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मजदूर दिवस : पत्रकारों ने उठाई आवाज: मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून व 21 सूत्रीय मांगों के लिए सौंपा ज्ञापन


पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और योजनाओं में भागीदारी जरूरी
मजदूर दिवस पर श्रमजीवी पत्रकारों ने 21 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

जनमत जागरण @आगर-मालवा/सुसनेर से दीपक जैन की रिपोर्ट।
पत्रकार केवल कलम चलाने वाले नहीं, वे समाज के सबसे संवेदनशील और उत्तरदायी श्रमिक हैं—जो व्यवस्था की रीढ़ होते हुए भी अक्सर उपेक्षा के शिकार रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ ने पत्रकारों की दशा और दिशा को लेकर एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री के नाम 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को सौंपा।

यह अभियान प्रांताध्यक्ष श्री शलभ भदौरिया के निर्देशन में, आगर जिलाध्यक्ष श्री अशोक गुर्जर के नेतृत्व में जिले के सभी ब्लॉकों के पत्रकारों द्वारा सामूहिक रूप से चलाया गया। ज्ञापन वाचन जिला महासचिव अरुण फुलेरा ने किया, जबकि आभार आगर ब्लॉक अध्यक्ष दिलीप जैन ने व्यक्त किया।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें:
पत्रकारों ने स्मरण कराया कि मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ प्रदेश का सबसे पुराना, सक्रिय और समर्पित संगठन है, जो शासन और समाज के बीच संवाद सेतु का कार्य करते हुए वर्षों से जनहित योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महती भूमिका निभा रहा है। बावजूद इसके पत्रकार आज भी कई मूलभूत आवश्यकताओं और संवैधानिक सुरक्षा से वंचित हैं।

ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगों को रेखांकित किया गया:

  • मध्यप्रदेश में शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए।
  • पूर्व में स्वीकृत पत्रकार भवन की भूमि पत्रकारों को वापस सौंपी जाए।
  • पत्रकारों की भलाई हेतु श्रम विभाग के सहयोग से स्थानीय समितियां गठित हों।
  • प्रत्येक तहसील स्तर पर सूचना सहायक नियुक्त किए जाएं।
  • पत्रकारों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया जाए।
  • पत्रकार कल्याण आयोग का गठन किया जाए।
  • समाचार पत्रों को जीएसटी से मुक्त किया जाए।
  • पत्रकारों को कम ब्याज दर पर ऋण, टोल नाकों पर मुक्त प्रवेश, तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाए।
  • “अधिमान्य पत्रकार” शब्द का दुरुपयोग रोका जाए, और समितियां पुनः गठित की जाएं।

सामूहिक उपस्थिति बनी चेतना का प्रतीक:
इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रेम नारायण सोनी, सुसनेर ब्लॉक अध्यक्ष मांगीलाल सोनी, वरिष्ठ पत्रकार नजीर अहमद, राजकुमार जैन, गिरीश सक्सेना, यूनुस लाला, हरिनारायण यादव, हनीफ खान, गौरीशंकर सूर्यवंशी, कैलाश आर्य, दीपक जैन, राकेश बिकुन्दीया, प्रदीप चौबे, सोनू खान, युगलकिशोर परमार, मनोज माली, बहादुर सिंह सहित बड़ी संख्या में पत्रकार साथी उपस्थित रहे ।


सार्थक’ दृष्टिकोण से एक चिंतन

जब कोई पत्रकार सड़कों पर उत्पीड़न का शिकार होता है या सच्चाई की कीमत पर जान गंवाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न होता है। ऐसे में यह विचार अनिवार्य हो जाता है कि पत्रकार महज सूचनाओं के वाहक नहीं, अपितु सामाजिक चेतना के निर्माता हैं।

जापान जैसे विकसित देशों ने पत्रकारों को “श्रमिक” के रूप में मान्यता देकर यह दर्शाया है कि कलम भी उतनी ही श्रमसाध्य है, जितनी कोई भौतिक निर्माण प्रक्रिया। वहां पत्रकारों को स्वास्थ्य बीमा, सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, ट्रेड यूनियन अधिकार जैसी सभी सुविधाएं प्राप्त हैं, जो उन्हें निर्भीक और गरिमापूर्ण पत्रकारिता की क्षमता देती हैं।

वहीं भारत में “श्रमजीवी पत्रकार” शब्द आज भी केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति बनकर रह गया है। क्या यह समय नहीं आ गया है कि इस शब्द में निहित ‘श्रम’ को संवैधानिक और संरचनात्मक मान्यता भी दी जाए?

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा मजदूर दिवस पर प्रस्तुत की गई 21 सूत्रीय मांगें पत्रकारों की केवल अपेक्षाएं नहीं, बल्कि लोकतंत्र को टिकाऊ और जिम्मेदार बनाए रखने की बुनियादी ज़रूरतें हैं। यदि समाज और शासन को पारदर्शिता चाहिए, तो पत्रकारों को सुरक्षा, सम्मान और संरचना देना अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है।

– राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
(पत्रकार, चिंतक एवं जनमत जागरण संपादक)


सार्थक संदेश:
मजदूर दिवस की यह पहल न केवल पत्रकारों की आवाज को शासन तक पहुंचाने का माध्यम बनी, बल्कि यह भी सिद्ध कर गई कि जब कलमकार अपने अधिकारों के लिए संगठित होते हैं, तो वे न केवल समाज को दिशा देते हैं, बल्कि नीति निर्धारकों को भी सोचने को विवश करते हैं।

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