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संघ साधना के 100 वर्ष : डॉ. लोकेश लड्डानी का आह्वान – अब देश को बलिदान नहीं, सेवा से जीने वाले देशभक्त चाहिए


🌾 संघ साधना के 100 वर्ष : शताब्दी वर्ष पर सुसनेर में निकला RSS का विशाल पथ संचलन

पूर्ण गणवेश में अनुशासन के साथ घोष की धुन पर कदमताल करते हुए निकले स्वयंसेवक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया विजयादशमी उत्सव


✍️ समाज साधना के सौ वर्ष का संकल्प

शताब्दी का यह समय केवल स्मरण का नहीं, बल्कि संघ साधना के स्वरूप को समझने और समाज को दिशा देने का अवसर है। सौ वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक की अखंड साधना की है— यह साधना केवल शाखा तक सीमित नहीं रही, बल्कि गाँव-गाँव में संस्कार, सेवा और समरसता के रूप में फली-फूली है।
आज जब समाज नए परिवर्तन के मोड़ पर खड़ा है, तब संघ का यह संदेश और भी सार्थक हो उठता है— देशभक्ति अब केवल बलिदान का विषय नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक कर्म में राष्ट्रभाव का समावेश है।
इसी भाव के साथ सुसनेर में विजयादशमी के अवसर पर संघ का शताब्दी वर्ष पथ संचलन आयोजित हुआ, जिसने नगर के आकाश में अनुशासन, श्रद्धा और राष्ट्रनिष्ठा का अद्भुत दृश्य रचा।


📍सुसनेर में उत्सव का आयोजन

शताब्दी वर्ष पर आगर मालवा जिले के सुसनेर नगर में रविवार को विजयादशमी उत्सव के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पथ संचलन निकाला गया। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में घोष की मधुर धुन पर कदमताल करते हुए आगे बढ़े।
सुबह 8:30 बजे मिडिल स्कूल ग्राउंड में स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ। 9 बजे प्रकट कार्यक्रम आरंभ हुआ, जिसमें व्यायाम योग, आसन, समता आदि का प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक भेरूलाल ओसारा ने की।


🕉️ विचार और दिशा : डॉ. लोकेश लड्डानी का उद्बोधन

संघ के विभाग सह संपर्क प्रमुख डॉ. लोकेश लड्डानी ने कहा कि —

“देशभक्त समाज की रचना के लिए डॉ. हेडगेवार जी ने संघ की स्थापना की थी। यह संस्था व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है। स्वतंत्रता के बाद भी समाज में भेदभाव और छुआछूत जैसी कुरीतियाँ बनी हुई हैं। संघ इन विभाजनों को मिटाने की दिशा में कार्यरत है।”

उन्होंने कहा कि —

“आज देश को बलिदान करने वालों की नहीं, बल्कि देश के लिए जीने वालों की आवश्यकता है। पंच परिवर्तन— स्व का बोध, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य— यही राष्ट्र पुनर्निर्माण के पांच आधार हैं।”

डॉ. लड्डानी ने बताया कि शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा गृह संपर्क अभियान, जनगोष्ठियाँ, हिन्दू सम्मेलन, सद्भाव बैठके, युवा सम्मेलन और शाखा विस्तार जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि—

“संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगे, फिर भी आज वह सौ वर्ष की साधना पूरी कर सका। यह दृढ़ता केवल संगठन की नहीं, बल्कि विचार की विजय है। अब आवश्यकता है कि इस सदी के अनुभव से नई पीढ़ी के लिए गंभीर चिंतन का मार्ग प्रशस्त किया जाए।”


🚩 अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक पथ संचलन

मिडिल स्कूल ग्राउंड से प्रारंभ हुआ पथ संचलन पांच पुलिया, हाथी दरवाजा, शुक्रवारिया बाजार, सराफा बाजार, इतवारीया बाजार, नरबदिया, मालीपुरा, मैना रोड, आगर रोड, मंडी चौराहा, डाक बंगला रोड से होते हुए महाराणा प्रताप तिराहा पहुंचा और पुनः वहीं से मिडिल स्कूल ग्राउंड पर समापन हुआ।

नगरवासियों ने स्वयंसेवकों का जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया। पूरे मार्ग पर उत्साह, अनुशासन और राष्ट्रगौरव की लहर स्पष्ट झलक रही थी। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा।


✍️ सार्थक दृष्टिकोण से समापन

संघ का यह शताब्दी वर्ष केवल संस्थागत उत्सव नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को पुनः पहचानने का आमंत्रण है।
सुसनेर का यह पथ संचलन उस अमर परंपरा का प्रतीक बना, जहाँ प्रत्येक स्वयंसेवक अपने कदमों के साथ यह संदेश देता चला गया —

“हम राष्ट्र के अंग हैं, और हमारा हर कदम भारत के उत्थान की दिशा में है।”


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