“उज्जैन में लैंड पूलिंग विवाद: सिंहस्थ महाकुंभ की भूमि पर स्थायी अधिग्रहण क्यों? 17 गांवों के किसान आंदोलन पर अड़े”

▪️ लैंड पूलिंग एक्ट पर बड़ा टकराव 17 गांवों के किसान बोले—“परंपरा बचाओ, जमीन नहीं देंगे!”
सिंहस्थ महापर्व की परंपरा, पुश्तैनी जमीन पर निर्भर हजारों किसान परिवार, और सरकार का नया लैंड पूलिंग एक्ट—मध्यप्रदेश में यह त्रिकोणी टकराव अब एक बड़े आंदोलन का स्वर ले चुका है। उज्जैन के 17 गांवों की 12,500 बीघा जमीन को स्थायी रूप से अधिग्रहित किए जाने की प्रक्रिया ने किसानों के मन में गहरी शंका और असंतोष पैदा कर दिया है। सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है, बल्कि उस सांस्कृतिक व्यवस्था, आर्थिक सुरक्षा और सदियों पुरानी परंपरा का है, जिसका निर्वहन किसान अब तक बिना शर्त करते आए हैं।
जनमत जागरण @ उज्जैन : मध्य प्रदेश शासन के विवादित लैंड पूलिंग एक्ट की पहली बड़ी चर्चा अब उज्जैन में तेजी से उभर चुकी है। सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन क्षेत्र में आने वाली करीब 17 गांवों की 12,500 बीघा भूमि को स्थायी रूप से अधिग्रहित करने की प्रारंभिक प्रक्रिया ने किसान समुदाय को गहरी चिंता में डाल दिया है।
किसान संगठनों का कहना है कि यह अधिग्रहण न केवल उनकी पुश्तैनी विरासत को प्रभावित करेगा, बल्कि उस सनातन परंपरा को भी चुनौती देगा, जिसमें किसान पिछले कई दशकों से प्रत्येक सिंहस्थ में स्वेच्छा से जमीन उपलब्ध कराते आए हैं।
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी राजेंद्र पालीवाल ने सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि —
“जब किसान हर 12 साल में लगने वाले सिंहस्थ के लिए अपनी जमीन एक वर्ष के लिए स्वयं देता आया है, तो फिर सरकार इसे स्थायी रूप से क्यों लेना चाहती है? क्या इससे 17 गांवों के किसान परिवार और उन पर निर्भर हजारों मजदूर परिवार उजड़ नहीं जाएंगे?”
पालीवाल ने यह भी पूछा कि—
“क्या आने वाली पीढ़ियों में सिंहस्थ महापर्व कंक्रीट के जंगलों में आयोजित होगा? और सरकार सिंहस्थ के बाद बाकी 11 वर्षों तक इस विशाल भूमि का उपयोग किस उद्देश्य से करना चाहती है?”
किसान संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अखाड़ों को आवश्यक भूमि पहले ही आवंटित की जा चुकी है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से जमीन की अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है। ऐसे में किसानों का आरोप है कि कहीं यह जमीन सुविधाओं के नाम पर पूंजीपतियों को देने की प्रक्रिया तो नहीं?
किसान संगठनों ने सरकार से पूछा—
“क्यों 17 गांवों के सैकड़ों परिवारों से पुश्तैनी जमीन छीनने की तैयारी की जा रही है? क्यों संवाद और विश्वास की प्रक्रिया को छोड़ा गया?”
भारतीय किसान संघ ने एक बार फिर मांग की कि सिंहस्थ का आयोजन परंपरा और प्रकृति के अनुरूप ही होना चाहिए—जैसा आज तक होता आया है। संगठन ने लैंड पूलिंग एक्ट के तहत की जा रही इस कार्यवाही को तानाशाहीपूर्ण, असमय, और असंगत बताते हुए इसे तत्काल रोकने एवं किसानों पर दर्ज झूठे प्रकरणों को वापस लेने की मांग की है।
किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि ज्ञापन, बैठकें और संवाद—इन सभी प्रयासों के बावजूद शासन ने अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया। इसके विरोध में किसानों ने उज्जैन में हजारों ट्रैक्टरों और विशाल जनसमूह वाली रैली निकालकर सरकार को संदेश भी दिया, लेकिन किसी सकारात्मक परिणाम की घोषणा नहीं हो सकी।
यही कारण है कि अब किसान संगठनों ने 18 नवंबर से उज्जैन में संपूर्ण प्रदेश स्तर पर ‘डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा की है।
किसान नेताओं का कहना है—
“जब तक प्रदेशभर में लैंड पूलिंग एक्ट को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।”
🟧 संपादकीय -‘सार्थक चिंतन ‘
“उज्जैन की भूमि का विवाद सिर्फ जमीन का नहीं—यह संवाद, परंपरा और विश्वास का प्रश्न है।”
मध्यप्रदेश सरकार ने सिंहस्थ क्षेत्र की 12,500 बीघा भूमि को स्थायी रूप से अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विकास अपनी जगह है, परंतु विकास की गति तब खतरनाक हो जाती है जब वह परंपरा, प्रकृति और समाज की धड़कन को कुचलकर गुजरने लगे।
सिंहस्थ कोई इवेंट नहीं—यह ऋषि-परंपरा का अनुष्ठान है। और इस परंपरा को आज तक संजोकर रखने वाला कोई विभाग नहीं, किसान समाज है। वह किसान, जो हर 12 साल में अपनी जमीन सरकार को नहीं, धर्म को देता है—वह भी बिना मुआवजे के, बिना विवाद के।
सरकार को सोचना चाहिए कि क्या वह समझाने से पहले अधिग्रहण की ओर बढ़कर उस विश्वास को तोड़ नहीं रही जो शासन और जनता के बीच सबसे मजबूत कड़ी होता है?
किसानों का यह आंदोलन केवल भूमि बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि एक संदेश है—
“विकास संवाद से हो, दबाव से नहीं।”
यदि नीति में पारदर्शिता और उद्देश्य स्पष्ट न हों, तो सबसे सुन्दर योजना भी विवाद का रूप ले लेती है।सवाल जमीन का नहीं—नीतिगत संवेदनशीलता का है। – राजेश कुमरावत ‘सार्थक’
क्या सरकार की नई भूमि नीति विकास का रास्ता है या किसान हितों पर संकट?
आपकी राय महत्वपूर्ण है—कृपया अपनी टिप्पणी अवश्य दें ।



