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“लैंड पूलिंग एक्ट, सोलर योजना और ऋण राहत पर सरकार का बड़ा कदम – किसान संगठनों के साथ मुख्यमंत्री ने की 2 घंटे की संवादात्मक बैठक”


मुख्यमंत्री निवास पर नीति संवाद: किसानों के हित में लैंड पूलिंग एक्ट, सोलर योजना और ऋण राहत पर हुई व्यापक चर्चा

जनमत जागरण @भोपाल। प्रदेश के किसानों की भावनाओं और भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर संपन्न हुआ। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय किसान संघ की प्रदेश कार्यकारिणी एवं विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों ने सहभागिता की।

बैठक में ग्राम एवं नगरीय निवेश, विशेष रूप से लैंड पूलिंग एक्ट को लेकर विस्तारपूर्वक विमर्श हुआ। संबंधित अधिकारियों ने अधिनियम की बारीकियों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह कोई बाध्यकारी कानून नहीं, बल्कि किसानों के लिए वैकल्पिक भागीदारी मॉडल है। इसके अंतर्गत:

  • यह अधिनियम केवल 500 करोड़ से अधिक के परियोजनाओं पर लागू होगा।
  • 80% किसानों की सहमति के बाद ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
  • किसानों को अधिग्रहित भूमि का 50% हिस्सा पूर्ण विकसित रूप में पुनः सौंपा जाएगा, जिसे वह चाहे तो उपयोग करें या विक्रय करें।
  • साथ ही, किसानों को चाहें तो मौजूदा भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत पारंपरिक मुआवजा लेने का भी विकल्प रहेगा।

भारतीय किसान संघ की ओर से अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर शासन को व्यापक सुझाव एवं शंकाएं प्रस्तुत की गईं, जिन पर सकारात्मक चर्चा हुई।


ऋण राहत एवं सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर सुझाव

बैठक में किसान संघ ने सोसायटी ऋण जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने का आग्रह किया। शासन की ओर से बताया गया कि प्रदेश के 90% किसानों ने 31 मार्च तक ऋण चुकता कर दिया है, शेष किसान शीघ्र जमा करें, सरकार उनके ब्याज का भुगतान स्वयं करेगी।

साथ ही संघ ने सुझाव दिया कि सहकारी ऋण की वसूली वर्ष में दो बार के बजाय एक बार की जाए, जिससे किसान आर्थिक दबाव से मुक्त हो सकें। मुख्यमंत्री जी ने इस सुझाव पर सैद्धांतिक सहमति प्रकट की।


सौर ऊर्जा योजना में नई क्रांति

बैठक में विद्युत सचिव द्वारा बताया गया कि इस वर्ष 3 लाख किसानों को सोलर पंप कनेक्शन दिए जाएंगे। अब तक 16,000 से अधिक पंजीयन हो चुके हैं। योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • 90% तक सब्सिडी
  • 3 हॉर्स पावर पंप – ₹10,480
  • 5 HP – ₹30,300
  • 7.5 HP – ₹41,000
  • 10 HP – ₹58,000

यह योजना दूरदराज क्षेत्रों में बिजली से वंचित किसानों को सिंचाई की आज़ादी और बिजली बिलों से राहत प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने किसानों से अधिक से अधिक संख्या में पंजीयन करने का आव्हान किया ताकि हर पात्र किसान इस सुविधा से लाभान्वित हो सके।


दो घंटे तक चला संवाद: नीतियों से भरोसा, योजनाओं से समाधान

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी श्री राजेन्द्र पालीवाल ने बैठक के पश्चात जानकारी दी कि दो घंटे तक चली इस बैठक में कृषि, ऋण, भूमि और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने किसानों के सुझावों को गंभीरता से सुना और उचित कार्यवाही का आश्वासन भी दिया।


इस बैठक को केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि किसानों की नीति निर्माण में सक्रिय भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। शासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच इस संवाद ने विश्वास, पारदर्शिता और समाधान की नई राह खोली है – जो आने वाले समय में किसान सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।


सार्थक चिंतन

नीति तब ही सार्थक होती है, जब उसमें जन की भागीदारी और जन की पीड़ा की पहचान हो।
मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव की अध्यक्षता में संपन्न यह बैठक न केवल प्रशासनिक संवाद थी, बल्कि किसानों के साथ सरकार के रिश्तों में एक नए भरोसे की नींव भी थी। लैंड पूलिंग एक्ट को विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना यह दर्शाता है कि सरकार अब किसान को केवल भूमि का दाता नहीं, बल्कि विकास का भागीदार मान रही है।

साथ ही सौर ऊर्जा योजना, ऋण राहत की लचीलापन भरी पहल और सहकारी ऋण व्यवस्था में सुधार की स्वीकृति – यह सब इस बात की पुष्टि करते हैं कि शासन अब परामर्श आधारित निर्णयों की दिशा में बढ़ रहा है।

परंतु यह भी आवश्यक है कि नीतियों की ज़मीन पर प्रभावशीलता उतनी ही ठोस हो जितना कि संवाद में उत्साह। प्रत्येक योजना तब ही सफल होगी जब उसकी जानकारी हर किसान तक पहुँचे, उसका आवेदन सरल हो और क्रियान्वयन में पारदर्शिता हो।

यह संवाद एक शुरुआत है – एक ऐसी शुरुआत, जहाँ किसान की बात केवल सुनी नहीं जा रही, बल्कि समझी भी जा रही है। यही ‘जनमत’ का जागरण है। यही ‘सार्थक संवाद’ है

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