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प्रेम ही धर्म है, यही श्रीराम का संदेश है – कमलेश शास्त्री | पहलगाम की घटना पर दिया दो टूक वक्तव्य


सालरिया में रामकथा के तीसरे दिन उठा प्रेम और राष्ट्रधर्म का स्वर

कमलेश भाई शास्त्री बोले – आतंकवाद का भी धर्म होता है, पहलगाम की घटना ने कर दिया स्पष्ट

जनमत जागरण @ सुसनेर/25 अप्रैल। जनपद सुसनेर की ग्राम पंचायत सालरिया में आयोजित नव निर्मित शनिदेव एवं नवग्रह मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन क्रांतिकारी कथा प्रवक्ता कमलेश भाई शास्त्री (वागड़) ने कथा के माध्यम से प्रेम, राष्ट्रधर्म और सामाजिक एकता पर ओजस्वी वक्तव्य दिया।

श्रीरामचरितमानस से प्रेम का संदेश
शास्त्रीजी ने कहा – “वर्तमान समाज को ज्ञान से अधिक प्रेम की आवश्यकता है। ज्ञान से अहंकार संभव है, लेकिन प्रेम में अहंकार नहीं होता। तुलसीदासजी की चौपाई ‘राम ही केवल प्रेम पियारा’ के माध्यम से स्पष्ट है कि प्रभु को सबसे प्रिय प्रेमी भक्त होता है।”

उन्होंने कहा कि – “भगवान को प्रेम से पुकारिए, मांगने की प्रवृत्ति भिखारी की होती है। रावण ने भी वैर का सम्बन्ध बनाया, फिर भी भगवान ने उसे तार दिया। इस युग में राम को केवल प्रेम चाहिए, द्वेष नहीं।”

जाति-धर्म नहीं, भारत को जोड़ना है मिशन
शास्त्रीजी ने आगे कहा – “मेरा कोई जाति या वर्ण से बंधा स्वभाव नहीं है, मेरा मिशन है भारत को जोड़ना। इस देश का मुसलमान भी मेरा भाई है, बशर्ते वह देश से प्रेम करे और देश विरोधी ताक़तों का साथ न दे।”

पहलगाम घटना पर तीखी प्रतिक्रिया
शास्त्रीजी ने पहलगाम की घटना का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कहा – “पहले कहा जाता था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन अब आतंकियों का धर्म वही है जो हिन्दुओं की पहचान पूछकर उन्हें मारते हैं। यह अधर्म है और इसका नाश होना चाहिए।”

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि – “ऐसे उपद्रवियों और उनके संरक्षकों पर ऐसी कार्यवाही की जाए कि उनकी सात पीढ़ियां याद रखें। प्रेम जहां नहीं होता, वहां हिंसा होती है। देश का मुसलमान अगर अब्दुल कलाम की तरह राष्ट्रप्रेमी बन जाए, तो पूरा देश उन्हें सलाम करेगा।”

“राम को न मानना अपराध नहीं, लेकिन रामभक्तों को मारना पाप है” – इस वाक्य के साथ शास्त्रीजी ने अपना भाषण समाप्त किया और समाज से प्रेम, एकता और देशभक्ति का आह्वान किया।


मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के तहत यज्ञ व संस्कार सम्पन्न

प्रातः 8 से 11 बजे और सायं 4 से 6 बजे तक दो पारियों में 21 कुंडीय शिव-शक्ति महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञाचार्य पं. केदारदत्त व्यास (हिम्मतगढ़, राजस्थान) और उपाचार्य पं. मांगीलाल व्यास (सरखेड़ी, राजस्थान) के सान्निध्य में मूर्ति संस्कार, अभिषेक एवं हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न हुए।

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