“मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों पर ताले – क्या बच्चों का भविष्य भी हुआ सील?” जानिए मध्यप्रदेश में शिक्षा के गिरते दरवाज़े का रहस्य”

📰 मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूल बंद – बच्चों के भविष्य पर ताले!
✒️ डॉ. बालाराम परमार ‘हंसमुख’
(रिटायर्ड शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल की सिलेबस समिति के सदस्य)
“जब स्कूल बंद होते हैं, तब केवल ईंट-पत्थर ही नहीं, समाज का भविष्य भी ढहता है।” ”मध्यप्रदेश में जुलाई 2025 खत्म होते-होते सैकड़ों सरकारी विद्यालयों पर ताले पड़ गए। सवाल यह है कि इन बंद होते दरवाज़ों के पीछे दोषी कौन है – व्यवस्था, राजनीति या हम सभी?
❓ क्यों बंद हो रहे हैं सरकारी स्कूल?
यह सवाल जितना सीधा लगता है, जवाब उतना ही जटिल है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल शिक्षा के पतन के लिए बराबर के जिम्मेदार हैं।
पिछले 30 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में जितनी अनदेखी हुई, उसकी कीमत अब प्रदेश के बच्चे और अभिभावक चुका रहे हैं।
📌 10 कड़वे कारण
1️⃣ 23 लाख से अधिक छात्रों का स्कूल छोड़ना – अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग।
2️⃣ 5500+ स्कूलों में पहली कक्षा में एक भी नामांकन नहीं।
3️⃣ शिक्षकों की भारी कमी, अतिथि शिक्षकों पर निर्भरता, प्रशिक्षण का अभाव।
4️⃣ बुनियादी सुविधाओं – बिजली, पानी, शौचालय – का अभाव।
5️⃣ सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम शिक्षकों की कमी।
6️⃣ स्कूलों का मर्जर और बंद करने की नीति।
7️⃣ पुराने शिक्षक नई तकनीक और पद्धतियों से अनभिज्ञ।
8️⃣ प्रशिक्षण और अपग्रेडेशन के अवसर न मिलना।
9️⃣ राजनीतिक दखल – नियुक्ति और पदोन्नति में पारदर्शिता का अभाव।
🔟 शिक्षा बजट का दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही।
🕵️♂️ राजनीति का ज़हर
डॉ. परमार लिखते हैं –
“कांग्रेस सरकार के दौर में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति ने शिक्षा की जड़ों को कमजोर किया। भाजपा सरकार के दौर में स्कूलों पर ताले जड़ने की प्रक्रिया तेज़ हो गई।”
पुराने शिक्षक कांग्रेस सरकार की राजनीति में उलझे रहे और नए शिक्षक भाजपा के साथ।
नतीजा – शिक्षा की प्राथमिकता खत्म और राजनीतिक एजेंडा हावी।
✅ समाधान की राह
✔️ शिक्षा नीतियों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करना।
✔️ नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता का सम्मान।
✔️ शिक्षा बजट का ईमानदारी से उपयोग।
✔️ शिक्षकों का सतत प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक में दक्षता।
✔️ अभिभावकों को भी जवाबदेह बनाना कि वे सरकारी शिक्षा में भरोसा लौटाएं।
📢 जनता से सवाल
जब सरकारी स्कूल 8% की दर से बंद हो रहे हैं और प्राइवेट स्कूल 15% की दर से खुल रहे हैं, तो क्या हम सरकारी शिक्षा को मरने देंगे?
क्या यह तय कर लिया गया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल अमीरों का अधिकार है?
🔥 अब चुप रहना विकल्प नहीं!
जनता को तय करना होगा कि उनके बच्चों का भविष्य किसके हाथों में सुरक्षित है।
जो कुछ हो रहा है, वह जनता के द्वारा चुनी गई सरकार के कारण है। और आगे जो होगा, उसकी जिम्मेदारी भी जनता की ही होगी।
अंत में …. “सरकारी स्कूल 8% की दर से बंद हो रहे हैं और प्राइवेट स्कूल 15% की दर से खुल रहे हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज के बदलते सरोकार और शिक्षा नीति में सुधार की आवश्यकता का संकेत है।”अब समय आ गया है कि हम सभी – सरकार, शिक्षाविद, अभिभावक और समाज – मिलकर यह विचार करें कि शिक्षा के भविष्य को किस दिशा में ले जाना है।क्योंकि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हम सबका साझा उत्तरदायित्व है।



