भानपुरा-कुकड़ेश्वर: आंधी-तूफान ने ढाया कहर, तंबोली समाज की पान की फसल तबाह प्राकृतिक आपदा से करोड़ों का नुकसान, मुख्यमंत्री से विशेष राहत पैकेज की मांग

🍃 पान की खेती करने वाले सैकड़ों किसान बेहाल, पनवाड़ियाँ तबाह – करोड़ों का नुकसान, सरकार से राहत पैकेज की गुहार, भानपुरा में तंबोली समाज पर टूटा कुदरत का कहर
जनमत जागरण @ भानपुरा/कुकडेश्वर।
यह केवल एक तूफान नहीं था… यह एक परंपरा पर आघात था।
यह केवल कुछ बरेजों का गिरना नहीं था… यह एक जीविका का टूटना था।
भानपुरा और आसपास के क्षेत्र में बीते सप्ताह आए आंधी-तूफान ने जिस प्रकार तंबोली समाज के पान कृषकों की पनवाड़ियाँ जमींदोज कीं, वह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक समुदाय की सांस्कृतिक विरासत पर सीधा आक्रमण है।
भानपुरा नगर में लगभग 400 से 500 परिवार आज भी अपनी परंपरागत पान की खेती को जीवित रखे हुए हैं। यह वही तंबोली समाज है, जिसकी पहचान कभी भानपुरा की आत्मा हुआ करती थी। परंतु इस बार प्रकृति की मार इतनी विकराल रही कि कई पीढ़ियों की मेहनत एक झटके में बिखर गई।
100 से अधिक पनवाड़ियाँ पूरी तरह तबाह, शेष में आंशिक नुकसान

तूफान से हुई तबाही के बाद समाजजनों द्वारा किए गए आकलन के अनुसार, लगभग 100 परिवारों की पनवाड़ियाँ पूरी तरह नष्ट हो गईं, वहीं 100 से अधिक पनवाड़ियों में 20 से 30 प्रतिशत तक क्षति हुई है। बाकी पनवाड़ियाँ भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। गर्मी का यह मौसम पान के व्यवसाय का मुख्य समय होता है, जब फसल अपने चरम पर होती है और मांग सर्वाधिक होती है। ऐसे समय में आई यह आपदा, एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट बनकर उभरी है।
राजस्व व उद्यानिकी विभाग ने शुरू किया सर्वे

तहसीलदार विनोद शर्मा, पटवारी रवि शर्मा और उद्यानिकी अधिकारी भूपेंद्र कटारे ने संयुक्त टीम के साथ क्षति का स्थलीय निरीक्षण किया और सर्वे कार्य जारी है।
✍️ कैलाश सोलंकी उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंदसौर ने जनमत जागरण को बताया कि आरबीसी गाइडलाइन के अनुसार मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
राजनीतिक प्रतिनिधियों ने दी सहानुभूति, मांगा उचित मुआवजा

भानपुरा विधायक चंदरसिंह सिसोदिया ने भी पीड़ित किसानों से भेंट कर उन्हें सहायता दिलाने का भरोसा दिया है। उन्होंने घटना की जानकारी प्रभारी कलेक्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देने की बात कही है। वहीं, कुकड़ेश्वर में श्री सूर्यवंशी कुमरावत तंबोली समाज द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें विशेष आर्थिक सहायता की मांग की गई।
“यह समाज सिर्फ पान नहीं उगाता, यह संस्कृति को जीवित रखता है”

तंबोली समाज के प्रतिनिधियों – भानपुरा में शिवाजी बम्बोरिया, राजेश निम्बोदिया, विकास पहाड़िया, नितिन मंडकारिया, भागचंद भाना – और कुकड़ेश्वर में राजेश कलवाड़िया, रिंकू भानपिया, महेश टोडावाल सहित कई युवा किसान अपनी परंपरा, अपनी खेती और अपने स्वाभिमान को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके स्वर में आक्रोश भी है और पीड़ा भी – क्योंकि उन्हें वह सहयोग नहीं मिलता जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
🍃पान सिर्फ एक पत्ता नहीं, एक परंपरा है – एक जीवनशैली है।
भानपुरा और कुकड़ेश्वर क्षेत्र के तंबोली समाज की यह जीवनशैली पिछले सप्ताह प्रकृति के कोप का शिकार हो गई। आंधी, तूफान और बारिश ने न केवल पत्तों को उड़ाया, बल्कि उन पर आश्रित सैकड़ों परिवारों की आजीविका भी छीन ली। यह सिर्फ आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत पर संकट है – उस खेती पर संकट, जो लुप्त होती जा रही है और जिसे आज भी तंबोली समाज जीवित रखे हुए है।
अब जरूरत है कि यह समाज सिर्फ सर्वे की खानापूर्ति से नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक सहायता और विशेष संरक्षण नीति से संभाला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण: क्या एक परंपरा यूं ही मिटा दी जाएगी?
आज जब देशभर में पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पुनर्जीवित करने की बातें हो रही हैं, तब एक ऐसा समाज जो पीढ़ियों से जैविक व प्राकृतिक तरीके से पान की खेती कर रहा है, उसे आपदा के समय केवल सांत्वना देकर छोड़ देना उचित नहीं है। यह केवल एक आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक क्षरण की चेतावनी है।
मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से विशेष आग्रह है कि पान कृषकों के लिए एक विशेष राहत पैकेज घोषित कर इस परंपरा को नष्ट होने से बचाया जाए। साथ ही तंबोली समाज के लिए दीर्घकालीन सुरक्षा नीति भी बनाई जाए।
सार्थक चिंतन: क्या सरकार अब भी नहीं समझेगी कि परंपरागत खेती को बचाना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, सांस्कृतिक उत्तरदायित्व भी है?
रिपोर्ट: जनमत जागरण – भानपुरा संवाददाता टीम



