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“तिरंगे के साए में एकजुट हुआ सुसनेर – ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गूंजा जय हिंद!


“सुसनेर में दिखा देश के लिए समर्पण, तिरंगा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब – जानिए इस अभूतपूर्व आयोजन की प्रेरणा”


जब राष्ट्र पुकारता है, तो सुसनेर जैसे नगर केवल सुनते नहीं, उठ खड़े होते हैं। शुक्रवार की शाम जब तिरंगे के रंग में डूबा सुसनेर चल पड़ा, तब हर गली, हर मोड़, हर दिल में एक ही धुन गूंज रही थी – जय हिंद! ऑपरेशन सिंदूर की विजय के सम्मान में निकली इस तिरंगा यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि देशभक्ति किसी पार्टी, धर्म या विचारधारा की मोहताज नहीं – यह तो आत्मा की आवाज़ है।

जनमत जागरण @ सुसनेर।
जब राष्ट्र पुकारता है, तब जन-जन का स्वर गूंजता है – और शुक्रवार की शाम सुसनेर ने यही दृश्य प्रस्तुत किया। भारतीय सेना की रणनीतिक विजय ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सम्मान में नगर देशभक्ति की भावना से सराबोर हो उठा।

शाम 5 बजे इतवारीया बाजार से प्रारंभ हुई भव्य तिरंगा यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए शहीद पार्क पर सम्पन्न हुई। यात्रा के दौरान बजते देशभक्ति गीतों और गूंजते नारों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम से भर दिया। हाथों में तिरंगा लिए नगर की मातृशक्ति, युवतियां, बच्चे और नागरिक “जय हिंद”, “भारत माता की जय”, “भारतीय सेना ज़िंदाबाद” जैसे नारों के साथ चल रहे थे।

नगरवासियों द्वारा जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया, जिससे पूरे नगर में गर्व और गौरव की अनुभूति दिखाई दी।

सभा स्थल पर दिए गए उद्बोधन में यह भाव प्रमुख रहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारत की आत्म-रक्षा और स्वाभिमान की घोषणा है। इस आयोजन में सर्वसमाज की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि सुसनेर राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत है।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि हमें अपनी सेना पर गर्व है और जब बात राष्ट्र के सम्मान की हो, तब हर विचारधारा और भिन्नता से ऊपर उठकर देश पहले आता है।

इस आयोजन में नगर परिषद, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

नेताओं और अधिकारियों की उपस्थिति :


कार्यक्रम में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के अनेक प्रतिनिधि मौजूद थे, जिन्होंने एक स्वर में सेना के शौर्य को नमन किया।


सार्थक चिंतन:


सुसनेर की यह तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश थी – कि जब देश का सम्मान दांव पर हो, तब हर नागरिक सिपाही बन जाता है।
यह आयोजन सिखा गया कि देशभक्ति वह शक्ति है जो हर भिन्नता को भुलाकर एक झंडे के नीचे खड़ा कर देती है।


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