिन –भाग 4 : श्वास – जीवन का सबसे अनदेखा विज्ञान
(राजीव दीक्षित जी के विचारों पर आधारित एक जागरण लेख)
“श्वास है, तभी जीवन है। लेकिन श्वास कैसे लें, यह हमें किसी विद्यालय में नहीं सिखाया गया।”
राजीव दीक्षित जी के स्वास्थ्य ज्ञान में ‘साँस’ का विषय उतना ही केंद्रीय था, जितना भोजन और पानी का। वे कहते थे –
“99% लोग गलत साँस लेते हैं, इसलिए बीमार रहते हैं।”
हम साँस कैसे लेते हैं – और क्यों वह हमें बीमार कर देता है?
हम में से अधिकतर लोग छाती से सांस लेते हैं – तेज, छोटी और ऊपरी। जबकि प्राकृतिक और स्वस्थ श्वास पेट से गहरी, धीमी और लयबद्ध होनी चाहिए।
छाती से श्वास लेना तनाव, चिंता और थकावट का संकेत है। पेट से श्वास लेना शांति, स्थिरता और ऊर्जा का द्वार है।
प्राणायाम नहीं, ‘प्राकृतिक श्वास’ पहले सीखो
राजीव जी का मानना था कि जब तक हम स्वाभाविक लंबी साँस लेना नहीं सीखते, तब तक प्राणायाम भी अधूरा है।
उन्होंने तीन बातें स्पष्ट कही थीं:
- सुबह सूर्योदय से पहले शुद्ध वायु में खुलकर साँस लो
- मोबाइल या स्क्रीन पर लगातार रहते हुए श्वास पर ध्यान दो – क्या वह टूट रही है?
- दिन में कम से कम 3 बार 10 गहरी साँसें लो – पूरे पेट को फूलाओ और सिकोड़ो
श्वास का विज्ञान : रोगों से मुक्ति का मूलमंत्र
- गहरी साँस फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है
- श्वास की लय मस्तिष्क को तनावमुक्त करती है
- नासिका से श्वास लेने की परंपरा शरीर को ठंडक देती है, मुँह से श्वास लेने की आदत रोगों का प्रवेश द्वार है
राजीव जी ने कहा था –
“साँस लेने का सही तरीका ही जीवन की सही दिशा तय करता है।”
सार्थक चिंतन
हमने भोजन को देखा, पानी को परखा – लेकिन क्या कभी साँस पर ध्यान दिया?
यह वह अमूल्य अमृत है जो बिना मूल्य, बिना सीमा हमें हर पल मिल रहा है। बस उसे सही ढंग से लेना सीखना होगा।
जीवन का असली विज्ञान – श्वास में ही छिपा है।
ब्रांडिंग | जनमत जागरण की विशेष प्रस्तुति
यह लेख जनमत जागरण न्यूज़ पोर्टल की विशेष श्रंखला “स्वास्थ्य संकल्प – 365 दिन” के अंतर्गत प्रकाशित हो रहा है।
लेख सम्पादन : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
डिस्क्लेमर:
यह लेख शोध, परंपरा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य अनुभवों पर आधारित है। किसी विशेष श्वसन या हृदय रोग की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।



