“ ताज मेडिकल मामला – गलत इंजेक्शन से मनीषा की मौत: पढ़िए 30 दिन का पूरा घटनाक्रम – कागज़ी डॉक्टर से जेल तक की पूरी कहानी

🔴 जनमत जागरण न्यूज़ फॉर एक्शन
📰 “मनीषा केस: गलत इंजेक्शन से मौत और 30 दिन में जेल तक की कहानी”
📍 सोयतकलां | जनमत जागरण विशेष रिपोर्ट
✍️ “एक इंजेक्शन, एक मौत और 30 दिन की साजिश”
“एक इंजेक्शन ने मनीषा की जिंदगी छीन ली… और सिस्टम ने न्याय की राह। लेकिन जनमत जागरण की आवाज और जनता के दबाव ने आखिरकार उस दरवाजे को खटखटाया, जहां से न्याय की उम्मीद बाकी है। 30 दिन तक चले घटनाक्रम ने अब ताज मेडिकल के संचालक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।”
📌 पूरी घटना की टाइमलाइन – 30 दिन, 6 बड़े मोड़
🗓️ 13 जून 2025: एक गलत इंजेक्शन और जिंदगी का अंत
कंवराखेड़ी निवासी मनीषा बाई (पत्नी भेरूलाल) को ताज मेडिकल के संचालक डॉ. अजीज खान ने तब इंजेक्शन लगाया जब वह पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंची थीं। इंजेक्शन लगने के कुछ मिनटों बाद ही उनकी हालत बिगड़ गई। परिजन मनीषा को पहले झालावाड़, फिर कोटा और आखिर में इंदौर लेकर गए। लेकिन 16 जून 2025 को इंदौर के अस्पताल में मनीषा ने दम तोड़ दिया।
🗓️ 16 जून 2025: पहला आवेदन और पुलिस की कार्रवाई
मृतका के पति भेरूलाल ने थाने में शिकायत दी। पुलिस ने इसे अप्राकृतिक मौत मानकर मर्ग क्रमांक दर्ज किया, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर कार्रवाई के लिए बार-बार आवेदन दिए।
🗓️ 24 जून 2025: ताज मेडिकल और क्लिनिक सील
लगातार सवालों और जन आक्रोश के बीच स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम ने 24 जून को ताज मेडिकल और उसके क्लिनिक को सील कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि “मौके की विस्तृत जांच के बाद ही सील खोली जाएगी।”
जांच टीम में शामिल थे:
- डॉ. मनीष कुरील (DHO, प्रमुख अधिकारी)
- डॉ. बृजभूषण पाटीदार (BMO, सुसनेर)
- श्रीमती रोशनी जैन (ड्रग इंस्पेक्टर)
🗓️ 12 जुलाई 2025: सील टूटी, नियमों की धज्जियां
18 दिन बाद नगर में यह खबर आग की तरह फैली कि ताज मेडिकल और क्लिनिक फिर से खुल गए हैं। जांच में सामने आया कि संचालक अजीज खान ने बिना अनुमति सील तोड़ी और मेडिकल का संचालन शुरू कर दिया।
जब जनमत जागरण ने इस पर अधिकारियों से सवाल किए:
- डॉ. बृजभूषण पाटीदार (BMO): “बिना अनुमति सील तोड़ना गंभीर अपराध है। इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।”
- डॉ. दिनेश देहलवार (CMHO, आगर-मालवा): “मौखिक आदेश नहीं चलते। बिना लिखित अनुमति सील तोड़ना नियमों का उल्लंघन है।”
- ड्रग इंस्पेक्टर रोशनी जैन से बात नहीं हो पाई; उनके सहयोगियों ने बताया कि वे अस्पताल में भर्ती हैं।
🗓️ 15 जुलाई 2025: मृतका के पति का जनसुनवाई आवेदन
मृतका के पति भेरूलाल ने जिला मुख्यालय में जनसुनवाई में आवेदन देकर आरोप लगाया कि –
“ताज मेडिकल संचालक ने गलत इंजेक्शन लगाया और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा आरोपी ने सील तोड़कर मेडिकल खोला।”
🗓️ 21 जुलाई 2025: गिरफ्तारी और जेल
रविवार को पुलिस ने मृतका के परिजनों और आरोपित डॉ. अजीज खान के बयान लिए। इसके बाद आईपीसी की धारा 105 में केस दर्ज कर लिया गया।
📌 एसडीओपी देवनारायण यादव का बयान:
“मनीषा केस में पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध किया है। आरोपी डॉ. अजीज खान को रविवार को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।”
🚨 धारा 105 का मतलब क्या है?
“यदि किसी के कृत्य से किसी की मौत होती है, और वह जानता था कि ऐसा करने से जान जा सकती है – तो दोषी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।”
यह अपराध गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी में आता है।

📢 ✍️ – ‘न्याय की जंग और जनमत की ताकत’
“30 दिन की देरी ने न्याय की राह में कितने रोड़े अटकाए। पर इस घटना ने एक बात तो साबित कर दी कि जब जनता की आवाज बुलंद होती है और मीडिया की कलम सशक्त होती है, तब कोई भी आरोपी सिस्टम की ढाल में नहीं छुप सकता।”
🖋️ जनमत जागरण की विशेष रिपोर्ट
“एक गलत इंजेक्शन से शुरू हुई यह कहानी अब न्याय के मुकाम पर पहुंची है – लेकिन क्या यह अंतिम मुकाम है?”



