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“कंवराखेड़ी की बहू मनीषा की मौत – नकली इलाजकर्ता की लापरवाही बनी जीवन का काल” चार अस्पतालों की दौड़, अंत में इंदौर में टूटी सांसें | अब ताज मेडिकल बंद, जिम्मेदार कौन?”

“कंवराखेड़ी की बहू मनीषा अब इस संसार में नहीं रही… वो बहू जो कभी बेटियों की तरह घर आँगन में मुस्कुराती थी, आज उस घर की देहरी पर सन्नाटा पसरा है। इलाज की जगह ज़हर बन गया इंजेक्शन – और फिर सरकारी तंत्र की चुप्पी ने उसकी सांसें निगल लीं।”

📰 “कंवराखेड़ी की बहू मनीषा की मौत – इलाज के नाम पर दी गई सूई बनी काल, अब ताज मेडिकल बंद, स्वास्थ्य महकमा मौन”

जनमत जागरण @ सोयतकलां

सोयतकलां के समीपस्थ ग्राम कंवराखेड़ी की 19 वर्षीय नवविवाहिता बहू मनीषा बाई पत्नी भेरूलाल मालवीय की दर्दनाक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। मामूली पेट दर्द के इलाज के लिए गई मनीषा को एक अप्रशिक्षित चिकित्सा संचालक द्वारा लगाए गए इंजेक्शन से ऐसा इंफेक्शन फैला कि आखिरकार उसकी सांसें इंदौर के एक अस्पताल में थम गईं।

⚕️ इलाज नहीं, मौत का बुलावा साबित हुआ इंजेक्शन

कुछ दिन पूर्व मनीषा को पेटदर्द की शिकायत हुई। वह सोयत सदर बाजार स्थित ताज मेडिकल स्टोर पर गई, जिसे अजीज खान नामक व्यक्ति संचालित करता है। यहीं पर उसने मनीषा को कुछ गोलियां दीं और हिप्स पर एक इंजेक्शन लगाया।
कुछ ही घंटों में मनीषा को इंजेक्शन वाली जगह पर जलन, सूजन और गठान होने लगी। फिर दोनों पैरों में झटके आने शुरू हो गए।

परिजन उसे पुनः उसी क्लिनिक पर ले गए जहां अजीज खान ने उसे फिर से कुछ गोलियां दे दीं। लेकिन स्वास्थ्य में सुधार की बजाय उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई।


🏥 चार अस्पतालों की दौड़, अंत में टूटी सांसें

जब हालत ज्यादा खराब हुई तो परिजनों ने उसे झालावाड़ के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया। वहाँ से कोटा रैफर किया गया। कोटा के अस्पताल में भी जब कोई सुधार नहीं हुआ तो इंदौर के एक निजी अस्पताल में ICU में भर्ती किया गया।

कई दिनों तक मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार मनीषा ने दम तोड़ दिया। परिजन अब गम और गुस्से में हैं – क्योंकि एक मामूली लापरवाही ने उनकी बहू और पूरे परिवार का भविष्य छीन लिया।


🏚️ ताज मेडिकल पर ताला, स्वास्थ्य विभाग बेखबर

सूत्रों के अनुसार, अजीज खान का मेडिकल शुक्रवार से ही बंद पड़ा है। परिजनों द्वारा थाने में लिखित शिकायत दी जा चुकी है, समाचार भी लगातार मीडिया में प्रकाशित हो रहे हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है

आमजन में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जब मौत हो चुकी है, मेडिकल पर ताला लग चुका है, तब भी न तो कोई एफआईआर, न ही स्वास्थ्य विभागीय निरीक्षण सामने आया है।


🔍 प्रशासन से सवाल – गरीब की बहू की मौत का जिम्मेदार कौन?

मनीषा, जो इस गांव की बहू थी, अब नहीं रही। लेकिन वो सवाल ज़िंदा है – क्या किसी को भी बिना पंजीयन, बिना योग्यता, यूं ही लोगों की ज़िंदगी से खेलने की छूट मिलनी चाहिए?

🗣️ प्रशासन की चुप्पी और प्रतिक्रिया – सवाल अभी भी बाकी हैं

जब इस गंभीर मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संवाद किया गया, तो उन्होंने प्रारंभिक अनभिज्ञता जताते हुए कहा, “हमें इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब जब आपसे पता चला है तो हम इस पर यथोचित कार्रवाई करेंगे।”
इसी प्रकार परिजनों द्वारा सोयत थाने में दिए गए आवेदन पर भी अभी तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई थी। हालांकि अब पुलिस प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य महकमा और पुलिस विभाग इस दर्दनाक लापरवाही पर क्या ठोस कदम उठाते हैं, और क्या मनीषा की मौत के बाद भी सिस्टम की संवेदनाएं जागेंगी या नहीं।


✍️ : “इसे सिर्फ मनीषा की मौत मत कहिए… यह उस व्यवस्था का चेहरा है, जिसमें एक गरीब की बहू इलाज के नाम पर जान गंवा देती है और तंत्र कान में रूई डालकर बैठा रहता है।”

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