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“गो अभयारण्य में जिला स्तरीय बैठक सम्पन्न — कलेक्टर ने दिए विकास व संरक्षण के निर्देश”

“वृक्षारोपण और कार्बन क्रेडिट हेतु NOC मंजूर, गोसेवा को प्रशासनिक सहयोग की नई दिशा”

🐄 “गोमाता केवल आस्था नहीं, पृथ्वी पर संतुलन की सांस्कृतिक धुरी हैं” — इसी विचार को आत्मसात करते हुए आगर जिला प्रशासन ने गो अभयारण्य विकास हेतु की महत्वपूर्ण बैठक
📍सुसनेर, 28 जून | जनमत जागरण विशेष रिपोर्ट

मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित विश्व के प्रथम गो अभयारण्य के सुचारु संचालन और सतत विकास हेतु जिला स्तरीय संचालन समिति की त्रैमासिक बैठक का आयोजन आज सुसनेर जनपद में किया गया।
बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर एवं संचालन मंडल अध्यक्ष श्री राघवेंद्र सिंह (आगर-मालवा) ने की। उन्होंने बैठक की शुरुआत भगवती गोमाता की पूजन और आरती के साथ करते हुए आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

🛑 बैठक में समर्पण और समाधान के साथ उठे ज़मीनी मुद्दे

बैठक में समिति के सचिव डॉ. आर. सी. पंवार ने पिछली बैठक के प्रस्तावों की समीक्षा प्रस्तुत की। इन पर चर्चा करते हुए जिला कलेक्टर ने संबंधित विभागों को शीघ्र और प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिए।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी एवं प्रतिनिधि:

  • श्रीमती नंदा भलावे (जनपद कार्यपालन अधिकारी)
  • देवनारायण यादव (एसडीओपी)
  • डॉ. उमेश जैन, डॉ. एम. जे. खान, डॉ. योगेश कुंभकार, डॉ. राहुल दांगी, डॉ. जगदीश तिवारी (पशु चिकित्सा विभाग)
  • ग्रामीण यांत्रिकी, विद्युत, एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री
  • श्री अंबालाल सुथार (निदेशक, गो अभयारण्य एवं प्रबंध न्यासी – श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा)
  • डॉ. विक्रम सिंह (प्रबंध न्यासी)
  • श्री शिवराज शर्मा (प्रबंधक, गो अभयारण्य)

🌱 हरियाली और हरित अर्थव्यवस्था की ओर कदम

इस बैठक में सजीवनी लाइफ प्रा. लि. को गो अभयारण्य परिसर में वृक्षारोपण व कार्बन क्रेडिट कार्य हेतु NOC प्रदान करने का प्रस्ताव पारित किया गया। यह निर्णय गो अभयारण्य को हरित, पर्यावरणीय और आर्थिक रूप से समृद्ध मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

🐂 श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के माध्यम से हो रहा संचालन

ज्ञातव्य है कि यह गो अभयारण्य 01 जनवरी 2023 से पथमेड़ा गोसेवा संस्थान द्वारा संचालित हो रहा है। इसके लिए हर छह माह में राज्य स्तरीय और हर तीन माह में जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठकें होती हैं, जिनमें शासन और प्रबंधन मिलकर कार्ययोजनाओं पर संवाद करते हैं।


✍️ सार्थक चिंतन

“सिर्फ नीतियां नहीं, नीयत भी ज़रूरी है — जब गोसेवा प्रशासनिक निर्णयों का केंद्र बनती है, तब संस्कृति और सतत विकास साथ चलते हैं।”

📌 जनमत जागरण – ‘जो सच है, वही जनमत’


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