मध्यप्रदेशआगर मालवास्पेशल रिपोर्ट

स्पेशल रिपोर्ट: एक देश, एक चुनाव की बात करने वाली बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव अधूरे ,आगर जिले में 6 मंडलों के अध्यक्ष घोषित नहीं, जिलाध्यक्ष ने क्या दी सफाई?

जनमत जागरण @सुसनेर।
“एक देश, एक चुनाव” की पैरवी करने वाली भारतीय जनता पार्टी अपने ही संगठनात्मक चुनाव समय पर नहीं कर पाई है। आगर जिले के 14 में से 6 मंडलों के अध्यक्षों की घोषणा अब तक नहीं हो सकी है। इस पर भाजपा जिलाध्यक्ष ओम मालवीय ने प्रतिक्रिया दी है और बताया है कि अब घोषणा प्रदेश अध्यक्ष तय होने के बाद ही होगी।

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक चुनाव जनवरी 2025 तक पूरे किए जाने थे, लेकिन आगर जिले में आधे दर्जन मंडलों के अध्यक्षों की घोषणा अब तक लंबित है। इनमें सुसनेर विधानसभा के सुसनेर, सोयत, नलखेड़ा, बड़ागांव सहित 4 मंडल शामिल हैं।

कुल 14 मंडलों में से 9 – आगर ग्रामीण, बडौद, मदकोटा, बिजानगर, तनोड़िया, कानड़, मोड़ी, धरोला, मोहना – में अध्यक्षों के नाम घोषित किए जा चुके हैं। कानड़ मंडल में तो नाम की घोषणा के बाद बदलाव भी किया गया है। लेकिन अन्य मंडलों में अब तक नाम तय नहीं हुए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस है।


स्थानीय विसंगति विशेष :

सुसनेर मंडल को विभाजित कर बनाए गए नए मोड़ी मंडल में परिसीमन के तहत परसुलिया शक्ति केंद्र को सुसनेर और पटपड़ा शक्ति केंद्र को मोड़ी में शामिल किया गया। लेकिन मोड़ी मंडल अध्यक्ष की कार्यकारिणी में परसुलिया केंद्र के पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जिससे हास्यास्पद स्थिति बनी है – जहां बूथ अध्यक्षों ने जिस मंडल के लिए रायशुमारी की, उनका मंडल ही बदल गया।


जिलाध्यक्ष ओम मालवीय का बयान:

“जिले में शेष बचे मण्डल अध्यक्षों के नामों की घोषणा में कोई देरी नहीं है। घोषणा प्रदेश अध्यक्ष तय होने के बाद होंगी। फिर भी मैं संभाग प्रभारी जी से बात करता हूं, यदि अनुमति मिलती है तो वरिष्ठजनों से चर्चा कर नाम भेजे जाएंगे।
जहां तक परिसीमन का सवाल है, वहां दूरी का मसला था। कार्यकर्ताओं का मन इसी मंडल में रहने का था, इसलिए ऐसा किया गया होगा।”
ओम मालवीय, जिलाध्यक्ष भाजपा आगर-मालवा


विशेष टिप्पणी : जब संगठनात्मक संरचना और चुनाव समय पर न हो सकें, तो नीचे तक ऊर्जा और स्पष्टता प्रभावित होती है। जिलाध्यक्ष का बयान स्थिति को स्पष्ट करता है, लेकिन लंबे समय से मंडल प्रमुखों की प्रतीक्षा कर रहे कार्यकर्ताओं की आशाएं अब किसी ठोस कदम की बाट जोह रही हैं।


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