झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जरी का चमत्कार: 20 साल बाद सिर दर्द से मुक्ति, फ्रंटल साइनस ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने लौटाई आंखों की रोशनी

न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी के नेतृत्व में सरकारी अस्पताल में दुर्लभ और जोखिमभरा ऑपरेशन, नवाचार से बना ऑर्बिटल रूफ, मरीज को मिला नया जीवन
🩺 झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा का चमत्कार
जनमत जागरण @ झालावाड़।
सरकारी अस्पतालों को लेकर बनी भ्रांतियों को तोड़ते हुए झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि संकल्प, कौशल और नवाचार साथ हों तो सीमित संसाधनों में भी असंभव को संभव किया जा सकता है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामसेवक योगी के नेतृत्व में किए गए एक जटिल और दुर्लभ ऑपरेशन ने न केवल 31 वर्षीय सत्यनारायण को नया जीवन दिया, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आमजन का भरोसा भी मजबूत किया है।

🇨🇭20 वर्षों की पीड़ा, एक माह की बेनिद्रा और आंख की रोशनी पर संकट
अकलेरा निवासी सत्यनारायण पिछले 20 वर्षों से लगातार सिरदर्द से पीड़ित था। बीते एक माह से स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दर्द के कारण नींद तक आना बंद हो गई।
स्थिति तब और भयावह हो गई जब उसकी बाईं आंख अपनी जगह से लगभग 4 सेंटीमीटर नीचे खिसक गई, जिससे दृष्टि पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में की गई जांच में सामने आया कि आंख के ऊपर स्थित फ्रंटल साइनस में ट्यूमर (गांठ) है, जो न केवल आंख बल्कि मस्तिष्क तक फैल चुकी थी।
यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि एक लाख में से किसी एक व्यक्ति को ही होती है और अधिकतर मरीज इसे केवल आंख की समस्या समझकर वर्षों तक भ्रम में रहते हैं।
🇨🇭सबसे जोखिमभरा था ऑपरेशन, रोशनी जाने का था बड़ा खतरा
डॉ. रामसेवक योगी ने बताया कि इस प्रकार के ऑपरेशन में आंखों की रोशनी चले जाने का अत्यधिक खतरा रहता है।
ट्यूमर निकालने के बाद ऑर्बिटल रूफ (आंख के ऊपर की हड्डी) को हटाना पड़ा, जिसे दोबारा बनाना अनिवार्य था।
🇨🇭नवाचार बना जीवन रक्षक उपाय
जहां निजी अस्पतालों में इस प्रक्रिया के लिए 2 से 2.5 लाख रुपये की आर्टिफिशियल बोन की आवश्यकता होती है—जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होती—वहीं डॉ. योगी की टीम ने बोन सीमेंट से ऑर्बिटल रूफ का निर्माण कर प्लेट की सहायता से उसे सफलतापूर्वक स्थापित किया।
इस नवाचार के चलते मरीज की आंख अपनी मूल स्थिति में लौट आई और दृष्टि भी पुनः प्राप्त हो गई।
🇨🇭 देश के बड़े अस्पतालों में भटक चुका था मरीज
मरीज सत्यनारायण ने बताया कि वह राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के कई बड़े अस्पतालों में इलाज करवा चुका था।
लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद राहत न मिलने पर उसने इलाज की उम्मीद छोड़ दी थी और नींद की गोलियों पर निर्भर हो गया था।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क इलाज मिलने के बाद उसने राजस्थान सरकार और डॉक्टरों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
🇨🇭टीमवर्क से मिली सफलता

इस जटिल ऑपरेशन में
डॉ. रामावतार मालव, डॉ. राजन नंदा, डॉ. संजीव गुप्ता
तथा स्टाफ – कन्हैयालाल एवं मुकेश जी
का सराहनीय योगदान रहा।
🇨🇭डॉ. रामसेवक योगी : सरकारी चिकित्सा में नवाचार का चेहरा
यह पहला अवसर नहीं है जब डॉ. योगी ने अपनी कुशलता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार से असंभव को संभव किया हो।
पूर्व में भी उनके द्वारा किए गए अद्भुत और जटिल ऑपरेशनों को जनमत जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
उनका कार्य यह सिद्ध करता है कि सरकारी अस्पताल केवल इलाज के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार और उम्मीद के संस्थान भी बन सकते हैं।




